July 16, 2024 |

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शहीद होने की तैयारी कर रहे इस गांव के युवा, जानें कहां के ?

Sachchi Baten

 

आंख दिखाए बाद में, पहले यह आइना देख ले पाकिस्तान व चाइना

 

शहादत देकर शहीद होने की ललक जगा गए गौरा के रवि सिंह

 

रवि की शहादत के बाद छानबे ब्लॉक के गौरा व आसपास के गांवों के युवकों में सीमा पर जाने की मची होड़

 

फिजिकल फिटनेस केे लिए प्रतिदिन कड़ी मेहनत करते हैं युवा

 

प्रशिक्षण का संचालन निश्शुल्क करती है नवरत्न ट्रेनिंग सेंटर नामक संस्था

 

शहीद रवि कुमार सिंह ने भी दिया था इस केंद्र में प्रशिक्षण

 

सुभाष ओझा, मिर्जापुर (सच्ची बातें) । देश के लिए लड़ते हुए सीमा पर शहादत देने का जज्बा देखना हो तो मिर्जापुर जनपद के छानबे ब्लॉक में पड़ने वाले गांव गौरा के चंद्रशेखर आजाद इंटर कालेज परिसर में सुबह किसी भी दिन पहुंच जाएं। यहां चंद्रशेखर आजाद इंटर कॉलेज परिसर में करीब दो दर्जन युवा फिजिकल ट्रेनिंग लेते मिलेंगे। इसी गांव के सैनिक रवि कुमार सिंह 17 अगस्त 2020 को जम्मू के बारामूला सेक्टर में आतंकवादी हमले में शहीद हुए थे। उनकी शहादत ने इस गांव के युवकों का खून और गरम हो गया। अपने गांव के लाल की शहादत का बदला लेने के लिए बाहें फड़कनी लगीं। फिर क्या था, शुरू कर दी सेना में भर्ती होने की तैयारी। इस गांव के करीब दो दर्जन युवा सेना व विभिन्न अर्धसैनिक बलों में हैं।

 

 

 

युवकों के सेना में भर्ती होने के लिए चंद्रशेखर आजाद इंटर कॉलेज गौरा के परिसर में एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा नवरत्न ट्रेनिंग सेंटर निश्शुल्क संचालित किया जाता है। इस संस्था के अध्यक्ष मनीष सिंह हैं। इस गांव के अनुज सिंह, मोहित सिंह, मुकेश सिंह, आलोक सिंह, विकास सिंह, आदर्श सिंह, अमित सिंह सहित करीब दो दर्जन युवा सेना तथा विभिन्न अर्धसैनिक बलों में कार्यरत हैं।  सेना में भर्ती होने के लिए करीब 50 युवक दुश्मन की गर्दन मरोड़ने के लिए अपनी भुजाओं को और मजबूत बनाने के लिए ट्रेनिंग सेंटर में पसीना बहा रहे हैं।

शहीद रवि कुमार सिंह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। इनके पिता संजय सिंह व मां रेखा जब यह कहती हैं कि उनको तो एक ही संतान थी। और भी संतानें होतीं तो रवि के बाद दूसरे को देश की सुरक्षा के लिए सीमा पर भेजने का प्रयास करतीं, उस समय युवकों का जोश परवान चढ़ जाता है।

इस सेंटर में प्रशिक्षण देने का काम गांव के वे युवा करते हैं, जो सेना में या किसी अन्य अर्धसैनिक बल में भर्ती हो जाते हैं। करीब दो दर्जन हैं तो कोई न कोई छुट्टी लेकर गांव आया ही होता है। उसी की जिम्मेदारी प्रशिक्षण की होती है। वह ड्यूटी पर जाता है तो कोई दूसरा आ जाता है। रवि की शहादत के बाद उनके सम्मान में उनके नाम से मनिकठी के पास रोड पर भव्य गेट बना है। अंत्येष्टि स्थल पर चबूतरा बना दिया गया है। शहीद पार्क का निर्माण होना है। इसमें देर से गांव में गुस्सा देखा गया। शहीद की प्रतिमा भी अपेक्षित है।


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