July 23, 2024 |

BREAKING NEWS

- Advertisement -

फकीर की पाठशाला और दो टके का मास्टर, पढ़िए यह प्रेरक स्टोरी

Sachchi Baten

पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दमान जिले में एक रिटायर्ड शिक्षक पढ़ाते हैं गरीब बच्चों को, सालाना फीस मात्र दो रुपये

-अपने इस नेक काम के लिए 2021 में पद्मश्री अवार्ड से नवाजा जा चुका है सुजीत चट्टोपाध्याय को

-Life Time Achievement अवार्ड से भी सम्मानित किए गए हैैं शिक्षक मोशाय

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। यह स्टोरी पश्चिम बंगाल की है। जहां जंगल के पास बसे एक गांव के निवासी शिक्षक ने सरकारी सेवा से रियाटरमेंट के बाद गरीब बच्चों को पढ़ाने का निर्णय लिया। यह शिक्षक बच्चों से साल भर की फीस मात्र दो रुपये लेते हैं। इनके कोचिंग सेंटर को फकीर की पाठशाला भी लोग कहते हैं। इनके इस नेक कार्य को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2021 में पद्मश्री अवार्ड से नवाजा है। अंग्रेजी दैनिक द टेलीग्राफ The Telegraph के मीडिया फाउंडेशन की ओर से इनको लाइफ टाइम अचिवमेंट Life Time Achievement से भी सम्मानित किया जा चुका है।

 

 

पढ़िए पूरी कहानी…

पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्धमान जिले के औसग्राम का सुदूरवर्ती गांव रामनगर। यहां सुबर साढ़े छह बजे से ही फकीर की पाठशाला शुरू हो जाती है, जो सूरज ढलते तक जारी रहती है। इस पाठशाला से निकले कई बच्चे अच्छे ओहदों पर कार्यरत हैं।

सुजीत चट्टोपाध्याय इस समय करीब 80 वर्ष के हैं। करीब 50 साल पहले स्नातकोत्तर की शिक्षा पूरी करने के बाद उनको शहरी क्षेत्रों में अच्छे वेतन पर शिक्षक बनने के ऑफर मिले। उन्होंने इन प्रस्तावों को अस्वीकार करके ग्रामीण क्षेत्र में ही स्थित रामनगर हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाने का निर्णय लिया। उनका तर्क था कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण बंगाल के स्कूलों को शिक्षकों की अधिक आवश्यकता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जब वह 2004 में 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त हुए तो इस बात को लेकर काफी चिंतित थे कि अब उनका समय कैसे कटेगा। क्योंकि तब तक पढ़ाना उनकी दैनिक आदत बन गई थी। उस दौर में सेवा विस्तार की कोई सरकारी योजना नहीं थी।

एक दिन वह अपने घर के बाहर बैठे थे तो आदिवासी समुदाय की तीन स्थानीय लड़कियां साइकिल से आईं और खुद को पढ़ाने के लिए उनसे निवेदन किया। वह करीब 30 किलोमीटर दूर से आई थीं। सुजीत चट्टोपाध्याय ने उनसे कहा कि तुम्हें पढ़ाऊंगा, बशर्ते आप मुझे एक रुपया सालाना फीस दें। लड़कियां इतनी खुश हुईं कि उन्होंने उनकी सालाना फीस एक रुपये और चार चॉकलेट तय कर दी। वह शुरुआत थी। चट्टोपाध्याय ने कहा, धीरे-धीरे अधिक छात्र आने लगे और इन 20 वर्षों के दौरान, शुल्क संरचना में केवल एक बदलाव हुआ, जिसे दोगुना कर दो रुपये कर दिया गया है।

रामनगर में चट्टोपाध्याय के आवास के बगल में खाली जगह पर स्थित कक्षा में औसतन 300 छात्र पढ़ते हैं। उन्होंने कहा, “मैं माध्यमिक स्तर पर नौवीं और दसवीं कक्षा, उच्च माध्यमिक स्तर पर 11वीं और 12वीं कक्षा और स्नातक स्तर पर प्रथम वर्ष, दूसरे वर्ष और तीसरे वर्ष के छात्रों को पढ़ाता हूं। उन सभी के लिए शुल्क संरचना समान है।” उन्होंने कहा कि अब तक 3,000 से अधिक छात्रों ने उनकी कक्षा में कोचिंग ली है और उनमें से लगभग 80 प्रतिशत छात्राएं थीं, जिनमें से अधिकांश आदिवासी समुदाय से आती थीं।

अपने मामूली शुल्क के पीछे चट्टोपाध्याय का अपना तर्क है। उन्होंने कहा, “मुझे और क्या चाहिए? मेरा बेटा राज्य आपदा प्रबंधन विभाग में एक अधिकारी के रूप में अच्छी तरह से स्थापित है। मेरी बेटी शादीशुदा है और बस गई है। मैंने अपने सेवानिवृत्ति लाभों से जो भी कमाया है, वह मेरे और मेरी पत्नी के लिए पर्याप्त है।”

फिर उन्होंने खुलासा किया कि कैसे उनकी कक्षा ने सदाई फकीर पाठशाला (हमेशा फकीर की कक्षा) का अनोखा नाम ग्रहण किया। “जब मैंने यह कोचिंग शुरू की, तो मेरे कुछ छात्रों ने मुझसे कहा कि मैं मामूली वार्षिक शुल्क के साथ कैसे काम चला सकता हूं, जो उस समय एक रुपया था। मैंने उनसे कहा कि मेरे पास पहले से ही पर्याप्त संपत्ति है। लिहाजा उन्होंने मुझे फकीर नाम दे दिया। तभी से उनकी पाठशाला का नाम सदाई फकीर की पाठशाला पड़ गया।

उन्होंने कहा कि पद्मश्री से सम्मानित होना कोई बड़ी सफलता नहीं है। मेरी वास्तविक सफलता इस सदाई फकीर पाठशाला से उत्तीर्ण होने वाले छात्रों की सफलता में निहित है।  कुछ वर्तमान छात्र क्षेत्र में थैलेसीमिया के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल हैं और उन्होंने मुझे भी इस नेक काम में शामिल किया है।

बता दें कि देश के प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ The Telegraph के मीडिया फाउंडेशन ने सुजीत चट्टोपाध्याय को लाइफ टाइम अचिवमेंट Life Time Achievement  से सम्मानित किया है।

 

फोटो स्रोत- गूगल


Sachchi Baten

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.