July 24, 2024 |

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झारखंड के मूल निवासियों के हक के लिए भिंचीं हजारों मुट्ठियां

Sachchi Baten

आज नहीं जागे तो सब कुछ लुट जाएगा : जयराम महतो

-इंकलाब में सबको भागीदार बनना होगा : संजय मेहता

-चौपारण ब्लॉक मैदान में उमड़ा जनसैलाब, खूब गरजे जयराम महतो और संजय मेहता

-झारखंड को बचाने का बीड़ा उठाना होगा

हजारीबाग (सच्ची बातें)। झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति के द्वारा चौपारण ब्लॉक मैदान में रविवार 8 अक्टूबर को  बदलाव संकल्प सभा का आयोजन किया गया। संजय मेहता के नेतृत्व में आयोजित इस सभा में 50 हज़ार से ज्यादा संख्या में लोग जुटे। सभी ने झारखंडी हक अधिकारों की आवाज बुलंद की। पिछले 45 दिनों से सभा की तैयारी कर रहे संजय मेहता एवं उनकी टीम का प्रयास रंग लाया।

सभा को संबोधित करते हुए जयराम महतो ने कहा कि झारखंड एक मुश्किल दौर में है। दो दशकों के बाद भी झारखंड में झारखंडियों के लिए नीतियाँ नहीं बन पायी हैं। आज तक स्थानीय नीति खतियान आधारित नहीं बन पायी है। नियोजन नीति भी अब तक नहीं बन पायी है। झारखंड की जमीनों को लूटा जा रहा है।

 

 

60: 40 नियोजन नीति झारखंडी जनमानस को स्वीकार्य नहीं है। पुनर्वास की भी नीति नहीं बन पायी है। जमीनों की लूट अत्यंत चरम पर है। ऐसे में सभी झारखंड वासियों को एकजुट होकर यह लड़ाई लड़नी होगी। नहीं तो सबकुछ लूट जाएगा। हमारे ऊपर चारो तरफ से हमला है। आज नहीं जागे तो हमारी पीढ़ियाँ बर्बाद हो जाएंगी। हमारे बाल – बच्चे बेघर हो जाएंगे। अगली पीढ़ी बहुत मुश्किल में चली जाएगी।

संजय मेहता ने कहा कि झारखंड को एक साजिश के तहत बर्बाद किया जा रहा है। यहाँ अफसर नेता सब मिलकर झारखंड को लूट रहे हैं। हमारी जमीन और रोजगार सब कुछ को लूट लिया गया है। हमारे लोग अपनी ही जमीन पर किरायेदार बन गए हैं। सभी नियुक्ति की प्रक्रिया में पेंच फँस जाता है। नेता भी चुप हैं। जनप्रतिनिधि ही हमारे शोषक बन गए हैं। जो नेता हमारी माटी से नहीं हैं, उन्हें मिट्टी से लगाव नहीं है। जो माटी के नेता हैं, वे व्यापारी बन गए हैं। झारखंड की जनता नेतृत्वविहीन हो गयी है। आज अगर नहीं जागे तो झारखंड का सब कुछ लूट जाएगा। एक एक झारखंडी को जगाना होगा। यह इंकलाब का दौर है। सबको इसमें भागीदार बनना पड़ेगा।

 

 

झारखंड को बचाने की लड़ाई सबको मिलकर लड़नी होगी। झारखंड आज एक ऐसे रास्ते पर खड़ा है, जहां से एक नई शुरुआत की जरूरत है। हमारी माटी के साथ छल इतना अधिक कर दिया गया है कि अब पूरा झारखंड जाग चुका है। यह आंदोलन अब नहीं रुकेगा। उन्होंने कहा कि झारखंड में एक बड़े बदलाव को लेकर हम सभी संकल्पित हैं। झारखंड के युवा जाग चुके हैं। अब यहाँ परिवर्तन होकर रहेगा।

बड़े बदलाव की जरूरत : भुनेश्वर यादव

भुनेश्वर यादव ने कहा कि झारखंड में एक बहुत बड़े बदलाव की जरूरत है। इसके लिए हम सबको तैयार रहना होगा। झारखंड के लिए यह आंदोलन बदलाव का एक दौर है। सभी झारखंडी को उठ खड़ा होना होगा। यह एक बड़े परिवर्तन का दौर है। यह आंदोलन एक उम्मीद का आंदोलन है। पूरे झारखंड में जनजागृति पैदा हो चुकी है।

ज्ञात हो कि झारखंड के जनमुद्दों को लेकर झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति (जेबीकेएसएस) पूरे राज्य में सभाएं कर रही है और लगातार झारखंड वासियों के हक़ और अधिकारों को लेकर जनजागरूकता अभियान चला रही है। संजय मेहता ने सभा से आह्वान किया कि इस आंदोलन को तब तक जारी रखना है, जब तक झारखंडियों को पूर्ण हक नहीं मिल जाता।

सभा में हज़ारों की संख्या में लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा

झारखंडी मुद्दों पर लगातार जुट रही यह भीड़ स्पष्ट स्थानीय और नियोजन नीति की माँग कर रही है। साथ ही झारखंड की 81 विधानसभा और 14 लोकसभा सीटों पर स्थानीय झारखंडी को सांसद, विधायक बनाने को लेकर लालायित है। क्योंकि आम झारखंडी जनमानस सत्ता के छल से तंग आ चुका है।

बदलाव संकल्प सभा में बरही विधानसभा के आम लोग पहुँचे। कड़ी धूप में लोग घन्टो वक्ताओं को सुनते रहे। महासभा की शुरुआत से पहले झारखंड के वीर क्रांतिकारियों को याद कर नमन किया गया। चौपारण, ओबरा में पानी में डूबकर हुई तीन बेटियों की मौत पर मौन रखकर उन्हें नमन किया गया। इसके बाद वक्ताओं ने अपनी-अपनी बातों को रखा।

सभा के ये रहे मुख्य प्रस्ताव

झारखंडी कौन है खतियान के आधार पर तय हो

झारखंड की स्थानीय नीति, नियोजन नीति, पुनर्वास नीति में कोई स्पष्टता नहीं है। झारखंडी की पहचान आज तक परिभाषित नहीं हो पायी है। स्थानीय नीति को झारखंडी भावनाओं के अनुरूप परिभाषित करने की जरूरत है। यह नहीं होगा तो झारखंड के लोगों को नियोजन में भी परेशानी होगी। खतियान पर स्थानीयता परिभाषित हो।

स्थानीय नीति को लेकर मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत

संजय मेहता ने स्थानीय नीति पर कहा कि 1932 के पहले और 1964 के बाद जिला का अंतिम सर्वे का खतियान ही झारखंड की स्थानीयता का आधार होना चाहिए। इस पहलू से पूरा राज्य कवर हो जाएगा। जब तक खतियान को स्थानीयता का आधार नहीं बनाया जाएगा, बाहरी अतिक्रमण से झारखंड को बचाना मुश्किल है। हमारी नौकरी और जमीन को लगातार संस्थागत तौर पर लूटा जा रहा है।

नियोजन नीति झारखंडियों के खिलाफ

पिछली सरकार से पहले नियुक्तियों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। लेकिन, इसमें ईडब्ल्यूएस के तहत सवर्णों का आरक्षण जुड़ जाने के बाद यह 60 प्रतिशत हो गया। ऐसे में 60 प्रतिशत सीटों पर नियुक्तियां झारखंड के आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों की होंगी। वहीं 40 प्रतिशत सीटें ‘ओपन टू ऑल’ है। अर्थात कोई भी आवेदन कर सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि केवल 60 प्रतिशत आरक्षित सीटें ही ऐसी हैं, जिन पर झारखंड के ही अभ्यर्थियों की नियुक्ति होनी है। बाकी के 40 प्रतिशत सीटों पर किसी भी राज्य के युवा झारखंड में रोजगार पा सकते हैं। यह नीति स्वीकार्य नहीं है। तृतीय और चतुर्थ वर्ग की नौकरी झारखंडियों के लिए आरक्षित हो।

बिना जेटेट शिक्षक नियुक्ति जायज नहीं

सभा में कहा गया कि सरकार ने 26 हज़ार शिक्षक नियुक्ति का विज्ञापन निकाला और अहर्ता की शर्त जेटेट को रखा। लेकिन सरकार ने जेटेट की परीक्षा ली ही नहीं। झारखंड बनने के बाद सिर्फ दो बार जेटेट की परीक्षा हुई। ऐसे में अन्य अभ्यर्थी इस प्रतियोगिता में कैसे शामिल होंगे। लगभग 5 लाख बीएड, डीएलएड के अभ्यर्थी फॉर्म भरने से वंचित रह जाएंगे। जेटेट की परीक्षा जल्द हो।

नियोजन नीति पीढ़ियों को संरक्षित करेगा

झारखंड में भी बिहार की तरह नियोजन नीति लागू हो। बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000 की उपधारा 85 के तहत झारखंड सरकार के पास भी यह हक है कि संयुक्त बिहार के समय का कोई भी अधिनियम, संकल्प या गजट को अंगीकृत कर सकते हैं।

इसी के तहत 1982 की नियोजन नीति को अंगीकृत कर बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी नियोजन की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। साथ ही नियुक्ति फॉर्म भरते समय अभ्यर्थी को अपने स्थानीय प्रमाण पत्र की क्रमांक संख्या लिखना जरूरी की जाए। जनसंख्या के अनुपात में सभी वर्गों के लिए जिला स्तर पर आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।

जातिगत जनगणना हो

झारखंड में भी जाति आधारित गणना हो। इसके लिए सरकार जल्द पहल करे।

नियुक्ति समय से हो

11 वीं जेपीएससी का विज्ञापन जारी हो। सभी परीक्षाएं समय से हों। परिणाम समय से जारी हो। सरकार परीक्षा कैलेंडर का पालन करे। नियुक्ति पारदर्शी हो। पेपर लीक को सरकार रोके। परीक्षा में धांधली रोकी जाए।

बोर्ड निगम में झारखंडी हो

सभी बोर्ड निगम में झारखंड के लोग पदस्थापित हों। उन्हें स्थान दिया जाए। एकाधिकार धाँधली स्वीकार्य नहीं है।

पुनर्वास नीति से सामाजिक संरचना बचेगी

विस्थापन के बाद पुनर्वास की स्पष्ट नीति नहीं है। सख्ती से यह नीति लागू हो। इस मुद्दे पर भी सरकार को गंभीर होना होगा। यह झारखंड का एक गंभीर विषय है। एक स्पष्ट नीति बनानी होगी।

ओबीसी को मिले 27 प्रतिशत आरक्षण का हक

झारखंड में ओबीसी को आबादी के अनुपात में या कम से कम 27 प्रतिशत आरक्षण किसी भी शर्त पर दिया जाए। राज्यपाल महोदय विधेयक को वापस न कर उसे संवैधानिक तरीके से लागू कराने में मदद करें।

परिवारवाद की राजनीति ने झारखंड के साथ छल किया

झारखंड को परिवारवाद की राजनीति से मुक्त करना होगा साथ ही यहाँ माटी का सांसद, विधायक बनाना होगा। बड़े राजनीतिक परिवार ने सिर्फ छल, धोखा किया है। इन्हें वोट नहीं देना है।

सभा में फरजान खान, उदय मेहता, राजदेश रतन, राकेश मेहता, विकास महतो, मिथिलेश दांगी, प्रेम नायक, महेंद्र प्रसाद, संजय महतो, डॉ. राजेश मेहता, सुधीर कुमार राम, श्रीकांत, मनोज, राजेन्द्र प्रसाद, राज मेहता, राजेन्द्र राणा, अजय राणा, प्रियंका कुमारी, राजकिशोर, पनेश्वर, श्यामदेव दांगी, सुखदेव दांगी, श्रवण यादव, सुनील यादव, रोहित, मनोज यादव, कृष्णा, रवि, शंकर, सूरज, कुलदीप, सुधीर पांडेय, आदित्य, विकास सिंह,जयंत, बीरेंद्र आदि कार्यक्रम में सम्मिलित रहे और सभा को संबोधित भी किया।

बदलाव संकल्प महासभा में बीते दिनों चौपारण के ओबरा में हुई घटना में तीन बच्चियों को अपने साहसिक प्रयास से सुरक्षित बचाने वाले चयकला के साहिल को जयराम महतो एवं संजय मेहता ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

सभा को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों, कार्यकर्तागण समेत सैकड़ों लोगों का सराहनीय योगदान रहा।


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