July 20, 2024 |

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WEATHER UPDATE: परिंदे बताने लगे मानसून कब आएगा? समझिए भाषा

Sachchi Baten

परिंदों की मानें तो पूर्वी उत्तर प्रदेश में 20 जून तक सक्रिय हो जाएगा मानसून

-पक्षियों द्वारा घोंसला बनाने में अब की जा रही जल्दबाजी

-गर्मी में सुबह-सुबह पानी पी-पीकर तिनका ढोने में लगे

राजेश पटेल, चुनार/मिर्जापुर (सच्ची बातें)। इस साल मानसून समय से आएगा। परिंदों की हरकतें यही बता रही हैं। परिंदों के संकेत के अनुसार 20 जून तक मानसून हर हाल में आ जाएगा।

प्रकृति की हर हलचल की जानकारी मानव से पहले पशु-पक्षियों को हो जाती है। क्योंकि वे प्रकृति के बेहद करीब होते हैंं। इसीलिए बारिश के साथ विपदा के भी संकेत उनसे मिलते हैं।

देखिए इस वीडियो को….

यहां बात मानसून की हो रही है तो मानसून की आहट मिलते ही पक्षी अपना घोंसला बनाने की प्रक्रिया में जुट जाते हैं। इनमें सबसे सटीक जानकारी कौवे देते हैं। कौवे जब अपना घोंसला बनाना शुरू कर दें तो मान लीजिए कि एक माह में मानसून आएगा।

इस वर्ष कौवों ने करीब 10 दिन पहले ही घोंसला बनाना शुरू किया। फोटो और वीडियो बनाने में सफलता भले ही देर से मिली, लेकिन लगातार निगरानी से स्पष्ट हो गया कि अब उनको घोंसला तैयार करने की जल्दबाजी है। पहले धीरे-धीरे बना रहे थे। अब तेजी आ गई है। पहले एक घोंसला के लिए एक ही कौवा काम में लगा था। आज पहली बार देखा कि अब नर और मादा दोनों जुट गए हैं। यानी मानसून की आहट उनको मिल चुकी है।

कौवे हर साल नया घोंसला बनाते हैं। इसमें वे पुराने घोंसले (यदि बचा है तो) में की भी सामग्री प्रयोग में लेते हैं। कौवे केवल सूखी लकड़ियां, घास नहीं, लोहे के तारों का भी प्रयोग घोंसला बनाने में करने लगे हैं। वीडियो में कौवे की चोंच में लोहे का तार ही है। वह उसे घोंसला तक ले गया।

इस वर्ष तापमान ज्यादा होने के कारण घोंसला बनाने की गति धीमी थी। आठ बजे के बाद पक्षी भी नहीं दिखते थे। वे सुरक्षित स्थानों में छिप जाते थे, ताकि गर्गी से खुद को बचाए रखें। सुबह के तीन घंटे और शाम के दो घंटे ही थे, जिनमें उनको खुद के लिए चारा का इंतजाम करना था और घोंसला भी बनाना था।

अब तापमान कुछ कम हुआ है तो उनके काम के घंटे बढ़ गए हैं। धूप होने पर वे आसपास पानी पी रहे हैं और वहीं पर तिनका भी छांटकर उसे चोंच में पकड़कर पेड़ पर घोंसला के पास ले जा रहे हैं। सुबह करीब दो घंटे घोंसला बनाने में जुटे हैं। इऩकी जल्दबाजी से स्पष्ट हो जा रहा है कि मानसून की बारिश करीब है।

वृक्षों के घोंसलों से मिलते हैं संकेत

कौवे को प्रकृति का मौसम विज्ञानी कहा जाता है। प्रकृति के नैसर्गिक चक्र के संकेतों को समझने की अलौकिक शक्ति कौवों में होती है। बारिश के संदर्भ में कौवों का आकलन काफी सटीक होता है। पौराणिक ग्रंथों में स्निग्ध या नर्म प्रकृति के पेड़ों जैसे आम, करंज या कांटों वाले वृक्षों का कौवों से पुराना संबंध बतलाया गया है। कौवे यदि मई के महीने में अपना घोंसला बबूल या सावर जैसे कांटेदार वृक्षों पर बनाते हैं तो बारिश के कम होने की संभावना रहती है। इसके विपरित यदि वे आम या करंज के वृक्ष पर घोंसला बनाते हैं तो ये अच्छी बारिश के संकेत होते हैं।

बारिश का बताते हैं पूर्नानुमान

कौआ अगर पे़ड़ की पूर्व दिशा की ओर घोंसला बनाता है तो बारिश अच्छी होती है। अगर पश्चिम दिशा की ओर बनाता है तो सामान्य बारिश होगी। उत्तर-दक्षिण की ओर बनाए तो बारिश बहुत कम होती है। अगर कौवा पे़ड़ के शिखर पर घोंसला बनाता है तो बहुत उसे कम बारिश होने का संकेत कहा जा सकता है। हालांकि ऐसा बहुत कम होता है परंतु हुआ तो उसे सूखे का स्पष्ट संकेत मानना चाहिए। कौआ यदि पेड़ की पूर्व दिशा की ओर घोंसला बनाता है तो बारिश अच्छी होती है। यदि पश्चिम दिशा की ओर घोसला बनाता है तो सामान्य बारिश की संभावना होती है। उत्तर-दक्षिण की तरफ बनाए तो बारिश बहुत कम होती है। यदि कौवा पेड़ के शिखर पर घोंसला बनाता है तो यह भी कम बारिश होने के संकेत माने जाते हैं। इस तरह कौवा अतिवृष्टि से लेकर अकाल तक के संकेत अपने घोंसले के जरिए दे देता है।

मादा के अंडों से मिलते हैं वर्षा के संकेत

नर और मादा कौवे मिलकर घोंसले को बनाते हैं। नर कौआ घोंसला बनाने के लिए आवश्यक बारीक लकड़ियां, तिनके और कपास लाता है, तो मादा कौआ सुंदर घोंसले को आकार देती है। मादा कौए के अंडे से भी बारिश का पूर्वानुमान लगाया जाता है। यदि मादा ने चार अंडे दिए हैं तो यह अच्छी बारिश होने का संकेत है। यदि दो अंडे दिए तो कम बारिश के और एक ही अंडा दिया तो अल्पवर्षा के योग हैं। यदि कौवे ने जमीन पर अंडा दिया है तो उस साल भयानक सूखा पड़ने की संभावना रहती है।

 


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