July 23, 2024 |

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विवाह गीतों के संकलन ‘धरोहर’ पुस्तक का विमोचन

Sachchi Baten

कवि सम्मेलन में गीतों एवं गजलों का श्रोताओं ने उठाया लुत्फ

मिर्जापुर (सच्ची बातें)। विंध्येश्वरी साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को रामचंद्र शुक्ल स्मारक शिक्षण संस्थान में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें बतौर मुख्य अतिथि दिल्ली से पधारे राष्ट्रीय कवि पं. अनित्य नारायण मिश्र एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों का अभिनंदन माल्यार्पण, शॉल भेंटकर एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया गया।

विंध्यवासिनी महाविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. नीरज त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित उक्त कवि सम्मेलन के मंच पर जौनपुर की डॉ. संगीता पाल के संपादन में प्रकाशित पुस्तक विवाह गीत (लोकगीत संकलन) का विमोचन भी मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों हरीश भारद्वाज ‘निर्मल’ (नई दिल्ली) डॉ. मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ‘शिखर’ (गाज़ियाबाद), राकेश शुक्ल, (प्रबंधक, आचार्य रामचंद्र शुक्ल स्मारक शिक्षण संस्थान), सुरेश त्रिपाठी (पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष), बीएसएनएल के अपर महाप्रबंधक अमृतेश कुमार एवं अभासाप के अध्यक्ष राजपति ओझा के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ।

मुख्य वक्ता भोलानाथ कुशवाहा (वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार) ने विमोचित पुस्तक की समीक्षा की। कवि सम्मेलन में डॉ. नीरज त्रिपाठी, पं. अनित्य नारायण मिश्र, भोनानाथ कुशवाहा, डॉ. मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ‘शिखर’, हरीश भारद्वाज ‘निर्मल’, लालब्रत सिंह सुमन, हसन जौनपुरी, मुहिब मिर्जापुरी, गुमनाम मिर्जापुरी, डॉ. सुधा सिंह, सृष्टि राज, नंदिनी वर्मा, पूजा यादव, अश्क, गफ्फार नियाज़ी, हरिराम द्विवेदी इत्यादि ने अपने काव्यपाठ के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर खूब वाहवाही लूटी।

कवि सम्मेलन से पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई। इस “धरोहर” कार्यक्रम में “विवाह गीत” के संकलित गीतों को विभिन्न महिला समूहों व विद्यालयों के बच्चियों द्वारा संगीतमय गाकर सुनाया गया। विमोचन के उपरांत अपने वक्तव्य में मुख्य अतिथि ने कहा कि विवाह गीत हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिन्हें संकलित करके डॉ. संगीता पाल ने देश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का कार्य किया है।

अध्यक्षता कर रहे नीरज त्रिपाठी ने कहा कि विवाह में गाए जाने वाले गीत सुनने में मीठे और कर्णप्रिय होते हैं। ये गीत समाज को शिक्षित भी करते हैं। साथ ही मुख्य वक्ता भोलानाथ कुशवाहा ने कहा कि ‘विवाह गीत’ में भारतीय समाज में चली आ रही परंपराएं जीवंत हो रही हैं। विशिष्ट अतिथि डॉ. मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव ‘शिखर’ ने कहा कि लोक-साहित्य हमारे धरोहर हैं जो लुप्त होने के कगार पर हैं।

कार्यक्रम का संचालन आनंद अमित व पूजा यादव ने संयुक्त रूप से किया तथा अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन राकेश शुक्ल ने किया।

कार्यक्रम में सुमन, श्रीमती मोहिनी, श्रीमती लक्ष्मी, श्रीमती सावित्री, श्रीमती प्रज्ञा, पूनम, आँचल, महक, साधना, सपना, रिया, कोमल, मुस्कान, अलीशा, खुशबू, नंदिनी, अंशिका, श्रीमती रंजना, श्रीमती नीलम, श्रीमती नंदिनी वर्मा, आनंद केशरी, मेवालाल प्रजापति, दीना प्रजापति, आशीष चंद्र शुक्ल (प्रधानाचार्य), राजकुमार आदि उपस्थित रहे।


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