July 23, 2024 |

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भ्रष्ट आचरण के कारण जिसे दी गई अनिवार्य सेवानिवृत्ति, वह मिर्जापुर में लूट रहा

Sachchi Baten

भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस का सजीव सबूत लोनिवि निर्माण खंड-2

फेंक कर पैसे लूटने में माहिर है सरकार की नजरों में अक्षम अधि. अभियंता देवपाल

-अक्टूबर 2020 में अनिवार्य सेवानिवृत्त किए गए सात अभियंताओं में शामिल था यह अभिंयता भी

-हाईकोर्ट से स्थगन आदेश मिलने के बाद जुगाड़ से फिर तैनाती पा ली मिर्जापुर में ही

-लोनिवि मिर्जापुर निर्माण खंड दो के अधिशासी अभियंता देवपाल के कारनामे

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली योगी सरकार ने मिर्जापुर को लावारिस छोड़ दिया है। तभी तो जिसे अक्षम मानकर सरकार ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी, वह मिर्जापुर को दोनों हाथों से लूटने में लगा है। बात हो रही है लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-दो के अधिशासी अभियंता देव पाल की।

लोनिवि निर्माण खंड-2 मिर्जापुर के अधिशासी अभियंता देवपाल।

 

कहानी विस्तार से…

देव पाल की छवि विभाग में अच्छी कभी नहीं रही। फील्ड में भी नहीं। योगी सरकार दो कार्यकाल अक्टूबर 2022 में लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंताओं के कार्यों की समीक्षा शासन स्तर से की गई तो देवपाल सहित सात अभियंता की सीआर खराब पाया गया। इनमें उनके खिलाफ सेवाकाल में विभिन्न गड़बड़ियों के आरोप हैं।

जिन अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई, उनमें खीरी एनएच विंग के अधिशासी अभियंता गिरजेश कुमार, बलिया के राम केवल प्रसाद, सहारनपुर में तैनात अधिशासी अभियंता मदन कुमार संतोषी, आजमगढ़ में तैनात अधिशासी अभियंता राजेंद्र कुमार सोनवानी और मिर्जापुर में तैनात अधिशासी अभियंता देवपाल के साथ ही एटा में तैनात विपिन पचौरिया, श्रावस्ती में तैनात अधिशासी अभियंता पवन कुमार भी शामिल थे। इनके खिलाफ भ्रष्टाचार व सेवाकाल में विभिन्न गड़बड़ियों के आरोप थे। शासन की ओर से कहा गया था कि जांच के नतीजों और कार्य संतोषजनक नहीं पाए पाए जाने के कारण यह कार्रवाई की गई है।

जब अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई की गई, उस समय देवपाल की तैनाती मिर्जापुर में ही थी। जाहिर है इनके खिलाफ जो आरोप थे, वह सही पाए गए थे, तभी सरकार ने इतनी बड़ी कार्रवाई की थी। लेकिन देवपाल ने हाईकोर्ट से अपने खिलाफ सरकार की इस कार्रवाई पर स्थगन आदेश ले लिया।

असली खेल यहां से…

हाईकोर्ट के इस आदेश को सरकार की ओर से चुनौती नहीं दी गई। लिहाजा इनकी सेवा बहाल हो गई। अब पोस्टिंग होनी थी। देवपाल ने अपनी पोस्टिंग उसी मिर्जापुर जिले में करवाने में सफलता प्राप्त कर ली, जहां से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी। यहां निर्माण खंड दो का चार्ज भी मिल गया। जाहिर है कि फिर से पुराने जिले में ही तैनाती तथा वर्किंग डिवीजन में चार्ज। सब कुछ ऐसे ही नहीं हुआ होगा। जानकारों का कहना है कि यदि सरकार ने देवपाल को गड़बड़ियों का दोषा पाया तो हाईकोर्ट से स्थगन आदेश के खिलाफ उसे कानूनी लड़ाई लड़नी चाहिए थी या वर्किंग डिवीजन में चार्ज नहीं देना था। वह भी पुराने जिले में ही, जहां से अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई। जब ऊपर से नीचे तक सब सेट है तो फिर डर काहे का।

असली बातें तो अभी बाकी हैं, पढ़ते रहिए पीडब्ल्यूडी के अधिशासी देवपाल के कारनामों की कहानी…जारी

 

 

 


Sachchi Baten

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1 Comment
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