July 24, 2024 |

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विधानसभा उपचुनाव 2023 : छानबे की जनता ने अपने पसीने से सींचा है अपना दल एस को

Sachchi Baten

किसानों ने एक बार सिक्के से तौला व दूसरी बार एक लाख रुपये की थैली भेंट की थी डॉ. सोनेलाल पटेल को

अपना दल एस के प्रति छानबे के किसानों की निष्ठा दिख रही है उप चुनाव में

राजेश पटेल, लालगंज (मिर्जापुर)। विधायक राहुल प्रकाश कोल के निधन से रिक्त हुई छानबे विधानसभा के लिए हो रहे उपचुनाव में क्षेत्र के किसानों की अपना दल सोनेलाल के प्रति निष्ठा दिख रही है। चारो ओर अपना दल एस का ही बोलबाला है। कारण चाहे जो भी हो, यहां के किसान, मजदूर सहित हर तबके के लोग अपने-अपने स्तर से राहुल की विधवा पत्नी रिंकी देवी को जिताने के लिए एड़ी-चोटी का पसीना एक किए हुए हैं।

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  • अपना दल के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल को एक लाख रुपये की थैली भेंट करते सीताराम गुप्ता (फाइल फोटो)

 

छानबेे विधानसभा क्षेत्र में अपना दल एस की जड़ें काफी गहरी हैं। यह कहा जाए कि तो कोई गलत नहीं होगा कि इसे अपने पसीने से सींचकर यहां के कार्यकर्ताओं में वटवृक्ष बनाया है। अपना दल का गठन 1995 में हुआ, उसी समय से यहां के लोग डॉ. सोनेलाल पटेल की सामाजिक न्याय की विचारधारा से इतने प्रभावित हुए कि आज तक उनकी निष्ठा इसी पार्टी में बनी हुई है। 1995 से लेकर आज तक तमाम झ्ंंझावातों का सामना करना पड़ा, लेकिन रमाकांत पटेल, रमाशंकर पटेल, डॉ. शिवपूजन सिंह पटेल सहित तमाम लोग पार्टी की रीढ़ बने हुए हैं। शासन व सत्ता के दमन को हंसते हुए झेला और पार्टी को मजबूत करने में जुटे रहे।

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पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष रमाकांत पटेल बताते हैं कि 1995 में अपना दल का गठन होने के बाद पार्टी के संस्थापक डॉ. सोनेलाल पटेल का संपर्क यहां के कार्यकर्ताओं से लगातार बना रहा। उनसे मिल रहे स्नेह से कार्यकर्ता अभिभूत थे। उनके आह्वान पर कुछ भी कर गुजरने को तत्पर थे। यह स्थिति आज तक बनी हुई है। पटेल ने बताया कि यहां के लोगों ने एक-एक रुपया का सिक्का जुटा कर एक बार डॉ. सोनेलाल पटेल को सिक्कों से तौला था। एक बार एक लाख रुपये की थैली भी भेंट की गई थी। उनकी विचारधारा से किसान इतना प्रभावित थे कि उनके नाम पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के तत्पर थे। आज भी हैं। यही कारण है कि उपचुनाव में पार्टी की उम्मीदवार रिंकी देवी की स्थिति काफी मजबूत है।

 

इसी का प्रतिफल है कि इस क्षेत्र से अपना दल एस इतिहास रचने के करीब है। इतिहास इसलिए कि इस क्षेत्र से लगातार तीन बार विधानसभा का चुनाव किसी ने नहीं जीता है। अपना दल एस ने वर्ष 2017 के चुनाव में राहुल प्रकाश कोल को अपना उम्मीदवार बनाया था। राहुल ने 63 हजार 468 मतों से विजय हासिल की थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने राहुल प्रकाश कोल को ही फिर उम्मीदवार बनाया। इस बार भी अपने प्रतिद्वंदी को 38 हजार से ज्यादा मतों से पराजित कर इतिहास बनाया था।

 

2023 की शुरुआत में ही कैंसर ग्रस्त राहुल का निधन हो गया। इसके बाद हो रहे उपचुनाव में अपना दल एस ने उनकी विधवा पत्नी रिंकी देवी को उम्मीदवार बनाया है। यदि रिंकी की जीत हो जाती है तो नया इतिहास कायम होगा। क्योंकि एक ही परिवार से इस क्षेत्र से 1985 से लगातार तीन बार कोई विधायक अब तक नहीं चुना गया है। हालांकि लगातार दो बार चुनाव जीतकर राहुल प्रकाश कोल भी रिकॉर्ड बना चुके हैं।

 

आइए जानते हैं छानबे विधानसभा के चुनाव के इतिहास पर

1974 के चुनाव में इस सीट का नाम छानबे हुआ और यह अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित कर दी गई। इस चुनाव में कांग्रेस के पुरुषोत्तम दास ने भारतीय जनसंघ के रामनिहोर राम को हराया था। पुरुषोत्तम दास एक बार नहीं, लगातार तीन बार यहां से चुनाव जीते। विपरीत परिस्थितियों में भी। 1977 के चुनाव में जनता पार्टी की लहर के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार पुरुषोत्तम दास ने जनता पार्टी के जोखन राम को हरा दिया था। 1980 के चुनाव में पुरुषोत्तम दास ने जीत की हैट्रिक लगाई।

 

1985 के चुनाव में कांग्रेस के भगवती प्रसाद छानबे के विधायक चुने गए। 1989 में जनता दल की लहर में इस पार्टी के उम्मीदवार कालीचरण ने कांग्रेस के भगवती प्रसाद को धूल चटा दी।  1991 के चुनाव में जनता दल के ही दुलारे लाल जीते तथा बीएसपी के श्रीराम भारती दूसरे स्थान पर थे।

 

1993 के चुनाव में बीएसपी के श्रीराम भारती विधायक चुन लिए गए। इन्होंने भाजपा के राजेश कुमार भारती को हराया था।  1996 में भारतीय जनताा पार्टी ने भाईलाल को प्रत्याशी बनाया और वह जीत भी गए। समाजवादी पार्टी के भगवती प्रसाद हार गए।  2002 के चुनाव में बीएसपी से पकौड़ी लाल कोल विधायक चुने गए। सपा के भगवती प्रसाद को फिर मुंह की खानी पड़ी थी। 2007 में बीएसपी के सूर्यभान ने नीला झंडा लहरा दिया। सपा के श्रीराम भारती को जनता ने पसंद नहीं किया।

 

2012 में समाजवादी पार्टी से मैदान में उतरे भाईलाल कोल को फिर इस क्षेत्र के प्रतिनिधित्व का मौका मतदाताओं ने दिया। लेकिन अगले ही चुनाव 2017 में अपना दल एस पार्टी के उम्मीदवार राहुल प्रकाश कोल को जनता में भारी बहुमत सेे विधानसभा में भेजा। 2022 के चुनाव में भी जनता ने उनमें ही विश्वास व्यक्त किया। लेकिन, इस बार वे ज्यादा दिन तक जनता के लिए काम नहीं कर सके। क्रूर कैंसर 2023 की शुरुआत में उनको निगल गया। इसके कारण इस क्षेत्र में उप चुुनाव की नौबत आ गई।

 

 

 


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