July 24, 2024 |

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उत्तराखंड में 41 मजदूरों की जान बचाने वाले को केंद्र ने क्या ईनाम दिया?

Sachchi Baten

उत्तराखंड में 41 जिंदगियों को बचाने वाले रैट होल माइनर वकील हसन के घर को डीडीए ने किया ध्वस्त

नई दिल्ली। उत्तराखंड में 41 मजदूरों की जिंदगी बचाने वाले रैट होल माइनर वकील हसन को केंद्र सरकार और उसके सरकारी विभाग डीडीए ने उनका घर गिराकर ‘पुरस्कृत’ किया है। दिल्ली के खजूरी खास में स्थित वकील हसन के घर को डीडीए के बुल्डोजरों ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर गिरा दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि पूरे इलाके में यह अकेला घर है, जिसको डीडीए ने ध्वस्त किया है। 80 वर्ग गज एरिया में स्थित हसन का यह घर खजूरी खास के श्री राम कॉलोनी में स्थित था। डीडीए का बुल्डोजर जब घर पर पहुंचा तो हसन और उनकी पत्नी घर पर नहीं थे। केवल बच्चे थे।

सूचना मिलते ही वह भागे-भागे आए और उन्होंने अफसरों को समझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गयी। उन्होंने बताया कि जमीन का रजिस्ट्रेशन सन 1987 का है। उनका कहना था कि “वे (अधिकारी) सुबह ध्वस्तीकरण के लिए पहुंचे। मैं और मेरी पत्नी घर पर नहीं थे। केवल हमारे बच्चे थे। मैं दौड़ कर घर आया। उन्हें आगे नहीं बढ़ने के लिए समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं सुनी।“ 45 वर्षीय हसन राकवेल इंटरप्राइजेज नाम की कंपनी चलाते हैं। और रैटहोल मानर को उसमें काम पर रखते थे।

अपने एक आधिकारिक बयान में डीडीए ने कहा कि “28.02.2024 को खजूरी खास गांव में एक अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही में ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया है। जमीन नियोजित विकास वाली जमीन का हिस्सा थी।”

हसन ने दावा किया कि उनके घर को इलाके में अकेले निशाना बनाया गया है। उसी कतार में दूसरे भी घर हैं। यह एक कॉलोनी है। वे कहते हैं कि यह डीडीए की जमीन है। लेकिन इलाके में केवल मेरा घर गिराया गया है। जिसकी रजिस्ट्री 1987 की है। और हम यहां 2012 से रह रहे हैं। यह 80 गज का प्लाट है।

नवंबर में अपने बचाव अभियान को याद करते हुए हसन कहते हैं कि हम अपने जीवन या फिर जो हमने काम किया, उसके बारे में नहीं सोचते हैं। हम कोई पैसा नहीं मांग रहे हैं। मेरा घर था और मैं केवल अपना घर मांग रहा हूं। हम बच्चों के साथ कहां जाएंगे। किराया देना हमारे बस का नहीं है….दूसरा एकदम से कोई किराए पर मकान मिलेगा नहीं।

नवंबर में बचाव अभियान के सफल होने के बाद हसन ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा था कि हमारी टीम में हिंदू और मुस्लिम दोनों हैं। और दोनों धर्मों के लोगों ने 41 जिंदगियों को बचाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। कोई अकेला इस काम को नहीं कर सकता था। और यही संदेश मैं हर किसी को देना चाहता हूं। हमें एक हो कर रहना चाहिए और नफरत का जहर नहीं फैलाना चाहिए। हम अपना पूरा 100 फीसद देश के लिए देना चाहते हैं। कृपया इस संदेश को हर शख्स तक पहुंचाइये। हसन की कंपनी में 12 लोग काम करते हैं।

(जनचौक की रिपोर्ट)


Sachchi Baten

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