July 25, 2024 |

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सच्ची बातें: MIRZAPUR के एक गांव की खंडहरनुमा हवेली में गांधी जी अभी हैंं, मैंने देखा है…आप भी जानिए

Sachchi Baten

मिर्जापुरः 1950 में लालबहादुर शास्त्री जी ने जमालपुर ब्लॉक के चौकिया मिडिल स्कूल परिसर में बापू की प्रतिमा का किया था लोकार्पण

राजेश कुमार दुबे, जमालपुर (सच्ची बातें)। बीस वर्ष के युवकों सहित अधेड़ में गिने-चुने लोगों को पता होगा कि चौकिया मिडिल स्कूल में गांधी जी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। उनके साथ में चौकिया गांव के ख्यातिलब्द जमींदार अजगुत सिंह के पहलवान पुत्र स्व लालवर्ती सिंंह की भी प्रतिमा थी। आाज न तो उस मंदिर जैसे गुंबद के नीचे वह चबूतरा दिखता है, न वहां राष्ट्रपिता व लालवर्ती सिंह की प्रतिमा।

 

गांधी की विचारधारा से बहुत प्रभावित थे चौकिया के निवासी

चौकिया गांव में शिक्षा व स्वास्थ्य पर ध्यान दशकों पहले से दिया जाता है। इसी गांव  से इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो जस्टिस सहित कई लोग उच्च पदों पर आसीन रहे हैं। इसी गांव के निवासी जस्टिस रामसूरत सिंह हाईकोर्ट इलाहाबाद से सेवानिवृत्ति के बाद उत्तर प्रदेश व राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रहे हैं। पढ़ाई के लिए बच्चोंं को बनारस भेजा जाता था। स्वास्थ्य पर भी खासा ध्यान दिया जाता रहा है। अखाड़ा में प्रतिदिन कुश्ती लड़ना अनिवार्य था। प्रशिक्षण के लिए बाकायदा कोच रखे गए थे। गांव के जमींदार परिवार के लालवर्ती सिंह ख्यातिलब्ध पहलवान रहे हैंं। लेकिन लालवर्ती सिंह की 28 साल की ही उम्र में मृत्यु हो गई।

लालवर्ती सिंंह के पिता अजगुत सिंंह जिंदा थे। उस समय गांधी जी के विचारों से इस गांव के लोग काफी प्रभावित थे। उनके असहयोग आंदोलन में यहां के किसानों ने शिरकत किया। स्वाभिमानी इतने कि स्वतंत्रता संंग्राम सेनानी के पेंशन के लिए किसी ने आवेदन ही नहीं दिया। इसी गांव के शिवनाथ सिंह जी थे। वह किसानों के नेता के रूप में जाने जाते थे। दो बार विधाानसभा का चुनाव भी लड़ चुकेे हैं। मूलतः सोशलिस्ट विचारधारा के व्यक्ति थे। लेकिन एक बार जनसंघ से चुनाव लड़े थे। इसी गांव के अभिमन्यु सिंह हैं, जो जमालपुर ब्लॉक के प्रमुख रहे हैं। इनकी पत्नी उर्मिला सिंह भी प्रमुख रह चुकी हैं।

गांधी जी की ही प्रेरणा से जमालपुर विकासखंड से 50 युवा असहयोग आंदोलन में सक्रिय हो गए थे। इनको जेल जाना पड़ा था। इन 50 में शेरवां गांव से 5 जांबाज थे।

गांधी जी की हत्या के बाद लालबहादुर शास्त्री जी ने बापू की प्रतिमा गांवों में लगवाने का एक अभियान सा चलाया था। उसी क्रम में चौकिया मेंं प्रतिमा स्थापित करने की योजना बनी। प्रतिमा बनवाने के लिए जमींदार अजगुत सिंंह तैयार हो गए। उसी समय उन्होंने अपने दिवंगत पहलवान बेटे लालवर्ती सिंह की भी हाथ जोड़े मुद्रा में प्रतिमा बनवा दी। एक ही छतरी के नीचे दोनों प्रतिमाओं को मिडिल स्कूल परिसर में स्थापित किया गया। 1949-1950 में लालबहादुर शास्त्री जी उसका अनावरण करने खुद चौकिया आए थे। शास्त्री जी की ही प्रेरणा से विद्यालय में कताई-बुनाई भी एक विषय था। प्रशिक्षण के लिए हथकरघे लगे थे। बच्चे रूई सेे तकली के माध्यम से सूत बनाते थे। उसी सूत सेे कपड़े, पट्टा आदि की बुनाई करते थे।

शेरवां गांवं निवासी पं. मस्तराम द्विवेदी (85 वर्ष) ने बताया कि शास्त्री जी के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए शेरवां से कांग्रेस नेता पं. राजकुमार शर्मा व उनकी बहन शारदा देवी के साथ और भी कई लोग गए थे। सभा का संचालन शर्मा जी ने किया था। शारदा देवी ने स्वागत गान की प्रस्तुति की। इस कार्यक्रम के बाद शर्मा की गिनती कांग्रेस के बड़े नेताओं में होने लगी थी। इसके परिणाम स्वरूप 1952 में चुनार विधानसभा से पहले विधायक चुन लिए गए।

करीब डेढ़ दशक पहलेे विद्यालय के पुनर्निर्माण के समय प्रतिमा वाला चबूतरा तोड़ना पड़ा था

विद्यालय का भवन पहले खपरैल का था। उसकी दक्षिण दिशा की तरफ की दीवार  आज भी विद्यमान है। सरकारी फंड मिला तो करीब 15 साल पहले विद्यालय भवन का पुनर्निर्माण शुरू हुआ। इसके प्रतिमा स्थल को तोड़ दिया गया। प्रतिमाओं को यूं ही मैदान में कूड़े की तरह रख दिया गया। देखरेख में लापरवाही के कारण गांधी की प्रतिमा की गर्दन अलग हो गई थी। लालवर्ती सिंह की भी प्रतिमा के कान-नाक आदि टूट गए। इसका गुंबद अभी भी कुएं के पास उल्टी अवस्था में पड़ा है। देखिए फोटो…

 

पूरन गोंंड़ बने उद्धारक

पूरन गोंड़ अजगुत सिंह लालवर्ती सिंंह के चौथी पीढ़ी के कारिंदे थे। उन्होंने प्रतिमाओं के बारे में सुना तो बनारस ले जाकर उनको पुरानी स्थिति में बनवाया। पूरन गोंड़ ने बताया कि गोदौलिया पर उस समय बनवाया था। यहां से ऑटो से ले गए थे।  गांधी जी की गर्दन जोड़ने के लिए छेद करके रॉड लगाई गई है। कारीगर के काम में इतनी बारीकी है कि लगता ही नहीं, यह प्रतिमा जोड़ी गई है। जिसको दुबारा असली स्वरूप दिया गया है।

 

बनवाने के बाद पूरन ने दोनों प्रतिमाओं को  लालवर्ती सिंह की खंडहरनुमा हवेली में रख दिया

पूरन ने बताया कि दोनों प्रतिमाओं की मरम्मत कराने के बाद उनको बाबू लालवर्ती सिंह की हवेली के एक कमरे में रख दिया है। चूंकि इस परिवार में कोई वंश नहीं बचा है तो पहले पूरन ही हवेली में परिवार संग रहते थे। अब उनके भाई जमुना का परिवार रहता है। जिस कोठरी में दोनों प्रतिमाएं रखी हैं, वही पूजा  रूम भी है। लिहाजा इन दोनों प्रतिमाओं की भी पूजा प्रतिदिन होती है।

जरूरत है बापू की प्रतिमा फिर सेे विद्यालय में स्थापित करने की

महापुरुषों की प्रतिमाओं को लगाने का मुख्य उद्देश्य उनके बारे में जानकारी तथा उनके जीवन से प्रेरणा लेना होता है। गांधी जी की पूजा भले ही एक परिवार द्वारा की जा रही है, लेकिन उनके दर्शन से आम लोग वंचित हैं। विद्यालय में इसके लिए नया मंडप भी बना है। यदि उसी में स्थापित कर दी जाए तो लालबहादुर शास्त्री की भी याद जिंदा रहेगी। बच्चे प्रतिदिन देखेेंगेे तो उनमें बापू को लेकर जिज्ञासा और बढ़ेगी।


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