July 20, 2024 |

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सस्ची बातेंः असली मोहब्बत की दुकान तो यह है, पढ़िए पूरा आर्टिकल…

Sachchi Baten

प्रेरक स्टोरी

76 साल से बंद है यह दुकान सिर्फ मोहब्बत में

न मकान मालिक जिंदा न दुकानदार, मोहब्बत आज भी जिंदा है

विनय शर्मा एडवोकेट
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शिमला (हिमाचल प्रदेश)। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जब नफरतों के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने की चर्चा की थी तो बीजेपी आइटी सेल की ट्रोल सेना में उनको काफी ट्रोल किया था। लेकिन, इस रिपोर्ट के माध्यम से हम आपको बताने जा रहे हैं कि मोहब्बत की दुकान होती क्या है।

फोटो में जो बंद दुकान दीख रही है, वह दीनानाथ की है जो इंडिया-पाकिस्तान बंटवारे के वक़्त बहुत अफसोस के साथ इस दुकान को पाकिस्तान छोड़कर इंडिया चले आए थे। वहां से आते वक्त बहुत रोए थे और पूरे गांव वालों को भी खूब रुलाया था। इसका मुख्य कारण दुकानदार व गांवों के बीच बेपनाह प्यार था। मोहब्बत थी।

गांव वाले उनको भारत आने ही नहीं दे रहे थे। दीनानाथ ने गांव के लोगों को यह दिलासा दिलाया कि वह वापस उनके पास लौट कर जरूर आएंगे। गांव के लोगों ने इसी शर्त पर उनको भारत वापस आने की इजाजत दी कि वह फिर लौटकर जरूर आएंगे। फिर वह अपनी दुकान में ताला बंद कर भारत चले आए।

पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रोविंस के जिला लोरा लाई में मौजूद इस दुकान पर अभी तक वही ताला लगा है, जो दुकानदार दीनानाथ ने जाते वक्त लगाकर चाबी अपने साथ ले गए थे।

76 साल से यह दुकान बंद पड़ी है। पाकिस्तानी मकान मालिक अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए वसीयत कर दी कि इस दुकान का ताला तब तक नहीं तोड़ा जाएगा या खोला जाएगा, जब तक दुकानदार दीनानाथ वापस नहीं आते।

इस दुकान के मालिक के मरने के बाबजूद उनके बच्चों ने भी इसका ताला नहीं तोड़ा।वसीयत में लिखा कि मैंने उस दुकानदार को जुबान दी है कि यह दुकान तुम्हारे आने तक बन्द रहेगी।

मकान मालिक की औलादों ने आज तक उस ताले को हाथ तक नहीं लगाया। हालांकि उन्हें मालूम है कि दुकानदार यानी दीनानाथ इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन, वफ़ा की यादगार के तौर पर अब तक यह दुकान दो इंसानों के बीच यादगार मोहब्बत की मिसाल बन गई है। कमाल के बंदे थे दोनों-मकान मालिक और दुकानदार। इंसानों के बीच इतना प्यार था। फिर ये नफ़रतें कहां से आ गई ? कौन ले आया ?
” पंछी नदिया पवन के झोंके
कोई सरहद न इन्हें रोके
सरहदें इंसानों के लिए हैं
सोचो ओर तुमने मैंने
क्या पाया इंसान हो के “

(लेखक हिमाचल हाईकोर्ट शिमला में हिमाचल सरकार के पूर्व डिप्टी एडवोकेट जनरल रहे हैं। )
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