July 23, 2024 |

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सिंचाई मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह का भी डर नहीं है पीडब्ल्यूडी के जिम्मेवारों को

Sachchi Baten

यह कैसी इंजीनियरिंग, सड़क की पीसी के तीन दिन बाद सील कोटिंग, वह भी रात में

-स्वतंत्रदेव सिंह के आने की सूचना से सक्रिय हुआ विभाग, आनन-फानन में रात में सड़क चमकाई जा रही

जमालपुर/मिर्जापुर (सच्ची बातें)। निर्माण खंड-2 लोनिवि मिर्जापुर के जिम्मेवारों को लगता है कि किसी का डर है ही नहीं। ताजा मामला सिंचाई मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के गांव का है। बेलहर राजवाहा की पटरी वाली सड़क पर ओड़ी से गोविंदपुर के बीच तीन दिन पहले पीसी कराई गई, सील कोटिंग गुरुवार की रात में कराई जा रही है। सवाल उठता है कि जब प्राथमिक कोट बिल्कुल ठंडा होकर सेट हो गया तो उस पर सील कोटिंग का कितना असर होगा।

इसका भी काम पूर्व अधिशासी अभियंता की चहेती एक कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कराया जा रहा है। वैसे तो इस मार्ग का नवीनीकरण काफी पहले से स्वीकृत है, लेकिन ठीकेदार मस्ती में रहा। सिंचाई मंत्री के गांव की होने के बावजूद इस मार्ग पर ओड़ी के दक्षिण और उत्तर दोनों तरफ बड़े-बड़े गड्ढे हो गए थे। जरा सी बरसात में ये गड्ढे गांव की गड़ही का रूप ले लेते थे। आने-जाने में काफी परेशानी होती थी। लेकिन अभियंताओं और ठीकेदार के गठजोड़ के कारण इसका नवीनीकरण नहीं हो रहा था।

अब जब अपनी मां की पहली बरसी पर सिंचाई मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के अपने गांव ओड़ी आने की सूचना मिली तो विभाग हरकत में आया। ठीकेदार पर दबाव बनाया गय तो उसने नवीनीकरण के स्थान पर गड्ढों को भरकर चमकाने का काम शुरू किया। इसमें भी गलती।

गड्ढा भरकर प्राथमिक कोट मंगलवार को ही कर दिया गया। नियमतः इसकी सील कोटिंग उसी दिन हो जानी चाहिए। प्राथमिक कोट की गिट्टी कुछ बड़ी होती है। सील कोट की एकदम महीन। सील कोट वाली छर्रियां प्राथमिक कोट की गिट्टियों के बीच में खाली स्थान में जाकर भर जाती हैं। इससे सड़क की डभक कम होने के साथ ही उसका टिकाऊपन भी बढ़ता है।

लेकिन ठीकेदार तो ठीकेदार है। उसकी पहुंच ऊपर तक है। उसको किसका डर। स्वतंत्रदेव सिंह आकर लौट जाएं, उसका काम हो गया। उनके वाहन का पहिया गड्ढा में नहीं पड़ना चाहिए। इसके बाद फिर चार दिन में भले ही खराब हो जाए।

स्थानीय नागरिकों ने ठीकेदार की इस मनमानी की शिकायत सिंचाई मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के करने का मन बनाया है। आठ मार्च को उनके सामने इस मुद्दे को रखा जाएगा। जानकारों ने बताया कि रात में पेंटिंग या सील कोटिंग का काम बहुत जरूरी होने पर ही किया जाता है। आम दिनों में नहीं। पीसी हुए तीन दिन हो चुके थे। गुरुवार को दिन में ही सील कोटिंग करते तो उसकी मजबूती रात की अपेक्षा ज्यादा होती, लेकिन यहां मजबूती से किसे मतलब है। यहां तो यही कहावत चरितार्थ हो रही है-अपना काम बनता, भाड़ में जाए जनता…।

बता दें कि जमालपुर थाना मोड़ से घसरौड़ी सीमा तक इस सड़क का नवीनीकरण पिछले साल इसी मार्च में कराया गया था, जब सिंचाई मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह की मां रामा देवी का स्वर्गवास हुआ था। उस समय सीएम योगी इस सड़क के गड्ढों में ही हिचकोले खाते उस समय स्वतंत्रदेव सिंह की माता को श्रद्धांजलि देने इनके आवास ओड़ी गांव में गए थे। उनके जाने के बाद तो केंद्र व प्रदेश के मंत्रियों तथा आला नेताओं का रेला आना शुरू हो गया। आनन-फानन में रात में ही उस साल सड़क ठीक कराई गई थी।

लेकिन ऐसी बनाई गई थी कि बरसात का सीजन शुरू होने के पहले ही पहले जैसी स्थिति में हो गई। लोगों को आने-जाने मेंं परेशानी होती रही। किसी को कोई मतलब नहीं था। इसके पहले जब सड़क बनी थी तो लोग काफी खुश थे। लेकिन उनकी खुशी कुछ ही माह में काफूर हो गई। भला हो सिंचाई मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह का, जो मां की तेरही बीतने के बाद पहली बरसी पर ही अपनी मातृभूमि में आ रहे हैं। इसके चलते सड़क के गड्ढों को जैसे-तैसे पाट दिया जा रहा है।


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