July 20, 2024 |

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अहरौरा जमीन प्रकरण में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं हुआ

Sachchi Baten

घर, प्रतिष्ठान तथा खेतों को पहाड़ और नाले की जमीन बताने वाला एसडीएम का आदेश निरस्त

-राजस्व कोर्ट ने कहा प्रभावित पक्ष को सुने बिना फैसला देना सही नहीं

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-दो माह में प्रभावितों को सुनकर फैसला करने के निर्देश

-अहरौरा में लखनिया दरी के पास दो वाटर पार्क, बेटियों का रेस्टोरेंट के साथ कई अन्य प्रतिष्ठान हो रहे थे प्रभावित

-घर, स्कूल, खेत आदि भी आ रहे हैं एसडीएम के आदेश की जद में

राजेश पटेल, अहरौरा/मिर्जापुर (सच्ची बातें)। अहरौरा में लखनिया दरी के आसपास के जमीन मालिकों को राजस्व कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। चुनार एसडीएम के उस आदेश को रद कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि ये जमीनें सुरक्षित श्रेणी की हैं। रजिस्ट्री में दर्ज नामों को निरस्त कर पहाड़ व नाला दर्ज करने का आदेश दिया था।

एसडीएम के इस आदेश से वहां के लोगों में खलबली मच गई। करोड़ों की प्रॉपर्टी खरीद कर जिन लोगों ने घर-प्रतिष्ठान बना लिए थे, उनको बेदखली का सताने लगा। हनौता के लतीफपुर गांव की करीब 34 हेक्टेयर जमीन इस आदेश से प्रभावित हो रही थी। जांच मेंं साढ़े 16 हेक्टेयर नाला व साढ़े 17 हेक्टेयर पहाड़ मिला था। करीब 130 बैनामा प्रभावित हो रहे थे। यदि एसडीएम का आदेश प्रभावी रहता तो कटर प्लांट, दोनों वाटर पार्क तथा बेटियों का रेस्टोरेंट भी बेदखली की जद में आ जाता।

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एसडीएम ने कहा था कि नाला तथा पहाड़ खाते की सुरक्षित भूमि पर अवैध तरीके से कब्जा कर लिया गया, जिसके खातेदारों का नाम निरस्त करा दिया गया है। पहाड़ नाला सुरक्षित भूमि के अंतर्गत आता है। ऐसी भूमि पर भूमिधरी का अधिकार प्राप्त नहीं किया जा सकता, ना तो इसका आवंटन किया जा सकता है। नाला पहाड़ इत्यादि उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 132 के तहत की भूमि होती हैं। जिसपर किसी भी प्रकार का भौमिक अधिकार प्रदान नहीं किया जा सकता हैं।

एसडीएम के इस आदेश के विरोध में सुशीला देवी व अन्य ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 210 के तहत राजस्व परिषद प्रयागराज में वाद संख्या REV/588/2024/ मिर्जापुर दायर किया।

राजस्व परिषद के सदस्य ओमप्रकाश राय की अदालत ने 22 फरवरी 2024 को पारित आदेश में एसडीएम के आदेश को निरस्त कर दिया। इसका कारण बताते हुए न्यायालय ने आदेश में कहा है कि प्रभावितों को सुने बिना एकतरफा निर्णय ले लेना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। लिहाजा उप जिलाधिकारी चुनार द्वारा 31 जनवरी 2024 को पारित आदेश को निरस्त किया जाता है। निर्देश दिया कि उभय पक्षों को सुनवाई व साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर देते हुए विधिक प्रावधानों का पालन करते हुए दो माह के अंदर आदेश पारित करना सुनिश्चित किया जाए। इसके बाद ही कार्यवाही की पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। राजस्व न्यायालय के इस फैसले से प्रभावितों को बड़ी राहत मिली है। अब उनको भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।

बता दें कि हनाैता के लतीफपुर में बाहर से आकर भी उद्यमियों ने जमीनें खरीदी हैं। कई छोटी फैक्ट्रियां हैं। बड़े पिकनिक स्पॉट के रूप  में यह स्थान परिवर्तित होता जा रहा है। बगल में अहरौरा बांध है। फोर लेन सड़क। ऊंचे पहाड़, उनसे गिरता झरनों का पानी। इस स्थान के आसपास लखनिया दरी, चूना दरी, भरदरिया दरी जैसे रमणीक स्थान हैं। वैसे तो पूरे साल यहां की प्राकृतिक छटा निहारने के लिए सैलानी आते रहते हैं, लेकिन बरसात के मौसम की बात कुछ और है।

 


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