July 24, 2024 |

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महिला आरक्षण विधेयक के माध्यम से पिछड़ों के राजनैतिक हक में सेंधमारी

Sachchi Baten

कांग्रेस, सपा और जेडीयू ने कहा, इसमें पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए हो आरक्षण का प्रावधान

-जैसे SC-ST वर्ग को संवैधानिक अवसर मिला है, वैसे ही OBC वर्ग की महिलाओं को मिले मौका- कांग्रेस

-सामाजिक व लैंगिक न्याय का संतुलन हो महिला आरक्षण -अखिलेश यादव

-अजा एवं अजजा की तरह पिछड़े और अतिपिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिए- नीतीश कुमार

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। नए संसद भवन में मंगलवार को लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण का बिल पेश किया गया। इस लिहाज से यह दिन दो मायनों में ऐतिहासिक कहा जाएगा। एक नारी सशक्तीकरण तथा दूसरा पिछड़े वर्ग की महिलाओं के साथ नाइंसाफी के मामले में। इस बिल में पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है।

इसको लेकर प्रमुख विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया की है। ट्विटर पर अपनी राय जाहिर की है। तमाम ह्वाट्सएप्प ग्रुपों में इसकी चर्चा की जा रही है।

प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस का कहना है कि हम हमेशा महिला आरक्षण बिल के पक्ष में रहे हैं। 2010 में कांग्रेस सरकार ने इस बिल को राज्यसभा में पास किया था। राजनीति में जैसे SC-ST वर्ग को संवैधानिक अवसर मिला है, वैसे ही OBC वर्ग की महिलाओं को समान मौका मिलना चाहिए।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि महिला आरक्षण लैंगिक न्याय और सामाजिक न्याय का संतुलन होना चाहिए।

इसमें पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, आदिवासी (PDA) की महिलाओं का आरक्षण निश्चित प्रतिशत रूप में स्पष्ट होना चाहिए।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लंबा ट्वीट किया है। उन्होंने कहा है कि संसद में जो महिला आरक्षण बिल लाया गया है, वह स्वागत योग्य कदम है। हम शुरू से ही महिला सशक्तीकरण के हिमायती रहे हैं और बिहार में हमलोगों ने कई ऐतिहासिक कदम उठाये हैं।

वर्ष 2006 से हमने पंचायती राज संस्थाओं और वर्ष 2007 से नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया। वर्ष 2006 से ही प्रारंभिक शिक्षक नियोजन में महिलाओं को 50 प्रतिशत और वर्ष 2016 से सभी सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। वर्ष 2013 से बिहार पुलिस में भी महिलाओं कोे 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है।
आज बिहार पुलिस में महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी देश में सर्वाधिक है। बिहार में मेडिकल एवं इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी के अन्तर्गत नामांकन में न्यूनतम 33 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिये आरक्षित की गयी हैं। ऐसा करनेवाला बिहार देश का पहला राज्य है। हमलोगों ने वर्ष 2006 में राज्य में महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन के लिए परियोजना शुरू की जिसका नामकरण ‘‘जीविका‘‘ किया।
बाद में तत्कालीन केन्द्र सरकार द्वारा इसकी तर्ज पर महिलाओं के लिए आजीविका कार्यक्रम चलाया गया। बिहार में अब तक 10 लाख 47 हजार स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है जिसमें 1 करोड़ 30 लाख से भी अधिक महिलाएँ जुड़कर जीविका दीदियाँ बन गयी हैं।
हमारा मानना है कि संसद में महिला आरक्षण के दायरे में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की तरह पिछड़े और अतिपिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिये भी आरक्षण का प्रावधान किया जाना चाहिये। प्रस्तावित बिल में यह कहा गया है कि पहले जनगणना होगी तथा उसके पश्चात निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन होगा तथा इसके बाद ही इस प्रस्तावित बिल के प्रावधान लागू होंगे।
इसके लिए जनगणना का काम शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए। जनगणना तो वर्ष 2021 में ही हो जानी चाहिए थी परन्तु यह अभी तक नही हो सकी है। जनगणना के साथ जातिगत जनगणना भी करानी चाहिए तभी इसका सही फायदा महिलाओं को मिलेगा। यदि जातिगत जनगणना हुई होती तो पिछड़े एवं अतिपिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था को तुरंत लागू किया जा सकता था।
सामाजिक न्याय की धुर विरोधी है भाजपा- मुकेश यादव
पिछड़ा वर्ग विभाग उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने भी कहा है कि भारतीय जनता पार्टी सामाजिक न्याय की धुर विरोधी है। आरएसएस घोर मर्दवादी संस्था है, जो अपने गठन के सौ सालो मे भी एक महिला को संघ प्रमुख नही बना सका। महिला सशक्तीकरण के नाम पर भाजपा सरकार पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक तबके की महिलाओं को आरक्षण न देकर गरीब वर्ग की महिलाओं को संसद से दूर रखने का प्रयास किया है। जिसे हम पिछड़े वर्ग के लोग बर्दाश्त नहीं करेंगे।
यह उसी प्रकार की साजिश है, जिस प्रकार से आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के नाम पर सिर्फ कुछ उच्च जातियों को आरक्षण देकर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक तबके के साथ धोखा किया गया और सामाजिक न्याय का भाजपा ने गला घोंटा है।

उन्होंने कहा कि भाजपा और केंद्र सरकार की पिछड़ा, दलित आदिवासी के अधिकारों के प्रति नीयत ठीक नहीं है। यह इन शोषित वँचित जातियों के अवसर और समता के अधिकार आरक्षण की कट्टर विरोधी रही है इन शोषित वँचित तबके की महिलाओं को महिला आरक्षण के अंदर आरक्षण की अनदेखी करने पर कांग्रेस पार्टी इसके लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी।

मनोज यादव ने कहा कि सर्वप्रथम दलित पिछड़े आदिवासी और अल्पसंख्यक तबके की जाति जनगणना करके उसके अनुपात में पिछड़े दलित आदिवासियों और अल्पसंख्यक तबके की महिलाओं को भी सदन में आरक्षण दे।

मनोज यादव ने कहा कि भाजपा महिला सशक्तीकरण के नाम पर कुछ अमीर और संसाधन सम्पन्न वर्ग की महिलाओं को ही सदन में भेजकर इस देश की बहुसंख्यक आबादी को उनके हक और सम्मान से वंचित करने की जो साजिश रच रही है उसको इस देश का बहुसंख्यक तबका बाखूबी समझ रहा है। जिसका मुकमल जवाब समय आने पर इस देश की जनता विशेषकर महिलाएं देने का कार्य करेंगी।

इधर ओबीसी महासभा ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण बिल के मौजूदा स्वरूप पर आपत्ति जताई है। महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अनूप पटेल ने पत्र में लिखा है कि संसद के विशेष सत्र में केंद्र सरकार द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 239ए में संशोधन करके महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का विधेयक पेश किया गया है। अनुच्छेद 333 ए के तहत सदन में एससी एसटी महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान भी है।

ज्ञात हो कि पूर्व मे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की मनमोहन सिंह सरकार द्वारा 2010 में महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पास हुआ था, लेकिन कुछ कारणों के चलते लोकसभा में विधेयक पास नहीं हुआ था।

महिला आरक्षण के संबंध में 1996 में गीता मुखर्जी कमेटी ने मुख्य रुप से 7 सुझाव दिए थे। उनमें से एक यह था कि “ओबीसी समुदाय की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किया जाये।”

ओबीसी महासभा महिला आरक्षण हेतु वर्तमान विधेयक के मसौदे मे ओबीसी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण का कोई प्रावधान न होने पर विरोध दर्ज कराती है. यदि वर्तमान स्वरूप में यह विधेयक पास हो जाता है तो देश की 54% महिलाओं के हक और हिस्सेदारी का हनन होगा जो भारत कभी स्वीकार नहीं कर पायेगा।

डॉ. पटेल ने इस बिल में सुधार के लिए कुछ सलाह दी है।महिला आरक्षण हेतु वर्तमान विधेयक मे 33 परसेंट आरक्षण का प्रावधान है, जो उनकी आबादी के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। ओबीसी महासभा महिलाओ के लिये 50 परसेंट आरक्षण की मांग करती है। देश में विभिन्न सामाजिक वर्गों के वास्तविक आंकड़े उपलब्ध नहीं है। इसलिए जाति जनगणना जल्द से जल्द करवाई जाए, जिससे देश में ओबीसी वर्ग, एससी-एसटी वर्ग और सामान्य वर्ग की वास्तविक आबादी के आंकड़े मिल सकें।

जाति जनगणना के बाद प्राप्त हुए नवीन आंकड़ों के अनुसार ओबीसी/ एससी/एसटी वर्ग का वर्टीकल आरक्षण सुनिश्चित किया जाये। महिलाओं को ओबीसी वर्ग,एससी वर्ग, एसटी वर्ग तथा सामान्य वर्ग के अंतर्गत क्षेतिज 50% आरक्षण का सब -कोटा प्रस्तावित किया जाये। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 340-ए में संशोधन करके ओबीसी वर्ग की महिलाओं को संसद के साथ-साथ विधानसभा में भी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाये। वर्तमान बिल में अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के प्रतिनिधित्व हेतु प्रावधान नहीं है। अतः संसद और विधानमंडलों में उनके प्रतिनिधित्व को भी सुनिश्चित किया जाये।

 

 


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