July 24, 2024 |

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अफसरशाही को अपने इशारे पर नचाना जानते हैं मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लि. के मालिकान

Sachchi Baten

आंध्र प्रदेश के सीनियर आइएएस रजत कुमार की बेटी की शाही शादी का खर्च कथित रूप से वहन करने पर आए थे चर्चा में

 MEIL ने प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट सहित अन्य चुुनावी ट्रस्टों के जरिए राजनैतिक दलों को दिया है मोटा चंदा

इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में देश की शीर्ष कंपनियों में शुमार है मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्राट्रक्चर लि.

 

राजेश पटेल, मिर्जापुर। मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लि.। मिर्जापुर वाले इसका नाम तो सुने ही होंगे। जिले में संकटग्रस्त इलाकों में हर घर तक नल से शुद्ध जल पहुंचाने के लिए करीब 2200 करोड़ वाले जलजीवन मिशन का काम यही कंपनी कर रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में देश की शीर्ष कंपनियों में शुमार MEIL ने विभिन्न इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए राजनैतिक दलों को मोटी रकम चंदे में दी है, इसीलिए इस पर सभी की मेहरबानी बरसती है। इस कंपनी के अधिकारी जानते हैं कि उनके मालिकान की पहुंच काफी ऊपर तक है, इसीलिए किसी की नहीं सुनते।

 

मिर्जापुर जनपद के चुनार तहसील के किसान, मजदूर, व्यापारी आदि सभी तबके के लोग इस कंपनी के अधिकारियों की मनमानी से काफी परेशान हैं। वे आवाज उठाते हैं, लेकिन किसी को सुनाई नहीं देता। ऊपर से लेकर नीचे तक के अधिकारी इनके इशारे पर नाचने को विवश हैं।

 

मुख्यालय हैदराबाद में

इस कंपनी का मुख्यालय हैदराबाद में है। इसके ऑफिस में जीएसटी व आयकर दोनों की जांच हो चुकी है। इसके मालिक उस समय काफी चर्चा में आए थे, जब आंध्र प्रदेश के सीनियर आइएएस रजत कुमार की बेटी की शादी हुई। आरोप लगा कि इस शाही शादी का सारा खर्च मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लि. के मालिक रेड्डी ने वहन किया। कांग्रेस ने इसे मेघा घोटाला का नाम दिया। तथा न्यायिक जांच की मांग की थी।

www.greatandhra.com की रिपोर्ट

www.greatandhra.com वेबसाइट पर 29 जनवरी 2022 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने इस मेघा घोटाला की गुप्त जांच करने के लिए खुफिया विभाग को निर्देशित किया था। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी #BJP तथा  तेलंगाना राष्ट्र समिति #TRS ने चुप्पी साध ली। क्योंकि इसके नेताओं को पता था कि तेलंगाना में केसीआर और दिल्ली में मोदी सरकार के साथ मेधा के मालिकान के मजबूत संबंध हैं।

 

शायद इसी कारण यह जांच आएएस अधिकारी की बेटी की शादी के खर्च के लिए एमईआइएल द्वारा कथित भुगतान के बारे में नहीं थी, बल्कि मीडिया को दस्तावेज लीक करने वाले के बारे में थी सूत्रों के अनुसार, केसीआर को संदेह था कि टीआरएस के भीतर कुछ शक्तिशाली स्रोत एमईआईएल कर्मचारियों और ताज ग्रुप ऑफ होटल्स प्रबंधन के बीच समाचार पोर्टल के पत्राचार सहित दस्तावेजों के लीक होने के पीछे हो सकते हैं।

 

इन सूत्रों के मुताबिक शक की सुई केसीआर के बेटे केटी रामा राव की ओर इशारा कर रही थी, जो #MEIL के प्रमोटर कृष्णा रेड्डी के दबदबे को किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। उनका मानना ​​है कि कृष्णा रेड्डी वस्तुतः शीर्ष आएएएस अधिकारियों को अपने नियंत्रण में रखकर समानांतर सरकार चला रहे थे। उस समय चर्चा थी कि रजत कुमार राज्य के अगले मुख्य सचिव बन सकते हैं और अगर ऐसा होता है तो मेघा कृष्णा रेड्डी का सरकार पर पूरा दबदबा होगा। वेबसाइट ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि “अगर केटीआर अगले मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उन्हें डर है कि शायद उन पर उनका नियंत्रण नहीं होगा।” यही कारण है कि कुछ वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने एमईआईएल में अपने सहयोगियों की मदद से एमईआईएल कर्मचारियों और होटल प्रबंधन के बीच होने वाले पत्राचार तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की।

 

चुनावी चंदा देने वालों में प्रूडेंट इलेक्ट्रोरल ट्रस्ट किसी से कम नहीं

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म #ADR के मुताबिक राजनैतिक दलों को चंदा देने के मामले में प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट किसी से कम नहीं है। इसके तथा अन्य इलेक्टोरल ट्रस्ट के माध्यम से इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी मेघा इंजीनियरिंग व इंफ्रास्ट्रक्चर लि. ने मोटी रकम चंदे के रूप में दी है।

 

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) के जारी आंकड़ों के मुताबिक सबसे बड़े चुनावी ट्रस्टों में से एक चुनावी ट्रस्ट- प्रूडेंट ने बीजेपी को  2020-21 में 209 करोड़ रुपये का दान दिया है, जबकि 2019-20 में इसने 217.75 करोड़ रुपये का योगदान दिया था. जयभारत नाम के चुनावी ट्रस्ट ने 2020-21 में अपनी कुल आय का 2 करोड़ रुपए बीजेपी को किया। प्रूडेंट ने बीजेपी समेत सात राजनीतिक दलों को दान दिया है जिसमें जेडीयू, कांग्रेस, एनसीपी, आरजेडी, आप और एलजेपी भी शामिल हैं। कॉरपोरेट्स में फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज ने चुनावी ट्रस्ट के सभी डोनर्स में सबसे अधिक 100 करोड़ रुपये का योगदान दिया, इसके बाद हल्दिया एनर्जी इंडिया लिमिटेड ने 25 करोड़ रुपये और मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने विभिन्न ट्रस्टों को 22 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। एडीआर की रिपोर्ट में बताया गया, “2020-21 में चुनावी ट्रस्टों में 159 व्यक्तियों ने भी दान किया। दो व्यक्तियों ने प्रूडेंट चुनावी ट्रस्ट को 3.50 करोड़ रुपये दिए, 153 व्यक्तियों ने स्मॉल डोनेशन इलेक्टोरल ट्रस्ट को 3.202 करोड़ रुपये का योगदान दिया और तीन ने आइंजिगर्टिग चुनावी ट्रस्ट को कुल 5 लाख रुपये दिए है।

 

सोचने वाली बात यह है कि जो कंपनी राजनैतिक पार्टियों को चंदे के रूप में इलेक्टोरल ट्रस्टों के जरिए करोड़ों रुपये का चंदा दे रही हो, वह भला किसी का क्यों सुनेगी। चुनार क्षेत्र में धान की रोपाई हो या न हो, इससे उसे क्या मतलब। उसे तो टेस्टिंग के नाम पर जरगो जलाशय में धान की नर्सरी के लिए अर्जित पाानी बहाने से मतलब है। ताकि टेस्टिंग का काम पूरा करके वह सरकार से पूरा भुगतान प्राप्त कर ले।

 

भाजपा को ही नहीं, कांग्रेस को भी चंदा देती रही है यह कंपनी

एक वेबसाइट www.mirchi9.com पर 13 अक्टूबर 2019 को प्रकाशित खबर के अनुसार MEIL के एमडी, पीवी कृष्णा रेड्डी के आवासों और कार्यालयों पर आयकर का छापा पड़ा। आयकर अधिकारियों ने दो दिनों तक छानबीन की। मेघा कृष्णा रेड्डी दोनों तेलुगु राज्यों के मुख्यमंत्रियों के करीबी हैं और ऐसे आरोप हैं कि उन्होंने हाल के चुनावों में टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस के चुनावी खर्चों को वित्त पोषित किया है। इस बीच, एक राष्ट्रीय चैनल CNN News18 ने एक कहानी प्रकाशित की, जिसमें कहा गया कि हैदराबाद स्थित फर्म ने AICC को ₹100 करोड़ से अधिक नकद दिया।

 

किसानों ने कहा नल जल योजना के लिए पानी की हो दूसरी व्यवस्था

इस बाबत किसान कल्याण समिति जरगो कमांड के कार्यवाहक अध्यक्ष बजरंगी सिंह कुशवाहा ने कहा कि यह नल जल योजना किसानों की बर्बादी का कारण बनेगी। कम वर्षा के कारण बांध में सिंचाई भर भी पानी नहीं जुट पा रहा है, ऊपर से नल जल योजना के लिए भी पानी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि इस योजना के लिए पाना का कोई दूसरा विकल्प देखा जाना चाहिए। नहीं तो इस क्षेत्र के किसान आत्महत्या करने लगेंगे।

 

आइए जानते हैं कंपनी के बारे में विस्तार से

मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड (MEIL) एक बहु-क्षेत्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है, जिसकी हाइड्रोकार्बन, इलेक्ट्रिक बसों, रक्षा, दूरसंचार, बिजली, परिवहन, विनिर्माण, सामान्य और सामाजिक बुनियादी ढांचे, सिंचाई और पेयजल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति है। $ 5bn कंपनी विश्व स्तर पर विशाल प्रगति कर रही है। विविध क्षेत्रों में एक विविध पोर्टफोलियो होने में अपनी ताकत का लाभ उठाते हुए, कंपनी ने उन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है जो विकास के प्रमुख चालक रहे हैं।

कंपनी कुछ कर्मचारियों के साथ एक निर्माण इकाई के रूप में शुरू हुई और एक वैश्विक इंजीनियरिंग और बुनियादी ढांचे के समूह में विकसित हुई। कंपनी ने अपनी 32 साल की यात्रा में, विभिन्न क्षेत्रों में पुरस्कार-विजेता और रिकॉर्ड-ब्रेकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर चमत्कारों को निष्पादित किया है, और इसने निश्चित रूप से खुद के लिए एक जगह बनाई है। नवोन्मेष को अपना मध्य नाम बनाते हुए और भारतीय परिस्थितियों से मेल खाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिद्ध तकनीक को अपनाते हुए, कंपनी ने अपनी परियोजनाओं में तकनीकी उत्कृष्टता का मिश्रण किया है, जिससे एक अमिट छाप रह गई है।

इसके परिणामस्वरूप, MEIL ने गुणवत्ता से समझौता किए बिना सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में कई इंजीनियरिंग और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से निष्पादित करने में अपनी क्षमताओं को साबित करके खुद को एक अग्रणी स्थिति में रखा है। MEIL ने पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में विभिन्न कंपनियों का अधिग्रहण करके कई गुना वृद्धि की है।

 

MEIL की कुछ प्रमुख परियोजनाएं 

रागेश्वरी गैस टर्मिनल

रागेश्वरी गैस टर्मिनल परियोजना को सात महीने के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। इसे भारत की महत्वपूर्ण तेल और गैस अन्वेषण कंपनियों में से एक, केयर्न के लिए राजस्थान में निष्पादित किया गया था। MEIL ने जटिल परियोजनाओं को क्रियान्वित करने और फास्ट-ट्रैक परियोजनाओं के विस्तार को फिर से परिभाषित करने में अपनी ताकत साबित की है।

आंध्र प्रदेश में नंबुलापुलकुंटा में पीजीसीआईएल के लिए सबस्टेशन

आंध्र प्रदेश में नंबुलापुलकुंता सबस्टेशन एक अल्ट्रा-मेगा सौर ऊर्जा परियोजना है जिसने कंपनी को कई पहचानों से नवाजा है। इस उन्नत सबस्टेशन को पीजीसीआईएल के लिए सात महीने के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया।

 

पट्टीसम – भारत की सबसे तेज नदी एकीकरण परियोजना

परियोजना किसी भी बिजली के ओवरहेड यात्रा क्रेन का उपयोग किए बिना रिकॉर्ड समय में पूरी की गई थी। परिणामस्वरूप, इसने भारत की अब तक की सबसे तेज़ नदी एकीकरण परियोजना के रूप में कई प्रशंसाएँ अर्जित की हैं। इस चुनौतीपूर्ण और समयबद्ध परियोजना का उद्देश्य आंध्र प्रदेश में गोदावरी और कृष्णा को आपस में जोड़ना है।

एनकेएसएल – भारत की पहली नदी-जोड़ परियोजना

नर्मदा-क्षिप्रा-सिंहस्थ-उठान सिंचाई योजना, देश की पहली नदी-जोड़ परियोजना, ने मध्य प्रदेश में मालवा क्षेत्र के पेयजल संकट का समाधान किया। इसने कंपनी की सावधानीपूर्वक योजना और असाधारण निष्पादन कौशल का प्रदर्शन किया।

भारत में लिफ्ट सिंचाई के तहत क्रियान्वित पांच इंटरलिंकिंग परियोजनाएं

कंपनी को देश में पांच नदी जोड़ो परियोजनाओं को क्रियान्वित करने पर गर्व है। ये परियोजनाएं देश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की पानी की जरूरतों को पूरा करती हैं। यह परियोजना लिफ्ट सिंचाई परियोजना के निष्पादन में बेजोड़ मूल शक्ति को प्रदर्शित करती है।

आंध्र प्रदेश में भारत की पहली केंद्रित सौर-तापीय परियोजना

यह परियोजना राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत पहले क्रियान्वित सौर तापीय विद्युत संयंत्रों में से एक है। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में अत्याधुनिक 50-मेगावाट केंद्रित सौर ताप संयंत्र, कार्बन उत्सर्जन में काफी कमी लाएगा।

अपनी तरह का पहला कैनाल-टॉप सोलर प्रोजेक्ट

नर्मदा कैनाल टॉप सौर ऊर्जा परियोजना को विश्व स्तर पर “शीर्ष 100 सबसे नवीन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक” के रूप में मान्यता प्राप्त है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने 2015 में इस परियोजना का उद्घाटन किया था। 5.5 किलोमीटर लंबी इस नहर-शीर्ष परियोजना में 33,800 सौर पैनल हैं और यह पानी को वाष्पित होने से रोकता है।

उन्नत 11,000-मेगावाट-क्षमता वाली मशीनों के माध्यम से पानी पंप करना

कंपनी ने देश में उच्चतम क्षमता वाली मशीनों की स्थापना से जुड़ी कई ऐतिहासिक लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं को क्रियान्वित किया है। अकेले केएलआईपी में, इसने 4,439 मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाली 104 मशीनें स्थापित की हैं।

कालेश्वरम – दुनिया की सबसे बड़ी मल्टी-स्टेज लिफ्ट सिंचाई परियोजना

इस परियोजना की अनूठी विशेषता यह है कि इसने एक नदी की दिशा बदल दी है। एक इंजीनियरिंग चमत्कार के रूप में पहचानी जाने वाली इस बहु-स्तरीय लिफ्ट सिंचाई परियोजना में सबसे जटिल और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कार्य, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और पाइप्ड सिंचाई शामिल है।

पोलावरम में दुनिया का सबसे बड़ा स्पिलवे बैराज

पोलावरम बहुउद्देशीय परियोजना में दुनिया का सबसे बड़ा स्पिलवे है। यह बाढ़ के पानी के 50 लाख क्यूसेक का निर्वहन कर सकता है। यह प्रतिष्ठित परियोजना आंध्र प्रदेश के लोगों के लिए एक जीवन रेखा है।

दुनिया के सबसे बड़े उन्नत तेल रिसाव के निर्माता

कंपनी देश में पहली बार सबसे उन्नत हाइड्रोलिक तकनीक रिग बनाती है। इसके अलावा, ‘मेक-इन-इंडिया’ पहल के तहत, कंपनी ओएनजीसी को उच्च-प्रदर्शन भूमि ड्रिलिंग और वर्कओवर रिग की आपूर्ति कर रही है। ये रिग विश्व स्तर पर सिद्ध तकनीक पर काम करते हैं।

सिंचाई परियोजनाओं में विशाल सुरंगें

टनलिंग में कंपनी की विशेषज्ञता ने कई पुरस्कार जीते। कंपनी ने अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों का उपयोग करते हुए सबसे लंबी सिंचाई सुरंग परियोजनाओं को क्रियान्वित किया है।


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