July 16, 2024 |

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1857 की मेरठ क्रांति के महानायक धन सिंह की वीरगाथा सुन लोग रोमांचित

Sachchi Baten

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ में गोष्ठी आयोजित

-धनसिंह कोतवाल जी ही मेरठ में क्रांति के नायक- डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई

धनसिंह कोतवाल ने सभी को साथ लेकर सभी के लिए लड़ी क्रांति- कृष्ण सिंह, पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय

धनसिंह कोतवाल के नाम पर मेरठ में हो मेट्रो स्टेशन का नाम- सरबजीत सिंह कपूर, राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता”

धनसिंह कोतवाल जी को पाठ्यक्रम में कराया जाएगा शामिल- कमल दत्त शर्मा

मेरठ (सच्ची बातें)। धन सिंह कोतवाल शोध संस्थान द्वारा चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के वृहस्पति भवन में गुरुवार नौ मई को एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य 1857 की मेरठ क्रांति के महानायक शहीद धन सिंह कोतवाल की संघर्षगाथा को याद करके उनको नमन कर था।

इस अवसर पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इसके मुख्य अतिथि सांसद राज्यसभा डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई थे। उन्होंने कहा कि धनसिंह कोतवाल जी ही वास्तव में मेरठ में 1857 की क्रांति के नायक थे। उन्होंने सरकारी नोकरी की परवाह न करते हुए अपने परिवार, अपने गांव तथा अपनी पुलिस की नौकरी को देश हित में न्यौछावर कर दिया। वाजपेयी ने अपने शोध के आधार पर कहा कि शहीद मंगल पांडेय ने बैरकपुर में क्रांति की थी, मेरठ की क्रांति से मंगल पांडेय का कोई लेना-देना नहीं था। मंगल पांडेय किसी भी दिन मेरठ नहीं आए थे। मैंने मंगल पांडेय के गांव जाकर बलिया में सारे तथ्य जुटा कर इस बात के प्रमाण इकट्ठे किए हैं और इस बात का पता लगाया है कि क्या वास्तव में मंगल पांडेय कभी मेरठ आए थाे। मेरे शोध से स्पष्ट है की मंगल पांडेय का मेरठ की क्रांति से कोई वास्ता नहीं था और ना ही वह कभी मेरठ आये थे। मेरठ में धन सिंह कोतवाल जी ने ही 1857 की क्रांति की शुरुआत की थी। धन सिंह कोतवाल वास्तव में मेरठ की 1857 की क्रांति के नायक थे।

संगोष्ठी के अध्यक्ष श्रीकृष्ण सिंह, पूर्व मुख्य न्यायाधीश प्रयागराज उच्च न्यायालय ने कहा कि धनसिंह कोतवाल जी द्वारा जो क्रांति की गई थी, वह सर्व समाज से सहयोग लेकर, सर्व समाज के लिए की गई थी। उनका उद्देश्य देश को गुलामी की बेड़ियों से बाहर निकाल कर स्वतंत्र कराना था।

अति विशिष्ट अतिथि राष्ट्रपति पुरस्कार पदक विजेता प्रमुख समाजसेवी सरबजीत सिंह कपूर ने अपने उद्बोधन में कहा कि क्रांतिनायक धनसिंह कोतवाल जी की शहादत बहुत बड़ी शहादत है और मैं मांग करता हूं सरकार से कि धनसिंह कोतवाल जी के नाम पर मेरठ में मेट्रो स्टेशन का नाम  रखा जाए। अति विशिष्ट तिथि कमल मलिक पूर्व विधायक गढ़ ने कहा कि धन सिंह कोतवाल ऐसे क्रांतिकारी थे,  जिनसे हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। वह मां भारती के सपूत थे।

अति विशिष्ट अतिथि कमल दत्त शर्मा ने कहा कि धन सिंह कोतवाल जी की संघर्ष गाथा और शहादत को नमन कार्यक्रम में पधारे महानुभावों का में हृदय से सम्मान करता हूं, धन सिंह कोतवाल जी राष्ट्रीय एकता के प्रतीक थे। उन्होंने सारे राष्ट्र को आजाद करने का बीड़ा मेरठ से उठाया था। हम उन्हें इतिहास की पुस्तकों में शामिल करने की कोशिश करेंगे।

संगोष्ठी कार्यक्रम में धनसिंह कोतवाल जी के वंशज एवं शोध संस्थान के चेयरमैन तस्वीर सिंह चपराना  सभी के द्वारा पगड़ी पहनकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रमुख समाजसेवी सरबजीत सिंह कपूर ने कहा कि यह पगड़ी हमारी शान है। इसे संभाल कर रखना।

कार्यक्रम में जैन, बौद्ध, क्रिश्चियन, मुस्लिम, हिंदू आदि सभी धर्म के धर्मगुरु गुरुओं ने राष्ट्रीय एकता, देश प्रेम की सीख दीऔर धन सिंह कोतवाल जी की शहादत को नमन किया।

प्रधानाचार्य रामपाल सिंह, एडवोकेट नरेश गुर्जर, राष्ट्रीय किसान यूनियन के उपाध्यक्ष मैनपाल सिंह, अश्वनी त्यागी, सूरज पाल सिंह, प्रोफेसर नवीन चंद्र गुप्ता आदि ने अपने उद्बोधन में धन सिंह कोतवाली को नमन किया।

धनसिंह कोतवाल शोध संस्थान के सदस्य जीएम बृजपाल सिंह चौहान, डीएसपी बले सिंह जी, एडवोकेट जबर सिंह, गुलबीर सिंह पार्षद, रोबिन गुर्जर, प्रोफेसर विवेक त्यागी, प्रोफेसर देवेश शर्मा, मनोज कुमार धामा, संजीव कुमार गाडिना, प्रधानाचार्य संजीव नागर, अरुण खटाना, भाई हंसराज, भाई सोनपाल सिंह आदि सभी का स्वागत सत्कार किया गया। धन सिंह कोतवाल महिला शोध समूह की सदस्यों ने भी बड़ी संख्या में प्रतिभाग किया। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार विपुल जैन काे सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन धनसिंह कोतवाल के वंशज एवं शोध संस्थान के चेयरमैन तस्वीर सिंह चपराना ने किया।


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