July 24, 2024 |

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छठे चरण क़े लिए पूर्वांचल तैयार, 14 सीटों पर क्या है स्थिति?

Sachchi Baten

लंगड़े घोड़ों पर दांव लगाने को अब मतदाता तैयार नहीं

– 2024 में कोई लहर नहीं, बावजूद इसके भाजपा मजबूत

– 2019 में भी भाजपा को नहीं मिली थी अपेक्षित सफलता

– राजभर, मौर्य व निषाद जैसे सहयोगियों पर भी टिकी भाजपा की आस

 

कुमार सौवीर, लखनऊ। लोकसभा चुनाव 2024 क़े मतदान क़े 5 चरण पूरे हो चुके हैं और छठे चरण क़े लिए पूर्वांचल तैयार है। 2019 की तरह इस बार भी भाजपा के लिए पूर्वांचल को साध पाना आसान नहीं है। 2019 के चुनाव में भाजपा को सबसे ज्‍यादा झटका पूर्वांचल में ही लगा था।

अंबेडकरनगर, आजमगढ़, श्रावस्‍ती, जौनपुर, गाजीपुर, लालगंज तथा घोसी में उसे हार का सामना करना पड़ा था। इस बार इन सीटों के अलावा पूर्वांचल की आधा दर्जन से ज्‍यादा अन्‍य सीटें हैं, जिन पर भाजपा को लोहे के चने चबाने पड़ रहे हैं। चंदौली, भदोही, बस्‍ती, देवरिया, प्रतापगढ़, मछलीशहर और कौशांबी में इंडिया गठबंधन से कांटे की लड़ाई है। इन सीटों पर भाजपा प्रत्‍याशियों से जनता में भारी नाराजगी तो है ही, हाल में कुंडा नरेश राजा भैया क़े समाजवादी पार्टी को समर्थन दिए जाने क़े बाद स्थिति और अधिक ख़राब हो गई है।

उत्‍तर प्रदेश में पांच चरण के मतदान के बाद अब लड़ाई उस पूर्वांचल की तरफ बढ़ चुकी है जहां से खुद नरेन्द्र मोदी बतौर उम्मीदवार मैदान में हैं। बनारस सहित पूर्वांचल की 27 सीटों पर आगामी दो चरणों में मतदान होना है। ऐसा माना जाता है कि जो भी दल या गठबंधन पूर्वांचल में बढ़त हासिल करता है, उसकी सरकार बनने की संभावना मजबूत होती है। 2014 के बाद यह पहला चुनाव है, जिसमें कोई भी लहर नजर नहीं आ रही है।

इसी इलाके में राम मंदिर निर्माण के बाद भी ध्रुवीकरण जैसा उद्वेग कहीं नजर नहीं आ रहा है। मतदाता भी चुनाव को लेकर उत्‍साहित नहीं है, इसलिए पूर्वांचल में कोई बड़ा उलटफेर हो जाएगा, इसकी संभावना नहीं है। यूपी में हुए अब तक के मतदान में दोनों गठबंधन अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। यूपी में हुए अब तक के मतदान के समीकरण और ट्रेंड को देखें तो भाजपा बढ़त पर है, लेकिन उसे 2019 के मुकाबले कई सीटों पर स्‍थानीय प्रत्‍याशियों से नाराजगी के चलते नुकसान होता दिख रहा है।

हालांकि यह नुकसान इतना बड़ा नहीं है कि सत्‍ता का समीकरण बदल दे, लेकिन ऐसा लगता है कि जनता मोदी के नाम पर अब किसी को भी जिताने के लिए तैयार नहीं है। यह मतदान प्रतिशत से स्‍पष्‍ट दिख रहा है। मोदी और अमित शाह भी स्थिति को भांप चुके हैं, लिहाजा दोनों नेताओं ने पूर्वांचल में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। पूर्वांचल के दो चरणों में भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी, सुभासपा और अपना दल की क्षमता का भी टेस्‍ट होना है। पूर्वांचल की 27 सीटों पर पिछड़े मतदाताओं की संख्‍या सर्वाधिक है, जिसमें यादव, कुर्मी, राजभर जैसी जातियां शामिल हैं।

भाजपा को केशवदेव मौर्य की पार्टी महान दल ने भी समर्थन दे दिया है, जो भाजपा के लिए राहत की बात है। पूर्वांचल में 50 फीसदी से ज्‍यादा पिछड़े मतदाता हैं, जो दोनों गठबंधनों के भाग्‍य का फैसला करेंगे। दरअसल, उत्‍तर प्रदेश में अब केवल मोदी के नाम पर जनता किसी को भी चुनकर भेजने को तैयार नहीं है। उसका भले ही कुछ हद तक मोदी से मोहभंग हुआ हो लेकिन वह विपक्षी गठबंधन को लाने के लिये तैयार भी नहीं है।

इसलिए खासकर मध्‍यम वर्ग ने खुद को चुनाव से अलग कर लिया है। इसी का परिणाम है कि मतदान प्रतिशत आंशिक रूप से कम हो रहा है। बीते दो आम चुनावों में मतदाताओं ने मोदी के नाम पर कमजोर-मजबूत सभी प्रत्‍याशियों को जीत दिला दी, लेकिन इस बार ऐसा होता नहीं दिख रहा है। भाजपा ने मोदी लहर के नाम पर फिर से उन्‍हीं प्रत्‍याशियों को जनता पर थोप दिया, जिनको लेकर जनता में भारी नाराजगी थी। हालांकि विपक्ष इस नाराजगी को भुना नहीं पाया है, लेकिन फिर भी भाजपा को पूर्वांचल की कई सीटों पर केवल प्रत्‍याशियों के चयन के चलते नुकसान उठाना पड़ेगा। अब पूर्वांचल में छठे एवं सातवें चरण में 25 मई और 1 जून को होनेवाला मतदान तय करेगा कि ऊंट किस करवट बैठेगा।


Sachchi Baten

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