July 24, 2024 |

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आज का क्विजः बनौली गांव किस देश में है? ऑप्शन 1-पाकिस्तान 2-चीन

Sachchi Baten

जमालपुर ब्लॉक के बनौली गांव में आने-जाने के लिए चार तरफ से रास्ते, चारो बदहाल

-अमृतकाल आ गया, पूरब से आने वाले रास्ता काला नहीं हो पाया

-सूखा ही में ही आना-जाना है मुश्किल, बरसात होने पर हुड़का बंद

राजेश कुमार दुबे, जमालपुर/मिर्जापुर (सच्ची बातें)। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में अमिताभ बच्चन के प्रसिद्ध शो कौन बनेगा करोड़पति में बनौली गांव को लेकर सवाल पूछा जा सकता है। बनौली गांव किस देश में है। ऑप्शन 1- पाकिस्तान 2- चीन। ऐसा इसलिए कि अमृतकाल आ गया, इस गांव के लिए एक अदद ठीक से रास्ता भी नहीं है।

जमालपुर विकास खंड का बनौली गांव लगता ही नहीं कि इसी देश में है। एक बार यदि आप कार या बाइक से चले गए तो दोबारा नाम नहीं लेंगे। ऐसी स्थिति में इस गांव के लोगों की दाद देनी होगी, जिनका वास्ता रोजाना इस परेशानी से होता है। संपन्न लोगों के इस गांव के साथ इतनी नाइंसाफी क्यों, इसका कोई स्पष्ट कारण समझ में नहीं आता।

इस गांव में चार पहिया या दो पहिया वाहन से जाने लायक चार तरफ से रास्ते हैं। सभी की अपनी अलग-अलग कहानी है। पहले बात करते हैं पूरब की दिशा से गांव में आने वाले रास्ते की। इसे सड़क कहा ही नहीं जा सकता, क्योंकि आजादी का अमृतकाल आ गया, अभी यह काली नहीं की जा सकी है।

पूरब दिशा में ककरही की ओर से बनौली के लिए आने वाले मार्ग की स्थिति।

 

बियार भाई मार्ग पर ककरही मोड़ से भोका नाला पार करके बनौली के लिए रास्ता है। भोका नाला पर पुल तो है, लेकिन रास्ता पक्का नहीं है। बताते हैं कि इस मार्ग पर कभी अलकतरा पड़ा ही नहीं। हां, गिट्टी-मोरम का काम करीब 12 वर्ष पहले हुआ था। यह भी अब खत्म हो चुका है। कहीं-कहीं ही गिट्टी दिखाई देती है। बताते हैं अब जाकर इस मार्ग को पक्का बनाने के लिए राशि आवंटित हुई है, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका है, जिससे ग्रामीणों को भरोसा हो जाए कि आने वाले बारिश को मौसम में जलालत नहीं झेलनी पड़ेगी।

अब आते हैं डूही कलॉ की ओर से आने वाली सड़क पर। डूही सोसाइटी कार्यालय से लेकर बनौली बगीचा तक इसकी स्थिति काफी खराब है। बताया गया कि जब से यह सड़क बनी है, इसकी मरम्मत कभी कराई ही नहीं गई। आलम यह है कि बारिश होने पर आना-जाना काफी मुश्किल हो जाता है।

इस गांव के लिए सबसे प्रमुख सड़क बहादुरपुर-भभौरा मार्ग से देवरिल्ला माइनर की पटरी है। यह तो पक्की है, लेकिन सिर्फ कहने के लिए। छोटे पहिए वाली कारों से इस रास्ते पर चलने पर हमेशा चैंबर छू जाने का डर बना रहता है। इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि पानी भर जाने पर बच्चे डूब सकते हैं। इसी रास्ते से मनऊर स्थित इंटर कॉलेज में इस गांव के तमाम बच्चे रोजाना आना-जाना करते हैं। गड्ढों में साइकिलों से गिरकर चोटिल हो जाते हैं। बरसात होने पर कपड़े खराब हो जाते हैं।

एक और सड़क है ढेबरा-ढेलवासपुर मार्ग। इसके निर्माण का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू है। लेकिन इसकी बिल्कुल अलग ही कहानी है। यह मार्ग ढेबरा गांव में से होकर गुजरता है। इस मार्ग पर इतनी गंदगी रहती है कि लगता है स्वच्छ भारत मिशन का पैगाम यहां तक नहीं पहुंच सका है। लेकिन तीन रास्ते खऱाब होने के कारण बनौली के लोग मजबूरी में इसका ही प्रयोग करते हैं।

बनौली एक नजर में

आबादी-1200

मतदाता-900

स्नातक-200

सरकारी सेवारत या अवकाश प्राप्त-20

 

बनौली के पूर्व प्रधान भृगुनाथ सिंह ने कहा कि ऐसा कोई जनप्रतिनिधि नहीं है, जिसे बनौली गांव में आवागमन की समस्या से अवगत नहीं कराया गया हो। लेकिन पता नहीं क्यों इस गांव के साथ नाइंसाफी की जा रही है। सड़क के लिए ही एक बार मतदान के बहिष्कार का भी एलान किया गया था। अधिकारियों द्वारा भरोसा दिए जाने के बाद मतदान हुआ। लेकिन अधिकारी वादे पर खरे नहीं उतरे। सुनने में आ रहा है कि पूरब की ओर से आने वाले रास्ते को पक्का बनाने के लिए धन आवंटित हो चुका है। देखते हैं कब बनती है। लगता ही नहीं कि बनौली गांव भारत में ही है। आखिर इस गांव के लोगों की गलती क्या है, जो शासन प्रशासन उपेक्षित किए हुए है।

बनौली के ही विश्वनाथ सिंह ने कहा कि ढेबरा की ओर से सभी लोग मजबूरी में ही आते-जाते हैं। मुख्य मार्ग को ककरही की ओर से और बहादुरपुर-भभौरा मार्ग की ओर से है। इन दोनों की स्थिति काफी खराब है। उम्मीद है कि दोनों सड़कों का निर्माण शीघ्र होगा। कभी तो दिन लौटेंगे। जैसे घूर के भी दिन एक बार जरूर लौटते हैं।

 

 

 

 

 


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