July 24, 2024 |

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शुरू करने के बाद ठीकेदार ने सड़क निर्माण रोक दिया, क्या है कारण ?

Sachchi Baten

रानीबाग-जैपट्टी-जमालपुर-जलालपुर मार्ग

भुगतान का भरोसा देकर काम शुरू कराया, लेकिन एक धेला भी नहीं दिया

-इस मार्ग के लिए सरकार ने स्वीकृति दी थी 30 करोड़ रुपये की, आखिर राशि गई कहां ?

-इसी मार्ग के निर्माण की विजिलेंस जांच के लिए कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल ने पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद को लिखा है पत्र

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। जमालपुर ब्लॉक की जीवनरेखा रानीबाग-जलालपुर मार्ग वाया जैपट्टी, जमालपुर मार्ग फंड ट्रांसफर के संजाल में फंस चुका है। इसके लिए कोई और नहीं, विभाग के ही लोग जिम्मेवार हैं। इसी पोर्टल पर लूट की कहानी लगातार प्रकाशित हो रही है। निर्माण में खुल्लम-खुल्ला लूट की विजिलेंस जांच कराने के लिए प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा, बाट-माप और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री आशीष पटेल ने लोक निर्माण विभाग के अपने समकक्ष जितिन प्रसाद को पत्र भी लिखा है। शेष कहानी बाद में- ताजा खबर यह है कि ठीकेदार ने फिर काम बंद कर दिया। यह सड़क लोक निर्माण विभाग मिर्जापुर निर्माण खंड-2 के अधीन है।

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खबर विस्तार से…

इतना होने के बाद फंसने के डर से आनन-फानन में ठीकेदार को बुलवाकर बकाया भुगतान करने का आश्वासन देकर काम शुरू करने को कहा गया। ठीकेदार ने काम शुरू भी कराया। रानीबाग से जैपट्टी वाले भाग में कई स्थानों पर मिट्टी-गिट्टी से समतलीकरण और चौड़ीकरण किया गया। जैपट्टी गांव से होकर गुजरने वाले रास्ते को भी समतल कराया गया। लेकिन जल निकासी की कोई योजना अभी तक ठीकेदार को नहीं दी गई। वहां की मूल समस्या जलनिकासी की ही है। बरसात तो बरसात है, जाड़े तथा गर्मी में भी रास्ते पर पानी लगा रहता है।

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लेकिन आश्वासन के मुताबिक भुगतान नहीं किया गया। नाली का नक्शा भी उपलब्ध नहीं कराया गया है। खासकर भुगतान न होने के कारण ठीकेदार ने काम बंद कर दिया।

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30 करोड़ रुपये हुए थे स्वीकृत

इस मार्ग के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण के लिए सरकार ने 30 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। टेंडर निकाला गया करीब 14 करोड़ का। एग्रीमेंट या बांड करीब 10 करोड़ रुपये का बना। इस सड़क की लंबाई 9.5 किलोमीटर है। ठीकेदार का करीब पांच करोड़ रुपये बकाया है। इसी बकाये के भुगतान का आश्वासन देकर उससे फिर काम शुरू कराया गया।

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दरअसल निर्माण खंड दो के अधिशासी अभियंता देवपाल ने इस सड़क के फंड को कहीं और ट्रांसफर कर दिया। अब किसी अन्य योजना के लिए राशि उपलब्ध हो तो उसे इधर ट्रांसफर करें। फंड ट्रांसफर के ही खेल में इस खंड के अधीन आने वाली सड़कों का बुरा हाल है।

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अगले माह होना है रिटायर

लोक निर्माण विभाग मिर्जापुर निर्माण खंड दो के अधिशासी अभियंता देवपाल को आने वाली फरवरी में ही रिटायर होना है। इसलिए उनकी जब से पुनर्तैनाती हुई है, वह इसी तरह से गोलमाल में जुटे हैं। पहले के कारनामों के मद्देनजर सरकार ने लोक निर्माण विभाग के जिन सात अधिशासी अभियंताओं को सरकार ने समय के पहले अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी थी, उनमें देवपाल भी शामिल हैं। लेकिन हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर स्टे दे दिया। लिहाजा फिर मिर्जापुर में ही तैनात हो गए।

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सोनू मिश्रा कंस्ट्रक्शन पर खूब बरस रही मेहरबानी

अधिशासी अभियंता देवपाल के कार्यकाल में सोनू मिश्रा कंस्ट्रक्शन पर मेहरबानी खूब बरसी है। लोग इस कंस्ट्रक्शन को लूट का जरिया भी बताते हैं। दरअसल अधिशासी अभियंता को अधिकार है कि वह नौ लाख 99 हजार 999 रुपये तक का काम बिना टेंडर के दे सकता है। इतने के बांड पर 40 लाख रुपये तक का भुगतान कर सकता है। इसी अधिकार का दुरुपयोग इनके कार्यकाल में जमकर हुआ है। लंबी सड़कों के टुकड़े कर इस सोनू मिश्रा कंस्ट्रक्शन को फायदा पहुंचाया गया। निर्माण खंड-2 के कार्यालय से सूत्रों ने बताया कि सोनू मिश्रा कंस्ट्रक्शन के नाम से 125 से ज्यादा बांड बने हैं। इसी कारण से उसका टर्नओवर भी अचानक काफी बढ़ गया है।

 

 


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