July 16, 2024 |

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इसे पढ़ें, खेती को लेकर आपका नजरिया बदल जाएगा

Sachchi Baten

चुनार तहसील के कृयात क्षेत्र के किसान मसाला उत्पादन में निभा रहे अहम भूमिका

-सांसद अनुप्रिया पटेल ने सीखड़ ब्लॉक के पूरनपट्टी में आयोजित मसाला महोत्सव में दीं कई जानकारियां

-अंतरराष्ट्रीय मसाला बाजार में भारत का अपना एक विशिष्ट स्थान – अनुप्रिया पटेल

-वर्ष 2022-23 में दुनिया भर के विभिन्न स्थानों पर 31761 करोड़ रुपये मूल्य का कुल 14,04,357 टन मसाले और मसाला उत्पादों का किया गया निर्यात

-भारत में मसाला उद्योग की असीम सम्भावनाएं

-चुनार निर्यात सुविधा केन्द्र के लिये 29 करोड़ रुपये की स्वीकृति

मिर्जापुर, 11 दिसम्बर (सच्ची बातें)। धान-गेहूं, गन्ना जैसी परंपरागत खेती से कुछ अलग हटकर करें तो निश्चित रूप से किसानों की आय बढ़ेगी। मिर्जापुर जनपद के सीखड़ ब्लॉक (कृयात) के किसान ऐसा कर रहे हैं। मिर्च, लहसुन आदि की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। उनकाे इस क्षेत्र में नई जानकारी देने तथा बाजार की क्रिया विधि को समझाने के लिए 10 दिसंबर रविवार को सीखड़ ब्लॉक के ही पूरनपट्टी गांव में मसाला महोत्सव का आयोजन किया गया। यह स्थानीय सांसद केंद्रीय उद्योग व वाणिज्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल के प्रयास से संभव हो सका।
इसका आयोजन केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय व गृह मंत्रालय के अंतर्गत भारत सरकार की स्पाइसेस बोर्ड ऑफ इंडिया के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से आए कृषि वैज्ञानिक, स्पाइसेस बोर्ड के अधिकारियों और मसाला उत्पादक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की। किसानों को बेहतर उपज और उनको कब और किसको बेचा जा सकता है, आदि के बारे में विस्तार से बताया, जिससे किसान ज्यादा से ज्यादा मुनाफा प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम में एफपीओ और मसाला कंपनियों द्वारा अपने अपने स्टाल लगाकर उत्पादों की जानकारी दी गई। उद्घाटन करने के बाद अनुप्रिया पटेल ने कहा कि हमारा देश मसाला का बहुत बड़ा उपभोक्ता और निर्यातक भी है। मिर्जापुर में मसाला में उपयोग होने वाली फसलों की खेती कम होती है। यहां किसान केवल गेहूं, धान जैसी पारंपरिक खेती से हटकर मसाले में उपयोग होने वाली फसलों की खेती करें तो उनकी समृद्धि बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि भारत के मसाले पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो रहे हैं। हम भारत के किसानों को ऐसी सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे वर्तमान आवश्यकताओं को देखते हुए किसान भी ऐसी फसलों की खेती करें, ताकि उनको ज्यादा से ज्यादा मुनाफा मिल सके।
उन्होंने कहा कि हम अपने युवाओं के लिए सोच और नवीन अवसर लेकर आ रहे हैं, जिससे युवाओं को, किसानों को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिल सके और उनको नवीन जानकारी मिल सके। आज पूरा वाणिज्य मंत्रालय यहां आया है, जिससे हम आपको ज्यादा से ज्यादा जानकारी उपलब्ध करा सकें। हमारी सरकार की सोच है कि देश के प्रत्येक जिले को वहां के उत्पाद के हिसाब से उसको बढ़ावा देकर उसको निर्यात का हब बनाया जा सके।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि मसाले हमारे भोजन का स्वाद बढ़ाते हैं, जिन्हें हम हमेशा उगाते आये हैं और उपयोग करे रह हैं। दुनिया में भी भारत के मसालों की बड़ी मांग है। इसे काफी पसंद किया जा रहा हैं। उन्होने कहा कि कश्मीर के सुगंधित केसर से लेकर पश्चिमी घाट की इलायची की मंत्रमुग्ध करने वाली सुगंध प्रत्येक मसाला हमारे देश की पाक कौशल की कहानी कहते हैं।
 कहा कि हमारे देश का मसाला उद्योग प्रचीन काल से ही दुनिया का सबसे अग्रणी रहा हैं। वर्षों से भारत मसाला उत्पादन  के मामले में एक प्रमुख उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक के साथ-साथ मसालों के प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन में एक विशिष्ट केन्द्र के रूप में शीर्ष स्थान बनाये रखा है।
 केन्द्रीय राज्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2022-23 में दुनिया भर के विभिन्न स्थानों पर 31,761 करोड़ रुपये (3.95 बिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य का कुल 14,04,357 टन मसाले और मसाला उत्पादों का निर्यात किया गया था। भारत के मसाला उद्योग में असीम संभावनाएं हैं। मसाला क्षेत्र ने मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित करके 2030 तक 10 बिलियन डालर के मसालों और मसाला उत्पादों के निर्यात का लक्ष्य निर्धारित किया है।
आज इस क्षेत्र में प्रगति को देखकर मुझे विश्वास है कि मसाला उद्योग के पास इस लक्ष्य को प्राप्त करने की अपार क्षमताएं हैं। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि उत्तर प्रदेश मसाला क्षेत्र की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पवित्र गंगा और उसकी सहायक नदियों से समृद्ध यह क्षेत्र उपजाऊ मिट्टी और पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता के कारण राज्य में कृषि को फलने-फूलने में सहायक हैं।
देश में खाद्यान्न के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध, उत्तर प्रदेश राज्य पुदीना, हींग, लहसुन, मिर्च और मसाला बास्केट में कई अन्य मसालों के उत्पादन और प्रसंस्करण के लिए जाना जाता है। राज्य में मसालों की खेती योग्य कुल क्षेत्र 4,03,518 हेक्टेयर भूमि है, जो 2,77,650 टन का उत्पादन करता है। यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। यह हमारे किसानों के परिश्रम और समर्पण को दर्शाते हैं, जो मसालों के उत्पादन के लिए अथक प्रयास करते हैं।
श्रीमती पटेल ने कहा कि राज्य में सबसे अधिक उत्पादित मसाला लहसुन है, इसके बाद मिंट और लाल मिर्च का स्थान है। पुदीना (मेंथा अरर्वेसिस) और पुदीने के उत्पाद भारतीय मसालों के निर्यात बास्केट से शीर्ष पांच सबसे अधिक निर्यात की जाने वाली वस्तुओं में से एक हैं। सर्दी और खांसी की दवाओं और संबंधित फार्मास्यूटिकल्स, डेंटिफिस, सौंदर्य प्रसाधन, माउथवाश, तंबाकू उत्पादों में सुगंध और पेय पदार्थों के स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने वाले मिंट उत्पादों का देश से 26,708 टन निर्यात किया जाता है, जिसकी कीमत 3,574 करोड़ रुपये है।
उत्तर प्रदेश क्षेत्र और उत्पादन में अग्रणी मेंथा उत्पादक राज्य है और राज्य में मिंट की खेती 3,00,000 हेक्टेयर से अधिक होती है। उत्तर प्रदेश में मसाला खंड में एक और प्रमुख उद्योग जो उल्लेखनीय है, वह है हाथरस में प्रसंस्कृत हींग। हींग के बिना पूरे भारत में व्यंजनों की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। जो अचार, कचौड़ी से लेकर सांभर तक के स्वाद को दोगुना कर देता है। हाथरस हींग को हाल ही में प्रतिष्ठित जीआई टैग प्राप्त हुआ है। पकवानों में प्रयोग के अतिरिक्त, मसाले आंतों और श्वसन- तंत्र और तंत्रिका तंत्र के लिए औषधीय रूप में कार्य भी करता है। यह अस्थमा, काली खांसी और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस में उपयोगी है और पाचन में सहायक होते हैं।
उन्होंने कहा कि मसाले हमारे देश की विविधता के प्रतीक हैं, जिनमें से कुछ के आज यहां प्रदर्शनी-क्षेत्र में स्टॉल लगाए गए हैं। मुझे यह देखकर अत्यंत प्रसन्नता है कि मसाला बोर्ड, एपीडा, आईसीएआर-आईआईवीआर और सीएसआईआर-सीमैप जैसे विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा पैदावार में वृद्धि, बेहतर बाजार पहुंच और बेहतर आर्थिक अवसरों में समन्वय स्थापित कर रहे हैं और इस क्षेत्र में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। यह सामंजस्य इस क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास में योगदान देते हुए मसाला क्षेत्र के विकास और परिणामस्वरूप एक मजबूत और समृद्ध अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि हमारे मंत्रालय का प्रयास है कि एक निर्यात सुविधा केन्द्र बने, इसी के दृष्टिगत जनपद मिर्जापुर के चुनार में निर्यात सुविधा केन्द्र निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिये हमारे मंत्रालय द्वारा 29 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान कर दी गयी है। हमारा प्रयास है कि यहां के लोग आगे बढ़ें, आर्थिक रूप से सम्पन्न हों, बेहतर कार्य करते हुये अपनी आमदनी को बढ़ायें, ताकि परिवार में खुशहाली आ सके।
केन्द्रीय मंत्री कहा कि एपीडा मसाला बोर्ड, एम्पीडा का एक्सपोर्ट एक्सीलेंसी काउसिंल एक विशेषता रखते है कि यदि किसी सामान को बेचना है तो उसकी पैकेजिंग कैसी होनी चाहिये। उन्होंने कहा कि अन्य फसलों के साथ मसाला भी एक उभरता हुआ नया क्षेत्र है। हम बाजार में कभी कोई सामान की पैकेजिंग देखकर आकर्षित होते है। पैकेजिंग भी उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिये एक विशेषता रखती है।
इस अवसर पर जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने केन्द्रीय राज्य मंत्री का स्वागत व अभिनन्दन करते हुये कहा कि उद्यान विभाग के सहयोग से मसाला की खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जायेगा।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष भाजपा बृजभूषण सिंह, जिला अध्यक्ष अपना दल राम लौटन बिंद, राष्ट्रीय सचिव मेघनाथ पटेल, राष्ट्रीय सचिव युवा मंच अजीत सिंह पटेल, राष्ट्रीय सचिव युवा मंच दिव्यांशु पटेल उर्फ दीपू सिंह, ब्लॉक प्रमुख सत्येंद्र कुमार सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ अनिल सिंह, प्रदेश सचिव रामवृक्ष बिंद, प्रदेश सचिव पंचायत मंच राजेंद्र प्रसाद सिंह, प्रदेश सचिव पंचायत मंच विजय प्रधान, जिला मंत्री भाजपा गौरव उमर, जिला उपाध्यक्ष राधेश्याम पटेल, जिला उपाध्यक्ष राजकुमार पटेल, जिला महासचिव सुरेश सिंह पटेल, जिला मीडिया प्रभारी शंकर सिंह चैहान, किसान यूनियन के नेता राजेंद्र प्रसाद साहनी, बजरंगी कुशवाहा, धर्मदेव उपाध्याय, भाजपा मंडल अध्यक्ष प्रमोद पांडे, जोन अध्यक्ष सुखराज पटेल, जोन अध्यक्ष राम सहाय पटेल, शैलेश पटेल, एडवोकेट संतोष विश्वकर्मा, कृषि वैज्ञानिक डाॅ संजय कुमार व डाॅ इंडिवर प्रसाद, स्पाइसेस बोर्ड आफ इंडिया के सेक्रेटरी  डी साठीयान आईएफएस, स्पाइसेस बोर्ड आफ इंडिया की डायरेक्टर डाॅ एबी रेमाश्री व डायरेक्टर डी एन झा, धर्मेंद्र दास, डिप्टी डायरेक्टर सपना तोमर, एपीडा के आनंद शर्मा, जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन, अपर  जिलाधिकारी वि0/रा0 शिव प्रताप शुक्ल, उपजिलाधिकारी चुनार न्यायिक विजय नारायण सिंह, क्षेत्राधिकारी चुनार उमाशंकर राय, सीखड़ ब्लाक प्रमुख सतेंद्र कुमार सिंह, भाजपा के मण्डल अध्यक्ष प्रमोद पाण्डेय, अपना दल एस के मण्डल अध्यक्ष मेघनाद सिंह के साथ हीं विभिन्न गांवों के ग्राम प्रधान व हजारों की संख्या में महिलाएं और किसान मौजूद रहे।

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