July 23, 2024 |

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एक कलाकार की साधना ने घोर नक्सल प्रभावित जंगल को बदल दिया पर्यटन केंद्र के रूप में

Sachchi Baten

कलाकार चित्तो डे ने प. बंगाल के पुरुलिया जिले में स्थित पहाड़ों पर उकेर दिए अनगिनत पक्षियों व जंगली जानवरों के चित्र

हमेशा पक्षियों की उड़ान से प्रेरित 65 वर्षीय चित्त डे ने बिना किसी प्रतिबंध के कैनवास पर अपने काम को प्रदर्शित करने का सपना देखा

चित्तो डे ने पक्षियों के चित्र उकेर कर नक्सल प्रभावित इलाके की अयोध्या पहाड़ी को बना दिया बर्ड हिल

You are currently viewing Pakhi Pahar- পাখী পাহাড়

 

पुरुलिया, प. बंगाल (सच्ची बातें) । आपको एक पहाड़ की कहानी बताता हूं। यह कला व पर्यावरण के प्रति एक कलाकार की भक्ति और दृढ़ संकल्प की कहानी है। प. बंगाल के पुरुलिया जिले में घोर नक्सल प्रभावित अयोध्या पहाड़ी आज यदि पर्यटकों के लिए सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र है तो इसका सारा श्रेय कलाकार चित्तो डे को जाता है। श्री डे इस भव्य सुंदरता के शिल्पकार हैं।

डे पाखी पहाड़ में अपने काम को क्षेत्र की प्राकृतिक स्थलाकृति को नष्ट होने या बर्बाद होने से बचाने के साधन के रूप में देखते हैं।

चित्तो डे के लिए पहाड़ सिर्फ निर्जीव भौगोलिक घटनाएं नहीं हैं, बल्कि जीवित प्राणी हैं, जो उन्हें कला बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इस दिग्गज कलाकार ने पहाड़ियों पर पक्षियों के चित्र बनाकर उन्हें बर्ड हिल्स के नाम से प्रचलित कर दिया।

बताते हैं कि जब उन्होंने चट्टान को तराशने की अनुमति के लिए सरकार से संपर्क किया तो उनका उपहास उड़ाया गया। लेकिन वह अपने सपने को हासिल करने के लिए दृढ़ थे। अंत में, यह अनुमति 1995 में मिल सकी।

बता दें कि पहाड़ियों के इस हिस्से में माओवादी नक्सली डेरा जमाए हुए थे। उनके डर के कारण इस सुरम्य व शांत स्थान पर कोई जाता ही नहीं था। इसी कारण यह स्थान वीरान होता जा रहा था।

गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज, कोलकाता के पूर्व छात्र चित्तो डे ने अपनी लगन, परिश्रम व दृढ़ संकल्प के जरिए एक रमणीक पर्यटक स्थल में बदल दिया है।

उन्होंने मुख्य रूप से पक्षियों और अन्य जानवरों की छवियों को चट्टान में उकेरा है। आपको आश्चर्य होगा कि जब उन्होंने यह प्रोजेक्ट शुरू किया तो उनकी जेब में सिर्फ 12 रुपये थे। बाद में राज्य सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए तीन करोड़ रुपये दिए।

पाखी पहाड़, जिसमें डे की पक्षियों की यथास्थान नक्काशी है, पुरुलिया के परिदृश्य का एक प्रसिद्ध हिस्सा है

बताते हैं कि तीन दशक पहले, 1989 में चित्तो डे ने यहां पहाड़ों की पेंटिंग शुरू की। उन्होंने पक्षियों की हर हरकत को आत्मसात किया। अपनी कल्पनाओं में उनकी हरकतों को संजोए रहे। बाद में इन पहाड़ों पर पक्षियों को लेकर अपनी कल्पनाओं को रंगों के माध्यम से उकेरा।

डे का मानना ​​है कि चट्टानों में स्वाभाविक रूप से छवियां होती हैं और एक बार जब अतिरिक्त बिट्स को काट दिया जाता है, तो इमेजरी प्रकट हो जाती है

1957 में एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे डे का छोटी उम्र से ही कला के प्रति झुकाव था। गवर्नमेंट आर्ट कॉलेज में कला का अध्ययन करने के उनके जुनून और रुचि को उनके परिवार का समर्थन नहीं था। इसलिए, उन्होंने घर छोड़ दिया और थिएटर कलाकार बिभाष चक्रवर्ती के थिएटर ग्रुप में शामिल हो गए।

उन्होंने एक दशक से अधिक समय तक बैकस्टेज कार्यभार संभाला और अनुभवी मेकअप आर्टिस्ट शक्ति सेन के प्रशिक्षण के बाद लंबे समय तक मेकअप आर्टिस्ट के रूप में भी काम किया। सेन के साथ उनके काम ने मूर्तिकला में उनकी रुचि की नींव रखी।

पाखी पहाड़ के साथ, डे ने पास के काना पहाड़ में नक्काशी की एक श्रृंखला भी बनाई है

पाखी पहाड़ की अवधारणा के केंद्र में शांति, सद्भाव और स्वतंत्रता के विचार हैं। यह परियोजना इन प्राकृतिक रूप से सुंदर क्षेत्रों और पहाड़ियों को कला के माध्यम से संरक्षित करने पर भी केंद्रित है। डे ने देश भर में यात्रा करने के बाद पुरुलिया की अयोध्या हिल्स को अपनी परियोजना के स्थल के रूप में चुना। उन्हें तत्कालीन बंगाल के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य द्वारा अनुमति दी गई थी।

काना पहाड़ की नक्काशी में इस्तेमाल होने वाले रंग पास के रंग पहाड़ में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले स्रोतों से लिए गए हैं

इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रंग पहाड़ है। पुरुलिया के माली गांव की छोटी पहाड़ी प्राकृतिक रंग के स्रोतों का भंडार है। क्षेत्र की मिट्टी की दीवार वाले घरों पर रंग आमतौर पर यहाँ से आते हैं और स्थानीय लोगों द्वारा  पहाड़ी को मालती खदान के रूप में जानते हैं। डे ने पहाड़ों पर चित्र बनाने के लिए चूने और पत्थर से बने रंगों का इस्तेमाल किया ।

डे अपने कौशल को आने वाली पीढ़ियों को सौंपना चाहते हैं, इसलिए वे उनके काम को न केवल कला के रूप में देखते हैं, बल्कि संरक्षण के साधन के रूप में भी देखते हैं

फोटो – साभार टेलीग्राफ, पुरुलिया टूर्स डॉट इन व द वीकेंड लीडर से।


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