July 23, 2024 |

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गंगापुत्र को साक्षात देखना है आपको ? कहां मिलेंगे, पढ़िए पूरा आर्टिकल

Sachchi Baten

  • स्वच्छ भारत मिशन का ब्रांड एम्बेस्डर नियुक्त करने के बाद मीडिया का परिचय कराते तत्कालीन जिलाधिकारी अनुराग पटेल

 

मां गंगा के लिए जीवन को समर्पित कर दिया है सुभाष ओझा ने

 

 

-मिर्जापुर जनपद के छानबे ब्लॉक में गंगा किनारे दुगौली गांव के हैं सुभाष ओझा

-ये 60 साल का छोरा गंगा किनारे वाला बचपन में झूला झूलता था गंगा की लहरों के साथ

-तेल से कम, रेत से हुई ज्यादा मालिश, गंगा सफाई को ही बनाया जीवन का मिशन

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें) । गंगा पुत्र। यह शब्द सुुनने या पढ़ने के दौरान भीष्म पितामह जेहन में आ जाते हैं। उनको ही गंगा पुत्र के नाम से भी जानते हैं। लोकप्रियता के मामले में रामायण टीवी सीरियल के बाद दूसरे स्थान पर महाभारत में मुकेश खन्ना के रूप में गंगा पुत्र को देखा भी होगा। असल में गंगा पुत्र को देखने के लिए आपको मिर्जापुर के छानबे ब्लॉक में गंगा किनारे स्थित दुगौली गांव में जाना होगा। वहां पर सुुभाष ओझा के रूप में आपको गंगा पुत्र का दर्शन हो जाएगा।

  • गंगा किनारे की सफाई करते सुभाष ओझा व उनके साथी

 

करीब साठ साल के युवा सुभाष ओझा ने गंगा की सेवा करने को अपने जीवन का लक्ष्य मान लिया है। वह गंगा की गोद में ही खेल कर बढ़े हुए हैं। गंगा की लहरें इनको डराती नहीं, हिलोरें झूला झुलाती हैं। गहराई में जाते हैं तो लगता है कि मां की गोद में आ गए। बचपन में इनकी मालिश तेल से कम, गंगा की रेत से ज्यादा हुई है। उसी में लोट-पोट कर बड़े हुए।

 

  • इसीलिए इनको गंगा पुुत्र कहा जाता है

जैसे-जैसे सुभाष बड़े होते गए, मां गंगा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का अहसास करने लगे। किनारे की गंदगी इनसे देखी नहीं जाती। गंगा में फूल-पत्ते या अन्य गंदगी फेंकने वाला इनको खुद का दुश्मन लगता है। ये लहरों को चीर कर उस पार भी घाटों की निगहबानी शुरू से ही करते रहे हैं।

  • स्वच्छता अभियान की सफलता के लिए आयोजित अश्वमेध यात्रा में गंगा पुत्र का सम्मान

सुभाष ओझा बताते हैं कि बचपन मेंं तैरकर मां गंगा के इस पार से उस पार जाने में बड़ा मजा आता था। आज इस उम्र में भी बरसात के समय बाढ़ में मां गंगा को आर-पार कर सकते हैं। तैरते समय ही गंदगी देखने पर मन घिन्ना जाता था। फिर उसकी सफाई करते थे। वही अभियान अभी तक जारी है और जीवन पर्यंत जारी रहेगा।

 

इनके इसी गंगा प्रेम की वजह से नमामि गंगे योजना का ब्रांड एम्बेस्डर बनाया गया। इसके अलावा भी तमाम सम्मान मिले हैं। सरकार के अन्य सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं। खुले में शौच करने वालों के साथ गांधीगीरी कर उनकी यह आदत छोड़वाई। सुभाष ओझा ने बताया कि जिनके घरों में शौचालय बने हैं, वे भी बाहर शौच के लिए जाते थे।

 

इनकी इस आदत को छोड़वाने के लिए माला पहनाना शुरू किया। कुछ साथी युवकों को साथ लेकर रास्ते पर खड़े हो जाते थे। जो भी हाथ में बोतल या लोटा लेकर आता, उसे माला पहना कर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया जाता था। लोग पूछते कि यह स्वागत किसलिए। तब उनको बताया जाता था कि आपने बड़ा काम किया है। घर में शौचालय होने के बावजूद इतनी मेहनत करके खुले में शौच करके लौट रहे हैं। लोग शर्मिंदा हुए और यह आदत छोड़ी।

 

इसी तरह से सामाजिक जागरण के लिए हमेशा अभियान चलाते रहते हैं। पौधरोपण, स्वच्छता अभियान आदि अभियानों में शिरकत करते हैं।

 

सुभाष ओझा का परिचय उनके ही शब्दों में…

छः दशक पहले गंगा नदी के तट पर स्थित दुगौली गांव में अवतरण हुआ। बचपन में ही गंगा की लहरों को निहार कर आह्लादित हो जाता था। धरातल से कहीं अधिक सुगमता से गंगा की  की लहरों पर तैरने और आर – पार करने का आनंद ही कुछ अलग था। किंतु गंगा में डुबकी लगाने के पहले घाटों पर शौच करते गंदगी फैलाते लोगों को देखकर मन मयूर कसैला हो जाता था।
जीवन काल में झंझावातों में भटकने के बालू की रेत की तरह समय मुठ्ठी से फिसलता गया। मां गंगा की अविरलता व निर्मलता के लिए संकल्पबद्धता की सोच को अमलीजामा पहनाने का वक्त आ ही गया। गंगा नदी के तटवर्ती गांवों में गंगा दूतों की टीम तैयार कर घाटों की ओर चल पड़ा। मां गंगा के नेमियों प्रेमियों का समर्थन व प्रोत्साहन को प्रसाद मानकर शिरोधार्य किया।
यहां तक कि कोरोना काल में भी बिना किसी सुरक्षा कवच के खुले हाथों से घाट दर घाट जूट के बोरों में प्लास्टिक पोलीथीन व अपशिष्ट पदार्थ इकट्ठा करता रहा। वहीं तट के ऊपर खुले में शौच नहीं करने तथा शौचालय का इस्तेमाल करने के लिए स्वच्छाग्रहियों की टीम के साथ प्रेरित करता रहा। 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण का ब्रांड एंबेसडर बना दिया।  जिले की सांसद व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने हरी झंडी दिखाकर सजे धजे दो घोड़ों वाले अश्वमेध रथ पर बैठाकर कलेक्ट्रेट परिसर से गांवों में स्वच्छता की अलख जगाने के लिए रवाना कर दिया। जिला स्तरीय अधिकारियों ने नमामि गंगे का स्पीयर हेड फ्रंट रनर बना दिया।
जीवन पर्यंत आखिरी श्वांस तक मां गंगा की सेवा करते हुए गंगा की गोद में समाहित हो जाने की मनोभावना परवान चढ़े बस यही कामना है।

 


Sachchi Baten

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