July 23, 2024 |

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पांच साल तक के बच्चों व गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा

Sachchi Baten

भारत के 21 शहरों में हुआ छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का अध्ययन

-लखनऊ में भी हुआ अध्ययन, चौंकाने वाले आए निष्कर्ष

लखनऊ (सच्ची बातें)। छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का काफी नकारात्मक असर हो रहा है। यह बात एक अध्ययन में सामने आई है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यशाला में हुई चर्चा के माध्यम से नीति निर्माताओं को संदेश दिया गया कि बच्चों के अनुकूल और उनके लिए सुलभ शहरी वातावरण की आवश्यकता है। इस कार्यशाला का आयोजन आइसीएलईआइ साउथ एशिया और राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान (एनआइयूए) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।

लखनऊ से संबंधित अध्ययन के निष्कर्षों से विशेष रूप से यह जानकारी सामने आई कि शहर के छोटे बच्चे और असुरक्षित आबादी विशिष्ट चुनौतियों का सामना कर रही है। लखनऊ में सघन शहरीकरण, वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर और बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए पर्याप्त सार्वजनिक स्थानों तक सीमित पहुंच ने संयुक्त रूप से जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को बढ़ा दिया है। ये कारक इन समूहों के बीच स्वास्थ्य और विकास संबंधी मुद्दों के बढ़ते खतरों का कारण बनते हैं।

पहला अध्ययन “छोटे बच्चे और जलवायु संबंधी अध्ययन (स्टडी ऑन यंग चिल्ड्रन एंड क्लाइमेट – एसवाईसीसी)” आइसीएलईआइ साउथ एशिया द्वारा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) गांधीनगर, आइआइटी खड़गपुर और आइआइटी रुड़की के साथ मिलकर किया गया। यह वैन लीयर फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित है।

आइसीएलईआइ साउथ एशिया के कार्यकारी निदेशक इमानी कुमार ने कहा, “इस अध्ययन में जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण की महत्वपूर्ण चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। विशेष रूप से 0 से 5 वर्ष की आयु के छोटे बच्चों और उनकी देखभाल करने वालों, जो मुख्यतः ईसीडी साइट्स के आसपास रहते हैं, पर इन चुनौतियों के प्रभाव का मूल्यांकन किया गया है।

दूसरा अध्ययन आइसीएलईआइ साउथ एशिया और आइपीएसओएस रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया है। यह अध्ययन भी वैन लीयर फाउंडेशन द्वारा वित्त पोषित है। इसमें 18 भारतीय शहरों में छोटे बच्चों, उनकी देखभाल करने वालों और गर्भवती महिलाओं द्वारा सार्वजनिक स्थानों के उपयोग का विश्लेषण किया गया है। इसमें पारिवारिक सर्वेक्षणों और शहर के अधिकारियों के साथ साक्षात्कार के जरिए सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल के तरीकों का पता लगाया गया है और यह प्रमुख बाधाओं एवं अवसरों की पहचान भी करता है। निष्कर्ष, जिनका मकसद नीति निर्माताओं को सुझाव प्रस्तुत करना है, बच्चों के अनुकूल और उनके लिए सुलभ शहरी वातावरण की आवश्यकता पर जोर देते हैं।


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