July 19, 2024 |

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झारखंड की यह सड़क है खून की प्यासी, जाएं तो संभलकर

Sachchi Baten

एनएच-33 पर चुटुपालु घाटी में हो रहीं दुर्घटनाओं से एनएचएआइ ने पल्ला झाड़ा

-दुर्घटनाओं को रोकने के लिए शुरुआती दौर में डिजाइन बदलने की जिला व पुलिस प्रशासन ने दी थी सलाह

-एनएचएआइ चुटुपालु घाटी की तकनीकी खामी को दूर करे : संजय मेहता

-एनएचएआइ के परियोजना निदेशक ने कहा, चुटुपालू घाटी में दुर्घटना के लिए वह जिम्मेवार नहीं

रामगढ़, झारखंड (सच्ची बातें)। झारखंड की यह सड़क लगता है कि खून की प्यासी हो चुकी है। इस मार्ग के बनने के बाद से अभी तक सड़क दुर्घटनाओं में तीन हजार से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। इस पर तुर्रा यह कि एनएचएआइ ने सड़क में कोई खामी होने से इनकार कर दिया है। सारा दोष वाहन चालकों पर मढ़ दिया।

एनएच-33 बरही से बहरागोड़ा मार्ग पर रांची से पहले रामगढ़ जिला मुख्यालय पड़ता है। रामगढ़ के पटेल चौक से ही चुटुपालु घाटी शुरू हो जाती है। जब इस मार्ग पर टोल नहीं वसूला जाता था, तभी से तकरीबन रोज ही कोई न कोई दुर्घटना हो रही है। इसके लिए तत्कालीन जिला व पुलिस प्रशासन ने एनएचएआइ का ध्यान आकृष्ट कराते हुए सड़क की डिजाईन में बदलाव की सलाह दी थी। इसमें कुछ सलाह मान ली गई, कुछ नहीं।

जिला प्रशासन की ही सलाह पर पटेल चौक पर फ्लाई ओवर बना दिया गया। अब रामगढ़ टाऊन से जाने वाले वाहन नीचे से होकर चौराहा क्रास करते हैं। इस चौक पर तो दुर्घटनाओं में निश्चित रूप से काफी कमी आई, लेकिन रांची की ओर जाने वाली चुटुपालु घाटी में अभी भी दुर्घटनाएं बदस्तूर जारी हैं। कोठार के पास भी दुर्घटनाएं होती थीं। वहां भी दुर्घटना रोकने के उपाय एनएचएआइ द्वारा किए जा रहे हैं, लेकिन चुटुपालु घाटी को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता संजय मेहता ने एनएचएआइ को हाल ही में इस बाबत पत्र लिखा तो जो जवाब आया है, काफी चौंकाने वाला है। एनएचएआइ ने चुटुपालु घाटी में हो रहीं दुर्घटनाओं के लिए सड़क की डिजाइन में खामी से सिरे से नकार दिया है। सारा दोष वाहन चालकों पर मढ़ दिया गया है।

क्या लिखा है एनएचएआइ द्वारा दिए गए जवाबी पत्र में

एनएचएआइ ने जवाब दिया है कि चुटूपालू घाटी खंड एनएच-33 के पहाड़ी भू-भाग पर स्थित है, जिसके दोनों ओर वन भूमि अवस्थित है। इस कारण से चुटुपालू घाटी मे सड़क निर्माण पहाड़ी भू-भाग के आधार पर डिजाइन कर किया गया है। इस खंड मे संरेखन की रूपरेखा जिस प्रकार तैयार की गई है, उसमें वाहनों द्वारा डिजाइन गति का अनुसरण करना अनिवार्य है।

सड़क निर्माण से पूर्व इसकी संरचना (डिजाइन) को लेकर कई प्रकार की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। साथ ही सड़क निर्माण से जुड़े कुशल असैनिक अभियंता (डिजाइनर ) द्वारा इसका प्राक्कलन और डिजाइन तैयार की जाती है एवं भारतीय रोड कांग्रेस (IRC) मानकों में दिए गए दिशा निर्देशों का अनुपालन किया जाता है।

इस खंड के रामगढ़ स्थित पटेल चौक से लेकर चुटुपालू घाटी की लगभग 5.50 किमी के पहाड़ी भू-भाग के अंतर्गत आने के कारण इसका डिजाइन भी पहाड़ी भू-भाग हेतु निर्धारित मानक के अनुरूप ही किया गया है।

कोई भी वाहन जैसे ही समतल भू-भाग से पहाड़ी भूभाग में आता है, वहां वाहनों की गति सीमा बदल जाती है। तात्पर्य यह है कि पहाड़ी भू-भाग (चुटुपालू घाटी) से गुजरने वाले वाहनों को डिजाइन के अनुरूप निर्धारित गति सीमा अर्थात 40 किमी प्रति घंटा की गति के तहत ही गुजारना होगा, अन्यथा इसका परिणाम दुर्घटना का कारण बन सकता है। परन्तु वाहनों द्वारा गति सीमा का प्रायः उल्लंघन किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप दुर्घटनाएं होती हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग-33 के किमी (41.500 से 115.00) के बीच सड़क और परिवहन मंत्रालय ने तीन स्थान, यथा चुटुपालू, पटेल चौक और कोठार पुल को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया है। इसके मद्देनजर एनएचएआइ ने इसका उन्मूलन कार्य भी तत्परतापूर्वक पूरा किया है और कर रहा है।

पटेल चौक पर तीस करोड़ की लागत से VUP का निर्माण कर होने वाली दुर्घटना को पूरी तरह नियंत्रित किया जा चुका है। ठीक वैसे ही कोठार पुल पर भी ब्लैकस्पॉट को दूर करने हेतु निर्माण कार्य प्रगति पर है। सुधार कार्य के रूप में एनएचएआइ ने समय-समय पर चुटुपालू घाटी खंड में भी कई अल्पकालिक सुरक्षा व्यवस्था को लागू किया है। इसके अलावा उपायुक्त द्वारा आहूत सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिए गए निर्णय या दिए गए सुझाव के आलोक में सभी उपाय अमल में लाए गए हैं। भाराराप्रा द्वारा सड़क सुरक्षा के अन्तर्गत जिला प्रशासन से मिलने वाले सभी निर्देशों का पालन किया गया है। चुटूपालू घाटी में निरन्तर हो रहीं दुर्घटनाओं के लिए एनएचएआइ को जिम्मेदार मान लेना उचित नहीं है।

क्या कहते हैं संजय मेहता

एनएचएआइ के जवाब को लेकर संजय मेहता ने कहा कि यदि सड़क निर्माण में तकनीकी खराबी को लेकर लगातार दुर्घटना हो रही है तो इसके लिए सीधे तौर पर एनएचएआइ जिम्मेवार है। एनएचएआइ तत्काल इस खामी को दूर करे। क्योंकि अब तक आधिकारिक एवं अन्य आंकड़ों को मिलाकर यहां तीन हज़ार से अधिक मौतें हो चुकी हैं। संजय मेहता ने कहा कि यदि एनएचएआइ इस खामी को दूर नहीं करेगा तो इसको लेकर केंद्रीय मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराएंगे।


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