July 24, 2024 |

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सियासतः फिर पलटी मारेंगे नीतीश कुमार?

Sachchi Baten

मोतिहारी में भाजपा से पुरानी दोस्ती खत्म न होने की बात कह सभी को चौंकाया

-कहा, जब तक जिंदा हूं, तब तक भाजपा से संबंध कायम रहेगा

-उनके इस बयान के मायने निकालने में जुटे लोग

मोतिहारी (सच्ची बातें)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर पलटी मारेंगे ? लोगों ने उनको जो ‘पलटू राम’ नाम दिया है, वह सही साबित होगा क्या? राजनीतिक हलके में इस पर तेजी से चर्चा शुरू हो गई है। मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह उनके द्वारा दिए गए भाषण के मायने लोग तलाश रहे हैं। उन्होंने मंच से भाजपा के साथ अपनी पुरानी दोस्ती का हवाला देते हुए कहा कि जब तक जिंदा रहेंगे, तब तक यह कायम रहेगी।

उनके इस सियासी बयान से राजनीतिक हलके में भूचाल सा आ गया है। बिहार में राहें जुदा करने के करीब दो साल बाद गुरुवार 19 अक्टूबर को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भाजपा प्रेम छलक पड़ा। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना इशारों-इशारों में इसे जाहिर किया।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना का इतिहास दोहराते हुए उन्होंने कहा कि 2007 में केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न राज्यों में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की शुरुआत की। हमने तभी कहा था कि इसकी स्थापना बापू के चंपारण सत्याग्रह की भूमि पर होगी।

2009 में अधिनियम बना और तब से मैं लगा रहा, तब कांग्रेस की सरकार थी। मैं उस समय के मंत्री के यहां भी गया। भेंट भी की और उनके आवास पर भोजन किया। उन्होंने कहा कि गया में खोलेंगे, लेकिन हमने चंपारण के लिए कहा। फिर यह तय हुआ दोनों स्थानों पर केंद्रीय विश्वविद्यालय खुलेगा। इसके बाद 2014 में केंद्र की सरकार ने मोतिहारी में केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की सहमति दी। हमने इसका महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय रखने का प्रस्ताव दिया।

इसी के बाद नीतीश ने सामने बैठे एनडीए के नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा- तब हम साथ थे। याद है न 2005। हमारी दोस्ती तब भी थी। अब भी है। जब तक हम जीवित रहेंगे हमारा-आपका संबंध रहेगा।

इस बयान के पीछे नीतीश कुमार की क्या मंशा है, यह तो वही जानें। लेकिन जिस समय दिया गया, वह चर्चाओं को जन्म देने के लिए अहम है।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने पटना में बयान दिया कि आगामी लोकसभा चुनाव में यदि इंडिया गठबंधन को बहुमत मिलता है कि कांग्रेस पार्टी अपने अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे या पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का नाम प्रधानमंत्री के लिए नामित करेगी। थरूर के पहले कांग्रेस के एक और बड़े नेता कमलनाथ ने भी कहा था कि कांग्रेस की ओर से निर्विवाद रूप से पीएम फेस राहुल गांधी ही होंगे।

इसके बाद भाजपा से दोस्ती खत्म न होने का नीतीश कुमार का बयान आया है तो चर्चा होगी ही। वैसे भी कांग्रेस इस समय कुछ ज्यादा ही खुशफहमी में है। गलती चाहे किसी की हो, लेकिन मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को भाव नहीं दिया है। इसके जवाब में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ न रहने का संकेत दे दिया है। कुछ सीटों के लिए तो सपा द्वारा प्रत्याशियों का चयन भी कर लिए जाने की चर्चा है।

नीतीश जानते हैं कि कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है। समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में मजबूत है। लिहाजा वह इन दोनों की महत्वाकांक्षा से खुद को अलग रखते हुए चुप्पी साधे हुए हैं। वह राजनीति के खिलाड़ी कहे जाते हैं। वह जानते हैं कि त्रिशंकु जनमत मिलने की स्थिति में एनडीए और इंडिया, दोनों के लिए वह विकल्प हैं। एनडीए खेमा कांग्रेस को सत्ता में आने से रोकने के लिए नीतीश कुमार पर बाजी लगा सकता है। इंडिया गठबंधन भी भाजपा को रोकने के लिए ऐसा कर सकता है। नीतीश कुमार के दोनों हाथों में लड्डू है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इसी रणनीति के तहत नीतीश कुमार का यह बयान आया है। वह भाजपा को दुश्मन नहीं मानते। मोतिहारी में राष्ट्रपति के सामने भाजपा के साथ  जीवनपर्यंत दोस्ती निभाने की बात कहकर उन्होंने संकेत दे दिया है। अब गेंद इंडिया गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के पाले में उन्होंने फेंक दिया है। देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस का रुख अब क्या होता है।

 


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