July 24, 2024 |

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PWD MIRZAPUR : अंधेरपुर नगरी… सड़क बनी नहीं, पैसा गया कहां ?

Sachchi Baten

भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस-5

सड़कों के निर्माण में हो रही लूट का मुकम्मल दस्तावेज है रानीबाग-जैपट्टी-जलालपुर मार्ग

-इसके पैसे कहां गए, राशि के अभाव में सड़क निर्माण कार्य ठप, मुआवजे का भी निपटारा नहीं हो सका

-न बिजली के पोल हटे, न वन विभाग ने पेड़ कटवाए

-ऐसे ही नहीं कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल ने की है विजिलेंस जांच की अनुशंसा

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। इंजीनियर्स को लेकर एक बात कही जाती है- इंजीनियर कहीं भी रहेगा, निर्माण ही करेगा। नरक में भी वह निर्माण करके स्वर्ग बनाने का प्रयास करेगा। मिर्जापुर में इसका ठीक उल्टा हो रहा है। यहां लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 के अधिशासी अभियंता की कार्यप्रणाली तो ऐसी है कि इंजीनियर्स को लेकर जो उपरोक्त बात कही जाती है, वह गलत है। यह भी सही है कि सभी अभियंता देवपाल जैसे नहीं होते। तभी तो प्रदेश भर में अनिवार्य सेवानिवृत्ति योगी सरकार ने 2022 अक्टूबर में दी, उनमें एक नाम देवपाल का भी शामिल है।

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बात करते हैं जमालपुर ब्लॉक में निर्माणाधीन रानीबाग, जैपट्टी, जमालपुर होते हुए जलालपुर मार्ग की। इसकी लंबाई नौ किलोमीटर 50 मीटर है। इसके चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण के लिए करीब 14 करोड़ रुपये में टेंडर फाइनल हुआ था। बांड बना नौ करोड़ 82 लाख का।

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ठीकेदार ने काम भी शुरू किया। लेकिन उसके बिलों के भुगतान में देर की जाने लगी। किसी तरह से चार बार में करीब 5 करोड़ का भुगतान किया गया है। अभी छह करोड़ रुपये से ज्यादा ठीकेदार का फंसा हुआ है। इसमें आश्चर्य की बात यह है कि फिलहाल इस मद में राशि शून्य है। इस सड़क की राशि को अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता तथा अवर अभियंताओं ने मिलकर उन सड़कों के लिए डायवर्ट कर दिया, जिनके काम इनके चेहेते ठीकेदार कर रहे थे या कर रहे हैं।

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जानिए राशि डायवर्ट का मतलब

मान लीजिए किसी मद में एक करोड़ रुपये सरकार की ओर से आए। इसके लिए जरूरी नहीं है कि वह राशि उसी मद में खर्च हो। कहीं पर भी उस पैसे को लगा सकते हैं। फिर जहां पैसा लगाया है, उसकी राशि आने पर उसे इधर लगा देंगे। जब नहीं आएगा, इधर का काम प्रभावित रहेगा। रानीबाग-जैपट्टी, जमालपुर-जलालपुर मार्ग के मद के करीब साढ़े करोड़ रुपये दूसरी सड़कों पर या कार्यों में डायवर्ट कर दिया। इसके कारण इधर काम रुक गया है। ठीकेदार का छह करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। यह राशि मिले तो आगे का काम शुरू हो।

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डायवर्टेड राशि को चहेते ठीकेदारों के नाम बांड बनवाकर फर्जी बिल के माध्यम से निकाल लिया जाता है। हालांकि इसकी शिकायत किए जाने पर राशि डायवर्ट करने पर सरकार ने पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस रोक ने रानीबाग-जैपट्टी-जमालपुर-जलालपुर मार्ग के भविष्य पर प्रश्नवाचक चिह्न लगा दिया है।

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इधर की राशि को डायवर्ट हो गई, दूसरे मद की राशि अब इधर डायवर्ट नहीं की जा सकती। तो ठीकेदार का बकाया कैसे अदा होगा और शेष काम कैसे होगा, यह यक्ष प्रश्न है। इसका जवाब तो अधिशासी अभियंता को देना होगा।

अधिशासी अभियंता देवपाल की बेपरवाही से मुआवजे का मामला भी अधर में

इस सड़क पर कई स्थानों पर किसानों, दुकानदारों तथा मकानमालिकों को मुआवजा देना है। जब तक मुआवजा नहीं मिलता, लोग न अपनी दुकान तोड़ने दे रहे हैं, न घर गिराने दे रहे हैं। यही हाल किसानों का भी है। वह कहते हैं कि पहले मुआवजा दे दो, फिर काम कराओ। जैपट्टी गांव और जमालपुर बाजार में मुआवजे की समस्या जाता है। लोग काम करने ही नहीं दे रहे हैं, लिहाजा जितनी जगह थी, उसमें ठीकेदार ने सड़क बना दी। जैपट्टी गांव में सड़क निर्माण इसलिए नहीं हो पा रहा है कि वहां मात्र 6-7 लोगों को मुआवजा देना है। नहीं दिया जा सका है।

इसमें ज्यादा गड़बड़ी यहां हुई है कि जहां सड़क बन चुकी है, वहीं पर मुआवजा भी दिया गया है। इसमें सिर्फ पीडब्ल्यूडी नहीं, राजस्व कर्मचारियों की भी बड़ी भूमिका है। कमीशन या रिश्वत की चाह। जिसने मन माफिक जेब गरम की, उसे जल्दी और ज्यादा मुआवजा मिला है। जो रिश्वत नहीं देना चाहते, उनका मामला अटका पड़ा है। इसके साथ ही सड़क निर्माण भी अटका है। जहां सड़क बन चुकी है, वहां मुआवजा बाद में भी दिया जाता तो चलता। क्योंकि निर्माण की प्रगति पर उसका कोई असर नहीं पड़ता। पहले उन स्थानों पर मुआवजा देना चाहिए था, जहां पर काम इसी की वजह से अवरुद्ध है।

कब हटेंगे बिजली के पोल व पेड़

बिजली के जो खंभे सड़क के किनारे थे, चौड़ीकरण के कारण वे सड़क में आ गए हैं। जो पेड़ हैं, वे पहले किनारे थे, अब सड़क में आ गए हैं। विद्युत खंभों का हटना तथा पेड़ों का कटना जरूरी है। इसके कारण भी सड़क निर्माण प्रभावित है।

सड़क के भविष्य पर प्रश्नचिह्न

चूंकि इस मार्ग की राशि को दूसरे मद में डायवर्ट कर उसकी निकासी करा ली गई है। अब दूसरे मद की राशि इस मार्ग के लिए डायवर्ट नहीं की जा सकेगी। क्योंकि सरकार ने राशि डायवर्ट करने पर रोक लगा दी है। ठीकेदार का साढ़े छह करोड़ रुपये का बिल बकाया है। इस मद में राशि आएगी नहीं तो फिर निर्माण कैसे होगा। उत्तर प्रदेश सरकार के प्राविधिक शिक्षा, बाट-माप व उपभोक्ता संरक्षण मंत्री आशीष पटेल ने लोक निर्माण विभाग में अपने समकक्ष जितिन प्रसाद को पत्र लिखकर पूरे मामले की विजिलेंस से जांच कराने की अनुशंसा की है।

अभी तो यह झांकी है…

बहुत कुछ है। पढ़ते रहिए मिर्जापुर लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 में लूट की दास्तां…जारी

 

नोट- मिर्जापुर लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड-2 के अधिशासी अभियंता देवपाल जी यदि इन आरोपों के बारे में कोई सफाई देना चाहते हैं तो स्वागत है। वह मेरे मोबाइल नंबर 7909081514 पर ह्वाट्सएप के माध्यम से भेज सकते हैं। उनकी पूरी बात प्रकाशित की जाएगी।

 


Sachchi Baten

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