July 16, 2024 |

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‘ऊंट की चोरी निहुरे-निहुरे’ करना चाहता है पीडब्ल्यूडी

Sachchi Baten

सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी नहीं देना चाहता लोनिवि मिर्जापुर निर्माण खंड-2

-एक महीने के अंदर ‘सूचना’ की सूचना तो आ गई, लेकिन असली ‘सूचना’ ही नहीं लिफाफे में

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। बीते फरवरी माह में 13 तारीख को मिर्जापुर लोक निर्माण विभाग निर्माण खंंड दो से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत एक जानकारी मांगी गई थी। नियमानुसार 30 दिन के अंदर रजिस्टर्ड डाक से लिफाफा आया तो लगा कि पूछे गए सवालों के जवाब आ गए। लेकिन नहीं। लिफाफे में सिर्फ ‘सूचना’ देने की सूचना थी। असली जानकारी तो गायब थी।

जानते हैं क्या जानकारी मांगी गई थी

मिर्जापुर जनपद के जमालपुर ब्लॉक के भभौरा गांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता पत्रकार राजेश पटेल ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा छह के तहत जानकारी मांगी थी कि जनवरी 2022 से दिसंबर 2023 तक निर्माण खंड दो लोनिवि मिर्जापुर द्वारा कुल कितने बांड बनाए गए। इनमें सोनू मिश्रा कंस्ट्रक्शन और मे. वंदना सिंह कंस्ट्रक्शन के नाम से कितने बांड थे। इन बांड के सापेक्ष इन दोनों को कितने का भुगतान किया गया। इनको किन-किन सड़कों के लिए बांड बना था। इन सड़कों की स्थिति क्या है।

जवाब देखें

इन सवालों के जो जवाब आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। दरअसल किसी सवाल का जवाब है ही नहीं। निर्माण खंड-2 लोनिवन मिर्जापुर के अधिशासी अभियंता कार्यालय के पत्रांक 712/सू.अ. के माध्यम से एक रजिस्टर्ड लिफाफा 22 मार्च को राजेश पटेल के पास डाक से आया। इसे खोला तो चौंकना लाजमी था।

इसके विषय में लिखा है-सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा छह के तहत निम्नांकित सूचनाएं निर्धारित समयावधि मेंं उपलब्ध कराने के संबंध में। संदर्भ-आपका पत्र 13-02-2024

उपरोक्त विषयक संदर्भित पत्र के क्रम मेंं अवगत कराना है कि आप द्वारा चाही गई बिंदुवार सूचना निम्नवत है।

बिंदु संख्या-1  सूचना के अधिकार अधिनियम 2015 की धदारा 4(2) ख के बिंदु घ  के अनुसार (इनको यह भी पता नहीं है कि सूचना का अधिकार अधिनयम 2015 है या 2005)।

बिंदु संंख्या-2  सूचना के अधिकार अधिकार अधिनियम की धारा 8(1) के अनुसार।

बिंदु संख्या-3 बिंदु 1 के अनुसार।

फिर अधिशासी अभियंता का हस्ताक्षर है।

देखें फोटो

इसके अलावा कोई कागज संलग्न नहींं है। पन्ने के किनारे पर फूंक मार-मार कर कई बार देखने का प्रयास किया गया कि कहीं एक पन्ना चिपका तो नहीं है। लेकिन नहीं। सिर्फ यही सूचना है।

इस बाबत फोन पर निर्माण खंंड दो के अधिशासी अभियंता से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि या तो जानकारी वाला पन्ना कोई निकाल लिया होगा या भूलवश उसे संलग्न नहीं किया होगा। यह जांच का विषय है। इसकी जांच कराई जाएगी। जहां तक सूचना की बात है होली बाद सूचना मुहैया करा दी जाएगी। यह कहा गया कि उस पन्ने को ह्वाट्सएप के माध्यम से ही भेज दें।  इस पर वह राजी नहीं हुए।

दरअसल यह जानकारी विभाग देना ही नहीं चाहता। क्योंकि पहले के अधिशासी अभियंता देवपाल की मेहरबानी इन दोनों पर खूब बरसी है। 200 से ज्यादा बांड सोनू मिश्रा कंंस्ट्रक्शन और मे. वंदना सिंह के नाम से बांड बनाए गए। हर  बांड पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया। इसके माध्यम से करोड़ों रुपये की लूट हुई है। इस लूट में एई और जेई भी शामिल हैं। सो इसी रैकेट ने मिलकर सूचना को दबाने का काम किया है, ताकि मामला लंबा खिंचे। जानकारी तो देनी ही पड़ेगी, आज नहीं तो कल।


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