July 23, 2024 |

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पिड़खिड़ के प्रेम सिंह जीः  इतिहास लिखना होगा, नहीं तो पीढ़ियां भुला देंगी…

Sachchi Baten

सेवानिवृत्त जिला जज प्रेम सिंह ने सिखाई जीने की कला

-जीवन में संघर्ष के साथ सामाजिक मूल्यों का आदर्श मानदंड स्थापित किया बाबू प्रेम सिंह ने

राजेश पटेल, जमालपुर (सच्ची बातें)। इतिहास खुद लिखना होगा। वरना, आने वाली नस्लें हमें और हमारे पूर्वजों को याद नहीं रख पाएंगी। मिर्जापुर जनपद के चुनार तहसील में तमाम ऐसी विभूतियों ने जन्म लिया है, जिनके बारे में सुनने से प्रेरणा मिलती है। जीवन जीने का सलीका मालूम पड़ता है। गर्व की अनुभूति होती है।

आज बात जमालपुर विकास खंड के पिड़खिड़ गांव में 15 फरवरी 1926 को जन्मे बाबू प्रेम सिंह के बारे में। उनका जीवन जीने का तरीका अनुकरणीय रहा। साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हुए भी खुद को खड़ा किया। सम्मान लायक बनाया। आदर्श जीवन के सिद्धांतों को आत्मसात किया। वैसे ही जिया भी। अब तो पिड़खिड़ से बनारस आना-जाना काफी आसान हो गया। आजादी के पहले न सड़क थी, न गंगा पर पुल। उस समय बनारस जाकर पढ़ना बहुत ही मुश्किल भरा काम था। इसके अलावा भी और बाधाएं थी, लेकिन प्रेम सिंह को कोई बाधा नहीं रोक सकी। उन्होंने बीएचयू से ग्रेजुएशन और एलएलबी की।

उनके विचार और कार्य में कोई अंतर नहीं था। तभी तो उनकी न जयंती है और न पुण्यतिथि। फिर भी याद करने को विवश हुआ। आपका जीवन संघर्ष एवं सामाजिक मूल्यों का मानदंड स्थापित करने के लिए समर्पित रहा। आप ग्राम पिड़खिड़, पोस्ट पिड़खिड़, तहसील चुनार, परगना भुइली, जिला मिर्जापुर उत्तर प्रदेश के मूल निवासी रहे। पिता विश्वनाथ सिंह ने पढ़ाई तो आठवीं तक ही की थी, लेकिन उर्दू भाषा पर उनकी अच्छी पकड़ रही।

प्राथमिक शिक्षा गांव की प्राथमिक पाठशाला से ग्रहण करने के बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई रामनगर वाराणसी से की। बीए एवं एलएलबी की शिक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ग्रहण की। एलएलबी करने के बाद आपका विवाह ग्राम कांटा, तहसील चंदौली जिला वाराणसी (वर्तमान में चंदौली जिला) के चौधरी सहदेव सिंह एडवोकेट की सुपुत्री यशोदा देवी के साथ हुआ।
एलएलबी करने के बाद आपने वाराणसी जिला कचहरी में वकालत शुरू की। शीघ्र ही आपका चयन मुंसिफ (पीसीएस जे) के पद पर हो गया। आपने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बतौर न्यायाधीश काम किया। फरवरी 1984 में आप जनपद न्यायाधीश गाजीपुर से सेवानिवृत्त हुए।
आपको पत्नी यशोदा देवी के माध्यम से चार पुत्र एवं एक पुत्री की प्राप्ति हुई। सन 1964 में आपकी पत्नी यशोदा देवी की देहावसान हो गया। इसके बाद बाबू प्रेम सिंह ने ही पांचों संतानों की परवरिश की। दूसरी शादी नहीं की।
आप समाज को एवं अपने पुत्रों व पुत्री को सदैव शिक्षा के महत्व को बताते थे। कहते थे कि अपने संसाधनों को दिखावे और फिजूलखर्ची में व्यर्थ नहीं करना है। इसी सिद्धांत के कारण वह सादा जीवन जीते थे।
आप अंध विश्वास, पाखंड, दिखावा एवं मंदिर-मस्जिद से दूरी बनाकर रहते थे। आप ईवी रामासामी नायकर पेरियार की पुस्तकों को पढ़ते थे। शिक्षा एवं विज्ञान के प्रति आपकी प्रेरणा से आपके पुत्रों व पुत्री ने भी सफलता की ऊंचाइयों को हासिल किया। बड़े पुत्र मुक्तेश्वर नाथ सिंह (स्वर्गीय) अपर महाधिवक्ता उच्च न्यायालय इलाहाबाद के पद तक पहुंचे। इनके पुत्र अमित कुमार सिंह इस समय एडिशनल चीफ स्टैंडिल काउंसिल उच्च न्यायालय इलाहाबाद हैं।
आपकी पुत्री डॉ. नलिनी सिंह एमएस (गायकोलॉजी) जनपद मऊ में हैं। आपके दूसरे पुत्र अविमुक्तेश्वर नाथ सिंह ज्वाइंट डायरेक्टर प्राजीक्यूशन के पद से सेवानिवृत्त हुए और लखनऊ में निवास करते हैं।
आपके तीसरे पुत्र शैलेश्वरनाथ सिंह जिला जज के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और लखनऊ में ही रहते हैं। चौथे पुत्र डॉ. वृजेश्वरनाथ सिंह एमडी (मेडिसन) हैं। रांची में रहते हैं। जमालपुर के गौरव बाबू प्रेम सिंह 28 सितंबर 2019 को अंतिम सांस ली।


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