July 24, 2024 |

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#Mirzapur : …तो ढाई सौ गांवों में नहीं होगी धान की रोपाई ?

Sachchi Baten

 

 

किसानों के लिए सरकारी आफत साबित हो रहा जल जीवन मिशन

 

गेहूं की सिंचाई में कटौती कर धान की नर्सरी के लिए जरगो बांध में बचाए गए पानी पर मिशन के अधिकारियों की गिद्ध दृष्टि

 

जरगो डैम से लौटकर राजेश पटेल

मिर्जापुर जनपद के चुनार तहसील में करीब 250 गांवों में इस साल धान की नर्सरी पर संकट मंडरा रहा है। जाहिर सी बात है कि धान की नर्सरी समय से नहीं पड़ेगी तो उसकी रोपाई में भी देर होगी। रोपाई में देर का मतलब उत्पादन प्रभावित होना तय है। बांध के स्थापना काल से लेकर अब तक का सबसे बड़ा जल संकट इस समय प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्र में आने वाला है। इसको लेकर किसान अभी से चिंतित हैं। इसका कारण सिर्फ और सिर्फ जल जीवन मिशन योजना के अदूरदर्शी अलंबरदार हैं।

 

 

आइये जानते हैं पूरा मसला  

मिर्जापुर और सोनभद्र जिले में हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के तहत करीब 5500 करोड़ की योजना पर काम चालू है। मिर्जापुर जनपद के चुनार तहसील में यह योजना पूरी तरह से जरगो बांध पर आश्रित है। और, जरगो बांध में इस साल पानी ही नहीं है। इसका कारण मानसून के पिछले सीजन में कम बारिश होना है। आने वाले जल संकट को देखते हुए किसान कल्याण समिति ने तय किया था कि गेहूं की तीन सिंचाई के बजाए दो सिंचाई के लिएए पानी दिया जाए। तीसरी सिंचाई के लिए लाख मांग के बावजूद बांध सेे पानी नहीं छोड़ा गया। इसके पीछे समिति की मंशा थी कि पानी बचा रहेगा तो धान की नर्सरी समय से पड़ जाएगी तथा गर्मी में भूूगर्भ जलस्तर मेंटेन करने में सहायक होगा, ताकि पशु-पक्षियों समेत आम जन को पेयजल की समस्या से भी न जूझना पड़े।

 

 

अब क्या है परेशानी

दरअसल जल जीवन मिशन के लिए जिस कंपनी को ठेका दिया गया है, उसका नाम मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड है। इस कंपनी को दिसंबर 2022 में ही काम पूरा करना था। जो समय से पूरा नहीं हो सका। अब उसे पाइप लाइन की टेस्टिंग की जल्दी है। इसके लिए पानी चाहिए। लिहाजा सिंचाई विभाग पर शासन प्रशासन से दबाव बनवाकर किसानों द्वारा दान की नर्सरी के लिए संजोए गए पानी को बहाया जा रहा है।

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धौहां ग्राम समूह पेयजल योजना की टेस्टिंग के लिए इस कंपनी ने सिंचाई विभाग से बिना किसी अनुमति के जरगो बांध के मुख्य सुलिश से करीब 100 मीटर दूरी पर मेन कैनाल में एक दीवार बना दी गई। इसके माध्यम से पानी रोककर निगार वाले रास्ते के माध्यम से नदी में बहाया जा रहा है, ताकि आगे बने पंप से लिफ्ट कर पानी को धौहा ग्राम समूह पेयजल योजना को मुहैया कराया जा सके।

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किसानों का कहना है कि एक खास ग्रुप को फायदा पहुंचाने वाली इस योजना के लिए खेती किसानी की अनदेखी की जा रही है। जरगो बांध में बाणसागर बांध से पानी लाने की योजना कभी पूरी नहीं होगी। इनके गंगा नदी से या स्थान-स्थान पर बोरिंग करके पेयजल के लिए पानी की व्यवस्था करनी चाहिए थी, लेकिन किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करने वाली सरकार किसानों की आय को शून्य करने पर तुली है।

 

किसान कल्याण समिति के कार्यवाहक अध्यक्ष बजरंगी सिंह कुशवाहा बताते हैं कि समिति का गठन 1980 में हुआ था। तब से लेकर आज तक पहली बार इस तरह की समस्या सामने आई है। सिर्फ शासन प्रशासन की अदूरदर्शिता के कारण। कुशवाहा ने बताया कि यदि बांध के पानी से धान की नर्सरी पड़ जाएगी तो समय से बारिश होने पर रोपाई हो सकती है। जब नर्सरी ही नहीं पड़ेगी तो बारिश होने पर भी धान की रोपाई नहीं हो सकती। जब तक जरगो से अहरौरा बांध तथा हुसेनपुर बीयर को नहीं जोड़ा जाएगा, तब तक यह जल जीवन मिशन को मिर्जापुर जिले के चुनार में सफलता नहीं मिल सकती।

 

 

समिति के अध्यक्ष राजेंद्र शास्त्री के अनुसार प्रशासन किसानों के साथ वादा खिलाफी कर रहा है। इनको नरायनपुर पंप कैनाल से पानी उठाकर अहरौरा बांध तथा हुसैनपुर बीयर तक पहुंचाना चाहिए। फिर उसी पानी को पौनी के पास जरगो मेन कैनाल में गिराकर पेयजल की व्यवस्था की जा सकती है।

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अब आलम यह है कि प्रशासन एक तरह से गुंडई पर उतर चुका है। वह बांध से जबरन पानी लेना चाहता है, खेती हो, चाहे न हो। शास्त्री ने बतााया कि पांच फीट पानी बांध में बचा था, तभी सिंचाई का काम रोक दिया गया था, ताकि आपातकाल में उसका उपयोग किया जा सके। सुलिश की मरम्मत का काम भी अधिकारी नहीं होने दे रहे हैं। सुलिश के कुएं में पानी भरा हुआ है। इसके कारण पुराने फाटक की मरम्मत व पेंटिंग का कार्य नहीं हो पा रहा है। कुएं की दीवार की भी मरम्मत की दरकार है, ताकि पानी के रिसाव को रोका जा सके। यह कार्य भी नहीं हो पा रहा है। क्योंकि इसके लिए पानी का बहाव रोकना आवश्यक है। सुलिश के कुएं को सुखाना होगा, लेकिन प्रशासन की हठवादिता के कारण यह भी नहीं हो पा रहा है।

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उन्होंने सवाल किया कि नहर में एक फाल का निर्माण कराने में वर्षों की प्रक्रिया होती है। चीफ इंजीनियर तक से अप्रूवल लेना पड़ता है। यहां सिंचाई विभाग को दरकिनार कर बिना किसी डिजाइन के नहर में दीवार बना दी गई। सबसे बड़ा आश्चर्य इस बात का है कि कंपनी के खिलाफ कैनाल एक्ट के तहत कोई कार्रवाई भी नहीं हो रही है।

 

सात नदियां व 27 नालों का पानी आता है जरगो में

 

जरगो बांध में सात नदियों व 27 नालों का पानी आता है।  इसे एक बार भर जाने के बाद यदि तीन-चार साल बारिश न होने की स्थिति में भी कमांड एरिया की सिंचाई के लिए कोई परेशानी नहीं होती थी, लेकिन जल जीवन मिशन  के चलते एक साल से सूखेे में ही बांध का पानी सूखने के कगार पर है। पहली मई 2023 को गेज रजिस्टर के अनुसार बांध में मात्र चार फीट पानी बचा है। उसे भी लगातार बहाया जा रहा है।

 

बांध की उम्र ढलान की ओर, सुलिश सेे आती है डरावनी आवाज

 

जरगो बांध का निर्माण 1956 में शुरू हुआ था। 1959 में बन कर तैयार हो गया था। उस समय इसकी उम्र 100 साल आंकी गई थी। इस हिसाब से बांध को तैयार हुए 64 साल हो गए। 36 साल और बचे हैं। सुलिश के कुएं की दीवार तथा रबर, गेट आदि क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। पानी छो़ड़ने पर सुलिश से अजीब तरह की आवाज आती है। जो आसपास केे किसानों के लिए डरावनी लगती है। उन्हें इस बांध के टूटने का डर सताता रहता है।

 

बांध की तलहटी में जमा हो चुका है करीब 10 फीट सिल्ट

 

बांध की तलहटी में करीब 10 फीट सिल्ट जमा हो जाने से जलग्रहण क्षमता कम हो चुकी है। बांध की उम्र ढलान पर होने के कारण इसमें करीब 10 फीसद पानी कम स्टोर किया जाता है। क्षमता के अनुसार पानी रोकने पर इसके टूटने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। इससे भी सिंचाई जल का संकट बढ़ा है।

 

क्या कहते हैं सिंचाई खंड चुनार के अधिशासी अभियंता

 

सिंचाई खंड चुनार के अधिशासी अभियंता हरिप्रसाद ने बताया कि पहले पीने के लिए पानी की जरूरत है। लिहाजा सरकार का पूरा ध्यान जल जीवन मिशन के कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने पर है। जहां तक जरगो मेन कैनाल में अनधिकृत रूप से दीवार बनाने का मामला है तो उसकी जांच के लिए सहायक अभियंता को भेजा गया है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

 


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