July 23, 2024 |

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स्वतंत्रता सेनानी रघुबीर सिंह की प्रतिमा का अनावरण 15 जन. को

Sachchi Baten

 बंगरा गांव में थे 30 स्वतंत्रता सेनानी, मूर्ति अनावरण के बहाने मिट्टी को माथे लगाएंगे राज्यपाल

महाराजगंज, सिवान (सच्ची बातें)। बिहार के सिवान जिले में आजादी के मतवालों के गांव बंगरा की मिट्टी को राज्यपाल अपने माथे लगाएंगे। आगामी 15 जनवरी को वह इस गांव में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुबीर सिंह की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। प्रतिमा रघुबीर सिंह पुस्तकालय सह वाचनालय परिसर बंगरा में अवस्थित है।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पुण्यतिथि 26 दिसंबर को आयोजित कार्यक्रम में शामिल सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने यह जानकारी दी।

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आजादी के मतवालों का गांव, एक ही दिन सात युवकों को गोली मारी थी फिरंगी पुलिस ने

पुस्तकालय सह वाचनालय समिति के मानद सदस्य शिक्षक कुमार राजकपूर ने बताया कि मूर्ति अनावरण के लिए सांसद द्वारा की गई घोषणा से गांव में खुशी व्याप्त है। कपूर ने बताया कि आगामी 29 दिसंबर को सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल पुस्तकालय सह वाचनालय परिसर बंगरा में राज्यपाल के कार्यक्रम व मूर्ति अनावरण की कार्य योजना को लेकर चर्चा कर अंतिम रूप देने वास्ते मीडिया कर्मियों से बात करेंगे। पुण्य तिथि कार्यक्रम में शामिल होने के बाद सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने मूर्ति अनावरण स्थल का अनौपचारिक निरीक्षण कर जरूरी निर्देश पुस्तकालय सह वाचनालय समिति के अध्यक्ष कुमार आशुतोष को दिया।

बता दें कि इस गांव में 30 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं। एक ही दिन फिरंगी पुलिस ने आजादी के सात मतवालों को गोली मार दी थी। इसी कारण इस गांव को स्वतंत्रता सेनानियों का गांव कहा जाता है। देश में इस तरह के गांव बहुत कम ही होंगे, जहां इतनी ज्यादा संख्या में स्वतंत्रता सेनानी रहे हों।

इनमेें से एक स्वतंत्रता सेनानी रघुवीर सिंह के नाम पर उनके परिजन रघुवीर सिंह सेवा संस्थान ट्रस्ट चलाते हैं। इसके माध्यम से हर साल स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की जयंती व पुण्य तिथि मनाने के साथ ही सेवा के अन्य कार्य भी किए जाते हैं। ट्रस्टी राजकपूर सिंह टीपू (शिक्षक) ने बताया कि इस ट्रस्ट के माध्यम से माता की रसोई चलाई जाती है। गरीबों को कंबल व वस्त्र आदि का वितरण किया जाता है। जरूरतमंदों को अन्य तरह की भी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। ट्रस्ट के कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष भी आ चुके हैं। पुस्तकालय भी शहीदों को श्रद्धांजलि देने का एक माध्यम ही है। इसके माध्यम से उनके बलिदान को याद किया जाता रहेगा।


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