July 24, 2024 |

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राजेश पटेल की कविता- मैं क्या हूं…

मैं ओस हूं कि आस, दूर हूं या पास? मैं दूब हूं कि दास, जिंदा हूं या लाश? पढ़ें पूरी कविता....

Sachchi Baten

 

 

 

मैं क्या हूं…

कोई बताये मुझे…

मैं ओस हूं कि आस, दूर हूं या पास?

मैं दूब हूं कि दास, जिंदा हूं या लाश?

मैं पुण्य हूं कि पाप, वर हूं या श्राप?

मैं प्राण हूं कि त्राण, या हूं मैं कास?

मृत्यु हूं, कारण बनता हूं इसका भी।

जीवन हूं, जन्म का हूं माध्यम भी।

दोनों हूं, एक दूसरे का हूं पूरक भी।

सबका हूं, और नहीं हूं किसी का भी।

मुझे खुद नहीं पता, हूं कितनी देर का।

मैं केला हूं या है मेरा स्वभाव बेर का।

पता नहीं शाम, रात, भोर और सबेर का।

जल्दी जल्दी में पता नहीं चलता देर का।

मैं क्या हूं, कुछ नहीं, फिर कैसा गुमान।

कोई बताए भाई…

-राजेश पटेल, 9471500080, 7909081514


Sachchi Baten

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