July 24, 2024 |

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जोड़ने की जगह तोड़ने के काम आ रही राहुल की भारत जोड़ो न्याय यात्रा

Sachchi Baten

न्याय यात्रा के 20 दिन

मणिपुर, असम, बिहार, बंगाल में विवादित रही यात्रा

-सहयोगी ममता ने ही दे डाली कांग्रेस को 40 सीट जीतने की चुनौती

-विपक्षी इंडिया गठबंधन को रोके रखना कांग्रेस की बड़ी चुनौती बना

हरिमोहन विश्वकर्मा, नई दिल्ली। 14 जनवरी से मणिपुर से शुरू हुई राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के 20 दिन पूरे हो गए हैं, लेकिन राहुल की फेज 2 की यह यात्रा पहली भारत जोड़ो यात्रा के मुकाबले प्रभाव छोड़ती नजर नहीं आ रही है। बल्कि यात्रा के साथ कांग्रेस का विपक्ष के साथ बना इंडिया गठबंधन भी पूरी तरह ध्वस्त होता नजर आ रहा है। सत्ता पक्ष तो दूर की बात है, कांग्रेस को अपनों से दर्द मिल रहा है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और इण्डिया गठबंधन की खास घटक ममता बनर्जी कांग्रेस को चुनौती देती नजर आ रही हैं कि कांग्रेस अपने दम पर 40 सीटें तक नहीं जीत सकती। यह वही ममता हैं, जिन्होंने पहले कांग्रेस के भावी पीएम राहुल गाँधी के रास्ते में भांजी मारते हुई मल्लिकार्जुन को गठबंधन का संयोजक बनवाया और बाद में खरगे को गठबंधन का पीएम पेश किया।

सिर्फ ममता नहीं, बिहार में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार न्याय यात्रा के दौरान ही गठबंधन छोड़ एनडीए में शामिल हो गए। उधर उप्र में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सीटों के बंटवारे पर खुद निर्णय लेते हुए कांग्रेस के लिए उप्र में मात्र 11 सीटें देने का ऐलान कर दिया। यही नहीं, इसी दौरान आम आदमी पार्टी ने भी पंजाब में कांग्रेस को लोकसभा सीटें देने से मना करते हुए अकेले ही राज्य में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। ये सब चीजें कांग्रेस के भविष्य के लिए अच्छी नजर नहीं आ रही हैं।

उधर कांग्रेस की उम्मीद बसपा ने भी उप्र में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। जबकि कांग्रेस लम्बे समय से कोशिश में थी कि बसपा इंडिया गठबंधन में साझा हो जाए। कांग्रेस की इस बार की न्याय यात्रा यात्रा 14 जनवरी को शुरू हुई और जनवरी में ही इंडी एलायंस को ऐसे बड़े झटके लग गए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तो लालू यादव पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद का आरोप लगा कर इंडी एलायंस छोड़ ही दिए, झारखंड में भी राहुल की यात्रा के प्रवेश से पहले ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार हो गए।

राहुल गांधी जब बिहार में थे तो लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव से ईडी लैंड फॉर जॉब घोटाले में कड़ी पूछताछ कर रही थी। अब जब वह दुबारा बिहार में घुसेंगे, तब तक तेजस्वी और लालू यादव की गिरफ्तारी भी हो सकती है। पहले दिन से राहुल की यात्रा इंडी एलायंस के लिए फलदायक साबित नहीं हो रही है। यात्रा शुरू से ही विवादों में भी घिरी रही, क्योंकि मणिपुर सरकार ने उन्हें संवेदनशील इलाकों से गुजरने की इजाजत नहीं दी। फिर असम में भी वैसा ही हुआ, जब श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के समय वह शंकरदेव के जन्म स्थान पर जाना चाहते थे, शंकरदेव ट्रस्ट ने उन्हें सुबह के बजाए शाम को आने को कहा, क्योंकि उस दिन सैकड़ों हिन्दू श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखने के लिए जमा थे।

इसके बाद राहुल गांधी ने तय रूट से अलग रूट पकड़ लिया और पुलिस के बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की। असम पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया, उस घटना ने उन्हें विवादों में लाकर खड़ा कर दिया। अगर उस दिन यह घटना न होती और असम के मुख्यमंत्री प्रेस कांफ्रेंस करके राहुल गांधी पर टिप्पणी न करते, तो उससे पहले आठ दिन तक वह अखबारों में कहीं भी सुर्ख़ियों में नहीं थे। असम के बाद जब वह बंगाल में दाखिल हुए तो ममता बनर्जी ने उन्हें उन क्षेत्रों में यात्रा की इजाजत नहीं दी, जहां से वह गुजरना चाहते थे।

कांग्रेस को उम्मीद तो यह थी कि ममता बनर्जी क्योंकि इंडी एलायंस में शामिल है, इसलिए वह उनके बंगाल में प्रवेश के समय खुद स्वागत करने के लिए मौजूद होंगी, लेकिन इसके ठीक उल्ट ममता बनर्जी ने एनडीए की मुख्यमंत्री की तरह व्यवहार किया और दो दिन तक यात्रा रुकी ही रही। ममता बनर्जी ने राहुल गांधी के बंगाल प्रवेश से पहले ही कांग्रेस के साथ किसी तरह का चुनावी गठबंधन करने से इनकार ही नहीं कर दिया और उलटे कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कहा वह इंडी एलायंस का हिस्सा हैं, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें यह सूचना तक नहीं दी कि राहुल गांधी अपनी न्याय यात्रा के दौरान बंगाल में प्रवेश कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने 25 जनवरी को बंगाल में प्रवेश किया था, ममता विरोधी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा को जैसे भाजपा शासित मणिपुर और असम में विरोध का सामना करना पड़ा, वैसे ही बंगाल में भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। मल्लिकार्जुन खरगे ने ममता बनर्जी से बात भी की, लेकिन वह टस से मस नहीं हुई।

सिलीगुड़ी में प्रशासन ने बच्चों की परीक्षा का बहाना बनाकर उन्हें यात्रा और जनसभा की इजाजत नहीं दी। नतीजा यह निकला कि 26-27 को यात्रा बंद करके राहुल गांधी ने 28 जनवरी से दुबारा यात्रा शुरू की और 29 जनवरी को बिहार में प्रवेश किया। राहुल गांधी के किशनगंज से बिहार में प्रवेश से 18 घंटे पहले नीतीश कुमार ने इंडी एलायंस की सरकार गिरा कर कांग्रेस और राजद को सरकार से बाहर निकाल दिया।

राहुल गांधी के लिए यह सबसे बड़ा झटका था। यह वही नीतीश कुमार थे, जिन्होंने इंडी एलायंस को खड़ा किया और एलायंस की पहली बैठक भी पटना में होस्ट की थी। अगर उन्हें पटना बैठक में ही इंडी एलायंस का अध्यक्ष या संयोजक बना दिया जाता, तो उनके एलायंस छोड़ कर जाने की कोई संभावना ही नहीं बचती। लेकिन कांग्रेस ने लालू यादव के दबाव में आकर उन्हें संयोजक बनाने से परहेज किया।

लालू यादव ने ममता बनर्जी के भी कान भरे कि संयोजक बनने का हक तो उनका है, क्योंकि वह भाजपा से मुकाबला करके लोकसभा की 22 सीटें जीत कर आई हैं, जबकि नीतीश कुमार भाजपा के समर्थन और मोदी के चेहरे पर 16 सीटें जीत कर आए थे। नीतिश राहुल गांधी के उस बयान से नाराज थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि बिहार में जाति आधारित जनगणना का सुझाव कांग्रेस ने दिया था। इसके लिए नीतीश कुमार और भाजपा तैयार नहीं थे। जबकि सच यह है कि नीतीश कुमार जब एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री थे, तब 18 फरवरी 2019 को बिहार विधानसभा ने पहली बार जाति आधारित जनगणना करवाने का प्रस्ताव पास करवाया था।

इधर राहुल गांधी बिहार में विवाद खड़ा कर गए, उधर 31 जनवरी को जब उन्होंने पश्चिम बंगाल में दुबारा प्रवेश किया तो उनकी कार पर पथराव हो गया। लेकिन ममता बनर्जी ने जांच पड़ताल करने के बाद कहा कि राहुल गांधी की कार पर बंगाल में नहीं, बल्कि सुबह जब वह बंगाल में प्रवेश कर रहे थे, तब बिहार में पथराव हुआ था। उन्होंने कहा यह कुछ और नहीं, बल्कि कांग्रेस का ड्रामा है। कुल मिलाकर कांग्रेस के लिए न्याय यात्रा शुभ साबित होती नजर नहीं आ रही है जो लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए कांग्रेस के लिए बेहद नुकसानदेह है।


Sachchi Baten

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