July 24, 2024 |

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विकासः पीडब्ल्यूडी फांसी पर चढ़ा रहा उनको जो हमारे लिए अपनी चमड़ी भी निकलवा देते हैं

जारी है सरकारी संरक्षण में पेड़ों को खत्म करने की नापाक साजिश

Sachchi Baten

‘विकास’ बाबू फांसी पर चढ़ा दे रहे हैं जीवनदाता को ही

जारी है सरकारी संरक्षण में पेड़ों को खत्म करने की नापाक साजिश

कवर पर लगी फोटो सिर्फ फोटो नहीं हैं। सृष्टि के लिए अत्यंत जरूरी ऑक्सीजन देने वालों के साथ ‘विकास’ द्वारा की जा रही क्रूरता की मुकम्मल गवाही है। जो हमें जीवन दे रहे हैं, उनको फांसी पर चढ़ा देने वाले विकास का क्या करेंगे, जब हम ही नहीं रहेंगे। जब सृष्टि ही नहीं रहेगी…

राजेश दुबे, जमालपुर (मिर्जापुर) : ऑक्सीजन के महत्व का पता लोगों को तब चला था, जब कोरोना अपने चरम पर था। लोग एक-एक सिलेंडर ऑक्सीजन के लिए परेशान थे। न मिलने पर लोगों की सांसें थम जाती थीं। प्रकृति का यह संदेश था कि समय है, अब भी सुधर जाओ। पर्यावरण के साथ मजाक न करो, नहीं तो कोई नहीं बचेगा, सृष्टि भी नहीं। लेकिन ‘विकास’ का क्या करें। इसके कानों तक मानो यह संदेश पहुंचा ही नहीं। तभी तो आज भी इसके लिए हरे-भरे पेड़ों की बलि जारी है। काट नहीं पा रहे हैं तो उनको ऐसी फांसी दे दी जा रही है कि वे घुट-घुट कर मरने को विवश हो जाएं।

ताजा मामला मिर्जापुर जनपद के जमालपुर विकासखंड का है। वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग से रानीपुर-जैपट्टी-जमालपुर मार्ग का चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण हो रहा है। हाईवे की तरह सात मीटर चौड़ी सड़क बन रही है। जाहिर सी बात है कि किनारे के पेड़ उसकी जद में आएंगे ही। विकास तो जरूरी है, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी जिंदगी है। हवा है, पानी है, सृष्टि है।

मिर्जापुर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को इतनी सी बात समझ में नहीं आ रही है। सात मीटर की जद में आने वाले पेड़ों को सूखने के लिए विवश कर दिया जा रहा है। पेड़ काटने को लेकर सरकारी नियम सख्त होने के कारण उसे काट तो नहीं रहे हैं, लेकिन काटने से भी बड़ी सजा दे दे रहे हैं। तना के किनारे एकदम सटाकर गिट्टी-अलकतरा के मिश्रण को डाल दे रहे हैं, ताकि जड़ को न हवा मिल सके और न पानी। धीरे-धीरे वे खुद ही सूख जाएंगे। यह क्रूरता ऐसे वृक्षों के साथ की जा रही है, जो सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले छह वृक्षों में शामिल हैं। इसका हर अंग मानव के लिए अत्यंत उपयोगी है। बात कर रहे हैं अर्जुन के वृक्ष की।

रानीपुर-जैपट्टी-जमालपुर मार्ग पर हर्दी नहर पर खेत साइड में किनारे अर्जुन के कई पुराने पेड़ हैं। खेतों में काम करने वाले किसान-श्रमिकों को गर्मी में छाया तो देते ही हैं, अपनी छाल, जड़ व पत्तों के रूप में तरह-तरह की दवाएं भी देते हैं। सबकी छाल छिली हुई है। अपनी छाल निकलवा कर हमें बचाने वाले के साथ लोक निर्माण विभाग मिर्जापुर ऐसी हरकत करेगा, इसकी उम्मीद नहीं थी। अर्जुन के पेड़ों की महत्ता कौन नहीं जानता।

पेड़ों को एक तरह की फांसी देने से तो यही स्पष्ट होता है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई में पर्यावरण शामिल नहीं है। तभी तो ये अवर अभियंता से लेकर विभाग के अभियंता प्रमुख तक को विकास के साथ पर्यावरण के सामंजस्य के बारे में नहीं पता।

लोक निर्माण विभाग मिर्जापुर निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता देवपाल का कहना है कि वे सात फीट तक सड़क तो बनाएंगे ही। इसके बीच में पड़ने वाले पेड़ों को काटा जाएगा। उनको अर्जुन के पेड़ की खासियत के बारे में बहुत विस्तार से समझाया, लेकिन वे समझने को तैयार ही नहीं थे। काफी जिच के बाद जब हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी गई, जब जाकर उन्होंने कहा कि तना से सटाकर डाली गई गिट्टी व अलकतरा को खुदवा कर हटवाएंगे।

सुनिए लोक निर्माण विभाग मिर्जापुर निर्माण खंड-2 के अधिशासी अभियंता देवपाल से फोन पर हुई बातचीत दो बार में… (virol audio)

 

इसी तरह से लखनऊ में तो वीवीआइपी अतिथि गृह के पास भी फुटपाथ पर काफी पुराने जिनको लखनऊ की धरोहर कहा जा सकता है, उनको भी फांसी दे दी गई है। वे हर क्षण तिल-तिल कर मर रहे हैं। उनके तने के चारो तरफ बिल्कुल सटाकर पक्की ढलाई कर दी गई है। अब उनके तने और मोटे नहीं हो सकते।

जड़ों को पानी व हवा नसीब नहीं है। जबकि वृक्ष को स्वस्त रहने के लिए जड़ों को पानी के साथ हवा भी जरूरी है। इसीलिए प्रावधान है कि किसी भी पेड़ की घेराबंदी करते समय उसके तने के चारो ओर पर्याप्त स्थान कच्चा ही छोड़ा जाता है।

 

आइए जिस अर्जुन के पेड़ को लोनिवि मिर्जापुर निर्माण खंड दो के अधिशासी अभियंता देवपाल ने फांसी पर चढ़ा दिया है, उसके बारे में जानते हैं कि वह मानव जीवन ही नहीं, सृष्टि के लिए कितना आवश्यक है…

-अर्जुन की छाल का मुख्य फायदा हृदय रोगों में किया जाता है। अर्जुन के छाल से बने चूर्ण से हृदय में होने वाली बहुत सारी समस्या दूर होती है। अगर हृदय की गति बढ़ गई हो, तो अर्जुन का छाल प्रयोग किया जा सकता है। सामान्य हृदय की गति 1 मिनट में 72 बार हृदय धड़कता है। मगर हृदय की गति बढ़ जाने से 1 मिनट में ह्रदय 150 से भी ज्यादा बार धड़कता है। इस स्थिति में हम अर्जुन की छाल के पाउडर का प्रयोग कर सकते हैं, जो हमारे हृदय की गति को सामान्य करता है।

-मूत्र विसर्जन के समय अगर दर्द होता है और जलन होती है, तो अर्जुन की छाल के काढ़े का प्रयोग किया जा सकता है, जिससे मूत्र विसर्जन में राहत मिलती है।

-अर्जुन के छाल के पाउडर के प्रयोग से हृदय में सूजन में भी  फायदा मिलता है।

-अर्जुन के पाउडर के प्रयोग से हृदय में दर्द और घबराहट जैसी समस्या भी ठीक हो जाती है।

-अगर आप मुंह में होने वाली समस्याओं से ग्रसित है, तो आप अर्जुन की छाल का प्रयोग कर सकते हैं। आप अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर कुल्ला कर सकते हैं, जिससे आपकी मुंह के परेशानी समाप्त हो जाती है। मुंह में दांतों दर्द, मसूड़े की समस्या, दांतों में खून आना, कैविटी यह सभी समस्याएं आपकी अर्जुन की छाल के प्रयोग से ठीक हो जाएंगी।

-अर्जुन की छाल का प्रयोग आप पेट की कमजोरी के लिए भी कर सकते हैं। अगर आपके पेट में अपच की समस्या हो, तो आप अर्जुन की छाल का प्रयोग करेंगे। आपकी यह समस्या बहुत आसानी से सुलझ जाएगी।

-मासिक धर्म के समय अर्जुन की छाल का प्रयोग किया जा सकता है। मासिक धर्म के समय यदि अत्याधिक मात्रा में रक्त स्त्राव होता है, तो अर्जुन की छाल का चूर्ण का प्रयोग किया जा सकता है। जिससे मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्त्राव को रोकने में मदद मिलती है।

-अर्जुन की छाल के चूर्ण का प्रयोग कुष्ठ रोग में भी किया जा सकता है। अर्जुन की छाल को पानी में घिसकर कुष्ठ रोग वाले स्थान पर लगाया जा सकता है और अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से कुष्ठ में लाभ मिलता है।

-अर्जुन की छाल का प्रयोग अल्सर में भी किया जा सकता है।

-अर्जुन की छाल से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है।

-अर्जुन की छाल के प्रयोग से कोलेस्ट्रॉल कम होता है।

-अर्जुन की छाल का प्रयोग मोटापे के लिए भी किया जाता है। आप अर्जुन की छाल का पाउडर का प्रयोग दैनिक रूप से कर सकते है। आपका मोटापा कम हो जाता है।

-टूटी हड्डियों को जोड़ने में भी अर्जुन की छाल का प्रयोग किया जा सकता है, क्योंकि इसकी छाल में भरपूर मात्रा में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को जोड़ने में मदद करता है।

-मधुमेह की बीमारी में अर्जुन की छाल का प्रयोग किया जा सकता है। मधुमेह की बीमारी में अर्जुन की छाल के प्रयोग से शुगर को कंट्रोल किया जा सकता है। इसमें एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं, जो ब्लड में शुगर की मात्रा को कंट्रोल करते हैं। इसके लिए अर्जुन की छाल का पाउडर और जामुन की गुठली के पाउडर के बराबर मात्रा लेकर सेवन किया जा सकता है।

-कील मुहांसों को दूर करने में अर्जुन की छाल का प्रयोग किया जा सकता है। अर्जुन की छाल में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण यह पिंपल्स और कील मुहांसों को दूर करने में मदद करता है। अर्जुन की छाल के पाउडर को आप शहद के साथ मिलाकर चेहरे में लगा सकते हैं, जिससे आपका चेहरा में कील मुहासे के दाग धब्बे और कील मुंहासे दूर हो जाएंगे।

-अर्जुन की छाल का प्रयोग बालों के लिए भी किया जा सकता है। अर्जुन की छाल का पाउडर बनाकर, इसको मेहंदी के साथ लगाने पर बाल काले और घने होते हैं।

 

कहते हैं आयुर्वेदाचार्य

आयुर्वेद के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. संपूर्णानंद कहते हैं कि अर्जुन का वृक्ष तमाम औषधीय गुणों से युक्त होता है। इसकी तो पूजा करनी चाहिए। इसकी छाल, जड़, बीज व पत्ते भी उपयोगी होते हैं। हृदय रोग में तो इसकी छाल का काढ़ा रामबाण से कम नहीं है।

सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाले वृक्षों में शीर्ष छह में शामिल है अर्जुन

ये वो 6 पेड़ हैं, जो आपको अक्‍सर कहीं न कहीं दिख जाएंगे। आपके बगीचे में अगर ये पेड़ नहीं हैं तो तुरंत इन्‍हें लगाएं। ये आपको स्‍वस्‍थ रखेंगे और आपके वातावरण को भी।

पीपल का पेड़

हिंदु धर्म में पीपल तो बौद्ध धर्म में इसे बोधि ट्री के नाम से जानते हैं। कहते हैं कि इसी पेड़ के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्‍त हुआ था। पीपल का पेड़ 60 से 80 फीट तक लंबा हो सकता है। यह पेड़ सबसे ज्‍यादा ऑक्‍सीजन देता है। इसलिए पर्यावरणविद पीपल का पेड़ लगाने के लिए बार-बार कहते हैं।

बरगद का पेड़

इस पेड़ को भारत का राष्‍ट्रीय वृक्ष भी कहते हैं। इसे हिंदू धर्म में बहुत पवित्र भी माना जाता है। बरगद का पेड़ बहुत लंबा हो सकता है और यह पेड़ कितना ऑक्‍सीजन उत्‍पादित करता है, ये उसकी छाया कितनी है, इस पर निर्भर करता है।

नीम का पेड़

एक और पेड़ जिसके बहुत से फायदे हैं, नीम का पेड़।  इस पेड़ को एक एवरग्रीन पेड़ कहा जाता है और पर्यावरणविदों की मानें तो यह एक नैचुरल एयर प्‍यूरीफायर है। ये पेड़ प्रदूषित गैसों जैसे कार्बन डाई ऑक्‍साइड, सल्‍फर और नाइट्रोजन को हवा से ग्रहण करके पर्यावरण में ऑक्‍सीजन को छोड़ता है।

इसकी पत्तियों की संरचना ऐसी होती है कि ये बड़ी मात्रा में ऑक्‍सीजन उत्‍पादित कर सकता है। इससे आसपास की हवा हमेशा शुद्ध रहती है।

अशोक का पेड़

अशोक का पेड़ न सिर्फ ऑक्‍सीजन उत्‍पादित करता है बल्कि इसके फूल पर्यावरण को सुंगधित रखते हैं और उसकी खूबसूरती को बढ़ाते हैं। यह एक छोटा सा पेड़ होता है जिसकी जड़ एकदम सीधी होती है।

पर्यावरणविदों की मानें तो अशोक के पेड़ को लगाने से न केवल वातावरण शुद्ध रहता है बल्कि उसकी शोभा भी बढ़ती है. घर में अशोक का पेड़ हर बीमारी को दूर रखता है. ये पेड़ जहरीली गैसों के अलावा हवा के दूसरे दूषित कणों को भी सोख लेता है।

अर्जुन का पेड़

अर्जुन का पेड़ हमेशा हरा-भरा रहता है। इसके बहुत से आयुर्वेदिक फायदे हैं। इस पेड़ का धार्मिक महत्‍व भी बहुत है और कहते हैं कि ये माता सीता का पसंदीदा पेड़ था। हवा से कार्बन डाई ऑक्‍साइड और दूषित गैसों को सोख कर ये उन्‍हें ऑक्‍सीजन में बदल देता है।

जामुन का पेड़

भारतीय अध्‍यात्मिक कथाओं में भारत को जंबूद्वीप यानी जामुन की धरती के तौर पर भी कहा गया है। जामुन का पेड़ 50 से 100 फीट तक लंबा हो सकता है। इसके फल के अलावा यह पेड़ सल्‍फर ऑक्‍साइड और नाइट्रोजन जैसी जहरीली गैसों को हवा से सोख लेता है। इसके अलावा कई दूषित कणों को भी जामुन का पेड़ ग्रहण करता है।

 

कहते हैं पर्यावरणविद् डॉ. धर्मेंद्र कुमार…

पीपल, नीम, तुलसी अभियान के प्रणेता पटना निवासी डॉ. धर्मेंद्र कुमार कहते हैं कि अर्जुन ही नहीं, कोई भी पेड़ होो, जब उसके तना के चारो ओर सटाकर पक्की ढलाई कर दी जाएगी तो उसी दिन से उसकी उम्र घटनी शुरू हो जाती है, या उसका विकास थम जाता है। क्योंकि तना इसके बाद मोटा होगा नहीं। जड़ में हवा व पानी की कमी होगी। इससे उसके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

कौन हैं डॉ. धर्मेंद्र कुमार…

डॉ. धर्मेंद्र कुमार बिहार के पटना निवासी हैं। ये कई वर्षों से नीम-पीपल-तुलसी अभियान चला रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वे इन पेड़ों के बीज संग्रहित करते हैं। उनसे पौध तैयार करते हैं तथा इन पौधों को देश भर में घूम-घूम कर रोपते हैं। इसके साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं। बीमार पौधों का उपचार भी करते हैं। कहते हैं कि पीपल, नीम व तुलसी के पौधे जितने लगाए जाएं, सृष्टि व मानव स्वास्थ्य के लिए उतना ही ज्यादा अच्छा है।

-सच्ची बातें  www.sachchibaten.com

 

 

 

 


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