July 23, 2024 |

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शिक्षा की लालटेन ले मुसहरों की झोपड़ी की ओर निकल पड़ा है यह दंपती

Sachchi Baten

प्रेरक स्टोरी

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चूहा व उनके बिलों में एकत्रित अन्न खाने वाली जाति के बच्चों में जगा रहे शिक्षा की भूख

-शिक्षा जागृति अभियान के तहत गरीब बच्चों को पढ़ा रहे निश्शुल्क

-अब तक एक हजार से ज्यादा बच्चों की जिंदगी को शिक्षा से किया रौशन

-मुसहर समाज की पहली ग्रेजुएट बालिका बनाया माया को

राजेश पटेल, बनारस (सच्ची बातें)। बनारस के चौबेपुर के पास है उगापुर गांव। यहां के मनोज कुमार यादव दंपती ने अपने जीवन का लक्ष्य ही बना लिया है शिक्षा दान। यह दान उन बस्तियों में करते हैं, जहां शिक्षा के प्रति अभी जागरूकता की पहुंच नहीं हो सकी है। इनका मुख्य फोकस ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले परिवारों तथा घूमंतू जातियों जैसे मुसहर आदि के बच्चों को पढ़ाकर एक इंसान बनाने का है। इस कार्य में उनकी पत्नी अनिता भी सहयोग करती हैं।

उगापुर व आसपास के गांवों में मुसहरों की आबादी काफी ज्यादा है। राजभर व चमार समाज के लोग भी हैं। राजभर व चमार जाति के लोग तो शिक्षा के प्रति कुछ जागरूक हुए भी हैं, लेकिन मुसहर समाज के बच्चे अभी भी दिन भर चूहा मारने व उनके द्वारा बिलों में एकत्रित अनाज के दानों को ही एकत्रित करने में जुटे रहते हैं। ताकि भोजन मिल सके। ऐसी स्थिति में पढ़ाई की कल्पना ही बेमानी है।

मनोज कुमार यादव ने गरीबी के कारण बीएचयू में स्नातक की डिग्री लेने के बाद आगे नहीं पढ़ सके तो उन्होंने ठान लिया कि कोई भी बच्चा पैसे के अभाव में पढ़े बिना नहीं रहेगा। 2017 से शिक्षा जागृति अभियान शुरू किया। गांवों में मुसहरों की बस्ती में जा-जाकर बच्चों को जुटाकर उनको पढ़ाना शुरू किया। स्कूल में एडमिशन कराया। स्कूल भेजने के लिए उनके अभिभावकों को प्रेरित करने का काम किया।

इस समय चौबेपुर के आसपास इनके तीन सेंटर चल रहे हैं। मनोज कुमार यादव खुद तो बच्चों को पढ़ाते ही हैं, उनकी पत्नी अनिता यादव भी पढ़ाती हैं।

ऐसा नहीं है कि मनोज बहुत बड़े धन्ना सेठ हैं। उनका भी परिवार आर्थिक रूप से कमजोर ही है। मां, पिता, पत्नी, बच्चा और खुद मिलाकर पांच सदस्यों का परिवार है। थोड़ी सी खेती है। उसी से आजीविका चलती है।

इसके बावजूद वह प्रतिदिन दिन के तीन बजे से क्लास शुरू कर देते हैं। हालांकि इनकी क्लास में किसी भी जाति के बच्चे को आने से मनाही नहीं है, लेकिन ज्यादा फोकस उन बच्चों पर रहता है, जिनकी आर्थिक पृष्ठभूमि एकदम कमजोर है तथा उनके अभिभावक भी उनकी शिक्षा के प्रति जागरूक नहीं हैं।

सोशल मीडिया के माध्यम से इनके नेक कार्य की जानकारी होने के बाद अब कुछ लोग सहयोग भी करने लगे हैं। इस राशि से गरीब बच्चों के लिए स्लेट, पेंसिल, कॉपी आदि का काम चल जाता है। मुसहर बस्तियों में तो सुबह-सुबह भी जाना पड़ता है।

बच्चों को पकड़-पकड़ कर स्कूल पहुंचाते हैं। इनके प्रयास का परिणाम यह रहा कि जिस मुसहर जाति में कोई बच्चा पढ़ता नहीं था, आज उस समाज की एक बेटी माया ने ग्रेजएशन तक लिया है तथा वाराणसी में कोई प्राइवेट नौकरी भी करने लगी है।

यह समझना गलत होगा कि मनोज सिर्फ पढ़ाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री नहीं समझते। बच्चों के रिजल्ट की भी समीक्षा करते रहते हैं।

                                  मुसहर समाज की ग्रेजुएट बेटी माया।

 

यही कारण है कि मुसहर समाज की कई बेटियां व बेटे हाईस्कूल, इंटर की कक्षा तक पहुंच चुके हैं। इनकी क्लास में 16 साल तक के बच्चे आते हैं। मनोज का मानना है कि यदि देश का एक भी बच्चा किसी वजह से शिक्षा ग्रहण नहीं कर सका तो उस देश को विकसित नहीं कहा जा सकता। शिक्षा के माध्यम से ही भारत विश्वगुरु बन सकता है।

नोट- इस नेक कार्य के लिए यदि आप मनोज कुमार यादव का सहयोग करना चाहते हैं तो उनका मोबाइल नंबर 9451044285 है। आप मनोज से सीधे बात करके किसी भी तरह का सहयोग कर सकते हैं। 


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