July 23, 2024 |

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जमालपुर की मिट्टी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जननी रही है

Sachchi Baten

प्रो. राजाराम शास्त्री से लेकर बद्री सिंह तक लंबी फेहरिश्त है जंग-ए-आजादी में कूदने वालों की

 

राजेश कुमार दुबे, जमालपुर (मिर्जापुर सच्ची बातें)। जमालपुर की मिट्टी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जननी रही है। यह कहा जाए तो गलत नहीं होगा। मिर्जापुर जिले के जमालपुर ब्लॉक के ही निवासी प्रो. राजाराम शास्त्री सहित अभी तक ज्ञात 50 स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आजादी के इन रण बांकुरों को याद कर जमालपुर के बाशिंदे गौरवान्वित हैं।

काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति तथा वाराणसी के सांसद रहे प्रो. राजाराम शास्त्री के हर दिन का एक-एक पल अध्ययन, अध्यापन, लेखन और स्वाध्याय के अलावा जनसेवा को समर्पित था। 24 घंटों का एक-एक क्षण किस तरह समाज हित में काम आए, इसकी मिसाल थे। समाजशास्त्र के अध्येता प्रो. राजाराम शास्त्री का संपूर्ण जीवन महात्मा गांधी के सिद्धांतों से प्रेरित था। उन्होंने गांधीवाद को न सिर्फ विचारों में, अपितु दैनिक जीवन के आचार व्यवहारों में बड़ी शिद्दत से उतारा था।

4 जून 1904 को जन्मे प्रोफेसर राजाराम शास्त्री को 1991 में भारत सरकार के प्रतिष्ठित पद्मभूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया था। इसी वर्ष 21 अगस्त 1991 को 87 वर्ष की अवस्था में उनकी मृत्यु हो गई थी। शास्त्री उनका उपनाम नहीं था, बल्कि उनकी डिग्री थी। उन्होंने काशी विद्यापीठ में अध्यापन कार्य किया। काशी विद्यापीठ में ही जीवन गुजारा और यहीं अंतिम सांस ली।

एक समाजसेवी के रूप में, एक अध्यापक के रूप में और एक सांसद के रूप में भी, जीवन के हर मोर्चे पर प्रो. शास्त्री अदभुत ऊर्जा के साथ खड़े रहते थे। दिन हो रात, जब भी लोगों को उनकी जरूरत महसूस हुई, वे जनता के कंधा से कंधा जोड़कर मजबूती के साथ खड़े रहे। सांसद बनना उनके लिए समाजसेवा का अवसर और दायित्व था, और इस ध्येय के लिए वह मजबूत संकल्प के साथ समर्पित रहे। वे अक्सर कहा करते थे कि समाजसेवा के क्षेत्र में धैर्य ही सबसे बड़ी जरूरत है।

मूल रूप से मिर्जापुर के चुनार क्षेत्र के जमालपुर के रहने वाले प्रो. राजाराम शास्त्री ने 1926 में बतौर प्राध्यापक काशी विद्यापीठ में नौकरी शुरू की थी। इनके साथ चंदौली के सांसद रहे टीएन सिंह और पं. नेहरू सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे बालकृष्ण की भी नियुक्ति हुई थी। 1967 में काशी विद्यापीठ को डीम्ड यूनीवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद वह पहले औपचारिक कुलपति नियुक्त किए गए थे। 1971 में कांग्रेस से लोकसभा का टिकट मिलने के बाद वह कैंपस में रहते हुए ही चुनाव भी जीते। उन्होंने दिग्गज नेता सत्यनारायण सिंह को शिकस्त देकर लोकसभा का सफर तय किया। सत्यनारायण सिंह 1967 के चुनाव में यहां से सांसद चुने गए थे।

लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कुलपति पद से इस्तीफा दे दिया था। 1977 का चुनाव हारने के बाद वह एक बार फिर काशी विद्यापीठ के कुलपति बने। इस बार भी वह चार साल तक कुलपति रहे। जब बनारस से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे थे, तो उनके प्रचार में इंदिरा गांधी आई थीं। बेनियाबाग में सभा हुई थी। पं. कमलापति त्रिपाठी उनके अच्छे मित्र थे। वह भी चुनाव प्रचार करते थे। प्रो. राजाराम शास्त्री ने विद्यापीठ से सेवानिवृत्त होने के बाद सिगरा में मकान बनवाया था, लेकिन वहां वह कभी रहे नहीं। अंतिम सांस तक वह विद्यापीठ स्थित आवास में ही रहे।
प्रो. राजाराम शास्त्री ने कई चर्चित पुस्तकें लिखी हैं,  जिनमें मन के भेड़, व्यैक्तिक मनोविज्ञान, समाज विज्ञान, सोशल वर्क ट्रेडिशन्स इन इंडिया और स्वप्न दर्शन शामिल हैं। समाज विज्ञान और स्वप्न दर्शन के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से श्रेष्ठ लेखक के रूप में  सम्मानित भी किया गया।

जमालपुर विकास खंड के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी

1- प्रोफेसर राजाराम शास्त्री जमालपुर
2- बद्री सिंह शास्त्री बहुआर
3- बृज मोहन गुप्ता
4- दमड़ी सिंह डूही
5- द्वारिका प्रसाद अहरौरा
6- गंगा सिंह खालसा अहरौरा
7- हीरालाल गुप्ता अहरौरा
8- गंगा उदय पाल सिंह अहरौरा
9- हरी विलास सहाय अहरौरा
10- ज्यूत प्रसाद शेरवा
11- जगत सिंह रोशनहर
12- किशोरी
13- मुकुंद लाल
14- मुन्नालाल
15- मुरारी प्रसाद गुप्ता शेरवा
16- रामा प्रसाद अहरौरा
17- ब्रजनाथ जी भदावल
18- रमाशंकर
19- सरदार शंभू सिंह अहरौरा
20- सहदेव सिंह
21- शिवधारी अहरौरा
22- सोभनाथ पांडेय महमूदपुर
23- रामसखी सिंह शास्त्री पीड़खिड़
24- नक्की धारीकर अहरौरा
25- शिरीष चंद्र पांडे अहरौरा
26- बिंद्रा
27- भागेलु राम
28- जगदीश
29- ज्वाला
30- लोकनाथ सिंह डवक
31- श्री नाथ मिश्र अहरौरा
32- परमानंद मिश्रा शेरवां
33- प्रसिद्ध नारायण शेरवां
34- राम सकल सिंह डोहरी अमरपात
३5- रामविलास सिंह मनई
36- श्री राम
37- रामधनी
38- भगेलू सिंह
39- राजकुमार शर्मा शेरवां
40- गौरी शंकर
41- फतेह बहादुर सिंह
42- हीरा सिंह अहरौरा
43- बसावन दास
44- सुखनंदन सिंह शिवपुर
45- नरसिंह सिंह शिवपुर
46- भगवती सिंह ढेलवासपुर
47- लक्ष्मी कांत पांडे भुइली खास
48- विश्वनाथ सिंह विशुनपुरा
49- बद्री आजाद अहरौरा
50- भगवती सिंह ओड़ी

(कुछ के गांव का नाम नहीं पता है, जिनको पता हो, वे कृपया सच्ची बातें के संपादक के मोबाइल नंबर 7909081514 पर प्रेषित करने का कष्ट करें।)


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