July 24, 2024 |

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साहब शरमाए क्या? कोविड-19 वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट से फोटो हटी

Sachchi Baten

थेथरई की भी कोई सीमा होती है या नहीं? सवाल उठना ही काफी है

-हैजा, प्लेग, चेचक, टेटनस, पोलियो जैसे वैक्सीन पर क्या मजाल कोई उंगली उठा दे

-देश  की निगाहें भारत की सबसे बड़ी अदालत की ओर

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और उस धोबी की कथा कहने की जरूरत नहीं है। अग्नि परीक्षा के बावजूद गर्भवती सीता का परित्याग किया था। यहां तो इससे कई गुना बड़ा कलंक लग रहा है। एक फार्मा कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए मानकों का उल्लंघन करने की छूट दे दी गई। इसका नतीजा अब दिखने लगा है। मामला सुप्रीम कोर्ट में है।

इस बीच ताजा खबर यह है कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 वैक्सीन के सर्टिफिकेट में बड़ा बदलाव किया है। सर्टिफिकेट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो हटा दी गई है। इसके पहले उनकी तस्वीर को प्रमुखता से जगह दी गई थी। लिखा था-‘साथ मिलकर भारत कोरोना को हरा देगा।’ एक तरह से सरकार ने टीकाकरण का पूरा श्रेय पीएम मोदी को दिया था। हालांकि भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि ऐसा आदर्श चुनाव आचार संहिता के चलते किया गया है। कोविड-19 सर्टिफिकेट से प्रधानमंत्री की फोटो चुनाव के दौरान पहली बार नहीं हटाई गई है। वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा और पंजाब में विधानसभा चुनाव के दौरान भी पीएम की फोटो हटा दी गई थी। चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के तहत यह होता है।

कुछ लोगों का दावा है कि वैक्सीन बनाने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका द्वारा यूके की अदालत में इसके साइड इफेक्ट्स की बात  कबूल करने के बाद यह कदम उठाया गया है।

कोविड-19 वैक्सीन भारत में बनी पहली वैक्सीन नहीं है। इसके पहले भी कई वैक्सीन बनाए गए, महामारियों पर नियंत्रण पाया जा सका। चेचक, पोलियो, मीजल्स जैसी कई बीमारियों के लिए भारत में बनाए गए टीके दुनिया भर में लगाए गए। वैक्सीन निर्माण के मामले में भारत दुनिया का सिरमौर पहले से ही रहा है। आज भी दुनिया के वैक्सीनेशन कार्यक्रम में 60 फीसद टीके भारत में बनते हैं।

लेकिन,  इन टीकों की गुणवत्ता या साइड इफेक्ट्स पर सवाल कभी नहीं उठे। किसी वैक्सीन पर सवाल पहली बार उठा है। वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ने खुद यूके की एक अदालत में दुर्लभ मामलों में साइड इफेक्ट्स की बात स्वीकार की है।

इधर भारत में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक की घटनाएं बढ़ी हैं। इन घटनाओं को कोविड-19 वैक्सीन से जोड़कर देखा जा रहा है। कोरोना वायरस को काबू करने के लिए ली गई वैक्सीन कोविशील्ड के साइड इफेक्ट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने दाखिल की है। दाखिल अर्जी में कहा गया है कि कोविशील्ड वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका द्वारा लंदन में माना गया है कि इसके कारण बहुत बिरले मामलों में खून का थक्का जमना या प्लेटलेट की संख्या घटना आदि शामिल है। जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञों का पैनल गठित कर इसके साइड इफेक्ट की जांच कराने की मांग की गई है।

अर्जी में मांग की गई है कि कोर्ट एम्स के डायरेक्टर की अध्यक्षता में चिकित्सा विशेषज्ञों का एक पैनल गठित करने का निर्देश दे। यह पैनल सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कोविशील्ड के खतरे और साइड इफेक्ट की जांच करे। यह भी मांग की गई है कि कोरोना काल के दौरान वैक्सीन लेने से गंभीर रूप से अशक्त (विकलांग) हो गए लोगों और जान गंवाने वालों को मुआवजा देने का केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए।

अभी दो दिन पहले की बात है-पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के चेतगंज निवासी दीपक गुप्ता रोज की तरह सुबह साढ़े नौ बजे जिम पहुंचे और एक्सरसाइज शुरू किया। जिम में उपस्थित अन्य साथियों ने बताया कि दीपक के सिर में अचानक तेज दर्द हुआ और गिरकर तड़पने लगे। दोस्त शिवम यादव उन्हें लेकर महमूरगंज स्थित गैलेक्सी अस्पताल पहुंचे लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। वहां डॉक्टरों ने बताया कि दीपक की मौत हो चुकी है।

32 वर्षीय दीपक गुप्ता 10 वर्षों से जिम कर रहे थे और बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिताओं में भी भाग लेते थे। डॉक्टर ने आशंका जताई है कि हार्ट का आकार बढ़ जाने के कारण इस तरह की समस्या होती है। लेकिन आम चर्चाओं में इसे कोविड-19 वैक्सीन का साइड इफेक्ट्स भी होना बता रहे हैं।

इस तरह की घटनाएं देश भर घटित हुई हैं, रेयर ही सही। कहीं पूजा करते तो कहीं नमाज पढ़ते मौत हो जा रही है तो कई नृत्य करते-करते ही। कोरोनाकाल में भारत में जिन दो लड़कियों की कथित तौर पर कोविशील्ड वैक्सीन लेने के बाद मौत हो गई थी, उनके माता-पिता ने भी अब कानूनी कार्रवाई का मूड बनाया है। वैक्सीन की गुणवत्ता पर उठे सवालों को समर्थन खुद इलेक्टोरल बांड कर रहा है।

 

 


Sachchi Baten

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