July 20, 2024 |

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रिटायर्ड ब्रिगेडियर मोदी के खिलाफ क्यों दर्ज कराना चाहते हैं एफआइआर

Sachchi Baten

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश में नफरत और घृणा फैलाने वाला भाषण देने का आरोप

-देहरादून जिला के राजपुर थाने में एफआइआर के लिए रिटायर्ड ब्रिगेडियर सर्वेश दत्त डंगवाल ने दिया आवेदन

नई दिल्ली। देहरादून में रहने वाले एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने थाने में आवेदन देकर पीएम मोदी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। रिटायर्ड ब्रिगेडियर सर्वेश दत्त डंगवाल ने राजपुर थाने में दिए गए आवेदन में कहा है कि राजस्थान के बांसवाड़ा में पीएम मोदी ने ढेर सारे झूठ बोले हैं जिनका तथ्यों से दूर-दूर तक कुछ लेना-देना नहीं है। और यह देश में नफरत और घृणा फैलाने वाला है।

उन्होंने कहा कि 21 अप्रैल, 2024 को दिए गए इस भाषण में पीएम मोदी का कहना था कि कांग्रेस पार्टी मुसलमानों को, जो घुसपैठिया हैं और ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं, आपका सारा धन दे देना चाहती है और यहां तक कि आपका मंगलसूत्र भी बेंच देंगे। उन्होंने कहा कि यह न केवल झूठ है बल्कि सांप्रदायिक वैमनस्य भी पैदा करता है। और यह भारतीय दंड संहिता की धारा 153 (ए) और 504 के तहत आता है। लिहाजा इन दोनों धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने आगे धाराओं का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि धारा 153 (ए) भाषा या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय और ऐसी गतिविधि किसी भी कारण से ऐसे धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय के सदस्यों के बीच भय या चिंता या असुरक्षा की भावना पैदा करती है या पैदा करने की आशंका है तो उसे दंडित किया जाएगा।

इसी के साथ उन्होंने धारा 504 का भी विस्तार से वर्णन किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि शांति भंग करने के इरादे से जानबूझ कर अपमान करना इस धारा के तहत आता है। इस सिलसिले में साक्ष्य के तौर पर उन्होंने यूट्यूब में पीएम मोदी के उस भाषण के अंश को भी दे रखा है जिसमें उन्होंने यह बोला था।

ब्रिगेडियर डंगवाल ने थाने में यह आवेदन 27 अप्रैल, 2024 को ही दे दिया था। इसकी एक प्रति उन्होंने देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिया है।

दरअसल ब्रिगेडियर डंगवाल मौजूदा दौर के राजनीतिक माहौल से बहुत विक्षुब्ध हैं। और खास कर सत्ता पक्ष की ओर से जिस तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं उसको लेकर वह बेहद चिंतित हैं। उनकी यह चिंता उनके द्वारा लिखे गए एक लेख में भी देखी जा सकती है। जिसमें शुरुआत में ही उन्होंने लिखा कि “आज मैं विवशतापूर्ण होकर यह लेख लिख रहा हूं और जो मेरे मन के उद्गार और भावनाओं से प्रेरित होकर शब्दों की माला में पिरोया गया है।

मैं, स्तब्ध हूं कि आज बाइसवीं शताब्दी के भारत में राजनीतिक संवाद का स्तर इतना नीचे गिर गया है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। आप, यदि जनता द्वारा चुने हुए हमारे विधायक और सांसदों की भाषा सुनेंगे तो आपको मलाल होगा कि हमने ऐसी गंभीर भूल की जिसकी वजह से आज हमको अपने निर्णय पर अफसोस करना पड़ रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि कोई कहता है कि गोली मारो सालों को और कोई कहता है कि यह देश रामाजादों का है न कि हरामजादों का। ऐसी भाषा हमारी भारतीय सभ्यता और संस्कारों को शर्मसार और चोट पहुंचाती है।

इस कड़ी में उन्होंने सीधे तौर पर पीएम मोदी को निशाना बनाते हुए कहा कि क्या सत्ता इतनी प्रिय और अहम हो गयी है कि उसके लिए देश का प्रधानमंत्री हमारे मुस्लिम भाइयों और बहनों के लिए इतनी अपमानजनक सोच और शब्दावली का प्रयोग कर सकते हैं जैसी उन्होंने 21 अप्रैल, 2024 को राजस्थान के बांसवाड़ा में की।

मुस्लिम को ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले और घुसपैठिया कह दिया। इस कड़ी में उन्होंने चुनाव आयोग को भी नहीं बख्शा। उनका कहना था कि आश्चर्य है कि मुख्य चुनाव आयोग ने अपनी संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल कर माननीय प्रधानमंत्री जी को चुनाव में भाग लेने से क्यों वर्जित नहीं किया? लेकिन इसका खुद ही जवाब देते हुए वह कहते हैं कि लेकिन जब संस्था ही चाटुकारों का जमघट हो तो फिर हम उनसे क्या उम्मीद कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य और हमारे संविधान का अपमान भी है।

ब्रिगेडियर डंगवाल इसको और साफ करते हुए पीएम मोदी पर हमला और तेज कर देते हैं। उन्होंने लिखा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री अपने संबोधन में यह भी कहते हैं कि आप इनको इनके कपड़ों से पहचान सकते हैं। क्या तात्पर्य है यह कहने का? बड़े भाई का कुर्ता और छोटे भाई का पैजामा और सिर पर टोपी का उपहास करना। आपके पद की गरिमा को शोभा नहीं देता है महोदय। उन्होंने कहा कि आप इन 15 फीसदी देशवासियों के भी प्रधानमंत्री हैं और यह एक नागवार बात है जो आपको गौरवान्वित नहीं अपितु शर्मसार करती है।

और फिर उन्होंने अपनी पीड़ा को दर्ज करते हुए कहा कि मैं एक इंसान, भारत का नागरिक और सशस्त्र सैनिक होने के कारण आपके ऐसे वक्तव्यों से अपने को बहुत पीड़ित और क्षुब्ध महसूस करता हूं। क्या आपकी इंसानियत खत्म हो चुकी है?

उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि मेरे स्कूल के दोस्त और सहपाठी, हमारे गुरुजन, पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी और सैन्य जीवन के कार्यकाल के सहकर्मी और अधिकारी, हमारे माता-पिता के दोस्त, परिवार के मित्र, बच्चों की दाई और खाना बनाने वाले/वाली, पिता के कार्यालय के बाबू और बड़े बाबू/अर्दली/ महावत/ ड्राइवर, हमारा नाई, हमारा दर्जी, हमारा धोबी, हमारा बढ़ई और हमारे जीवन में आने वाले अन्य सज्जन मुस्लिमों को मैं आपके द्वारा इस तरीके से चिन्हित कर और उनके प्रति देशद्रोहपूर्ण बात कहते हुए नहीं सहन कर सकता हूं।

इसके आगे उन्होंने कहा कि खास तौर से जो सशस्त्र सैनिक हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है और वह आपके अनुसार ‘घुसपैठिया हैं, ज्यादा बच्चे पैदा करने वाले हैं और अपने कपड़ों से पहचाने जाते हैं’ बहुत ही अमर्यादित, शर्मनाक और समाज में आपसी बैर और हिंसा को बढ़ावा देने वाली भाषा है।

आखिर में उन्होंने लिखा कि मैं इस लेख को पूरे देशवासियों के साथ साझा कर रहा हूं और उनसे आग्रह कर रहा हूं कि जो सेवानिवृत्त सशस्त्र सैनिक हैं वह भी इसके पक्ष में अपनी आवाज उठाएं। हम देशप्रेमी हैं और देशभक्त हैं लेकिन अंध भक्त नहीं हैं जो केवल आपके महिमामंडन में अपना जीवन जी रहे हैं। आज मां भारती का मुंड लज्जा से झुक गया है कि देश का प्रधानमंत्री ऐसी सोच रखता है और सार्वजनिक सभा में बोल सकता है।

उन्होंने कहा कि मेरा किसी भी राजनीतिक पार्टी से संबंध नहीं है। और मैं केवल सुशासन का कायल हूं। मैं अपनी अभिव्यक्ति की आजादी को व्यर्थ नहीं जाने दूंगा। अंत में उन्होंने लिखा कि सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है। देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है? वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां। हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है?

अंत में उन्होंने जय हिंद, बिस्मिल अजीमाबादी के संबोधन के साथ लेख का समापन किया।


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