July 16, 2024 |

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एकाउंटेंट को बाईपास करना कोई इस अधिसासी अभियंता से सीखे

Sachchi Baten

भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस-8

एकाउंटेंट ने लिखित रूप से अवगत करा दिया है महालेखाकार ऑफिस को

-लोनिवि मिर्जापुर निर्माण खंड-2 के अधिशासी अभियंता देवपाल एकाउंटेंट की बिना सहमति के कर रहे फंड डायवर्ट

-इसके कारण तमाम सड़कें अधूरी, चहेते ठीकेदार हो रहे मालामाल

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 के अधिशासी अभियंता देवपाल को किसी का डर नहीं है। क्योंकि वह अतिशीघ्र रिटायर होने वाले हैं। इसीलिए एकाउंटेंट की बिना सहमति के ठीकेदारों को मनमाना भुगतान तथा नियम विरुद्ध फंड डायवर्ट धड़ल्ले से कर रहे हैं। एकाउंटेंट ने इनके कारनामों को लेकर लिखित शिकायत महालेखाकार से की है।

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सरकार द्वारा 2022 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने के आदेश पर हाईकोर्ट से स्थगन आदेश के बाद देवपाल फिर मिर्जापुर में ही कार्यकारी खंड में किसी जुगाड़ से तैनाती क्या पा गए, उनको लगता है कि अभयदान मिल गया है। उनको न जनप्रतिनिधियों द्वारा की गईं या की जा रहीं शिकायतों की फिक्र है, न एकाउंटेंट की आपत्ति का कोई असर। पूरी तरह से मनमानी कर रहे हैं।

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एक सड़क की राशि दूसरे में, दूसरे की तीसरे में डायवर्ट कर फर्जी बिल बनवाकर चहेते ठीकेदारों को लाभ पहुंचाने का क्रम जारी है। जानकारों के अनुसार नियमतः किसी बिल को पास करते समय उस पर एकाउंटेंट का भी हस्ताक्षर जरूरी होता है।

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पहले होता भी था, लेकिन ज्यादा गड़बड़ी देखकर एकाउंटेंट ने हस्ताक्षर करने के साफ मना कर दिया। पता चला है कि एकाउंटेंट ने देवपाल को समझाया भी कि फंड को डायवर्ट करना गलत है। इसका खामियाजा बाद में भुगतना पड़ सकता है। जिस सड़क या कार्य के लिए सरकार से राशि निर्गत हुई है, उसी पर खर्च किया जाना चाहिए।

लेकिन उन्होंने एकाउंटेंट की बातों को दरकिनार कर दिया। एकाउंटेंट ने भी बिलों पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। पता चला है कि अब अधिशासी अभियंता देवपाल बिलों पर एकाउंटेंट के बिना हस्ताक्षर के भी भुगतान कर दे रहे हैं। इनके कुछ चहेते ठीकेदार हैं, इनमें एक जौनपुर तथा दूसरा मिर्जापुर जनपद का ही निवासी है। हाल के एक वर्ष के दौरान इनके खाते का अचानक बढ़ा टर्नओवर बताता है कि विभाग में जमकर भ्रष्टाचार हुआ है।

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फंड डायवर्ट होने का खामियाजा वैसे तो कई सड़कें भुगत रही हैं, जिनका निर्माण अधर में लटका पड़ा है। इनमें सबसे प्रमुख रानीबाग-जैपट्टी-जमालपुर-जलालपुर मार्ग है। ठीकेदार का करीब 5 करोड़ का बिल बकाया है, इस मद में राशि ही नहीं है कि उसका भुगतान हो सके। ऐसा नहीं है कि इसके लिए राशि आई नहीं। आई, लेकिन इसे दूसरी सड़क के लिए डायवर्ट कर दिया गया। अब इस मार्ग की स्थिति कैसी है, फोटो में देख सकते हैं।

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जमुई-रामपुर वाया भुड़कुड़ा मार्ग का एक बार टेंडर निरस्त किया गया तो फिर दोबारा प्रकाशित नहीं कराया गया। जबकि प्रावधान है कि चार बार तक कोई टेंडर प्रकाशित किया जा सकता है। देवपाल ने ऐसा सिर्फ अपने चहेते ठीकेदार सोनू मिश्रा कंस्ट्रक्शन को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किया। अपने अधिकार का दुरुपयोग करते हुए 10-10 लाख रुपये के बांड पर काम कराया जा रहा है। सोनू मिश्रा कंस्ट्रक्शन पर देवपाल इतने मेहरबान हैं कि हाटमिक्स प्लांट के स्थान पर काम मैनुअली करा दिया तो भी भुगतान कर दिया जाता है। इसके अलावा सैकड़ों बांड सिर्फ सोनू मिश्रा कंस्ट्रक्शन के नाम बनवाए गए। जिनका फर्जी बिलों के आधार पर भुगतान भी हो चुका है।

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फंड डायवर्जन की यही कहानी है। जिस सड़क का काम कोई चहेता नहीं कर रहा है, उसकी राशि ही दूसरे मद में ट्रांसफर कर दी जा रही है। फिर सोनू मिश्रा कंस्ट्रक्शन है न। उसके नाम 10-10 लाख का बांड बनवाकर भुगतान कर दिया गया है, फिर इस राशि में अधिशासी अभियंता देवपाल आधी से ज्यादा रकम उससे कमीशन के रूप में वापस ले लेते हैं। इसकी चर्चा विभाग में ही नहीं, पूरे जिले में है। हालांकि रानीबाग-जैपट्टी-जमालपुर-जलालपुर मार्ग के निर्माण में गड़बड़ी की विजिलेंस जांच करने की सिफारिश करते हुए कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल ने लोक निर्माण विभाग के मंत्री जितिन प्रसाद को पत्र लिखा है। सिर्फ इस सड़क की विजिलेंस जांच होने पर फंड डायवर्ट के बड़े खेल का खुलासा होगा। बांड का भी बाजा बजेगा।

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(सभी फोटो रानीबाग-जैपट्टी-जमालपुर-जलालपुर मार्ग की हैं। यह स्थिति जैपट्टी गांव के पास की है।)

असली बातें तो अभी बाकी हैं, पढ़ते रहिए पीडब्ल्यूडी के अधिशासी देवपाल के कारनामों की कहानी…जारी

नोट- मिर्जापुर लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 के अधिशासी अभियंता देवपाल जी यदि इन आरोपों के बारे में कोई सफाई देना चाहते हैं तो स्वागत है। वह मेरे मोबाइल नंबर 7909081514 पर ह्वाट्सएप के माध्यम से भेज सकते हैं। उनकी पूरी बात प्रकाशित की जाएगी।

 


Sachchi Baten

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