July 23, 2024 |

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कांग्रेस वर्किंग कमिटी में ओबीसी को नहीं मिला उचित प्रतिनिधित्व

Sachchi Baten

उदयपुर और रायपुर के चिंतन शिविर के संकल्प पर खरी नहीं उतरती दिख रही कांग्रेस

 

नीरज कुमार वर्मा

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अखिल भारतीय काँग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 39 सदस्यीय कांग्रेस वर्किंग कमिटी का 3 दिन पूर्व ऐलान किया। इस सूची में खड़गे सहित राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी, प्रियंका गाँधी, म.प्र. से पूर्व मुख्यमन्त्री दिग्विजय सिंह, कमलेश्वर पटेल का नाम शामिल है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (90) को भी कमेटी में बरकरार रखा गया है। छत्तीसगढ़ से ताम्रध्वज साहू और राजस्थान से सचिन पायलट को जगह मिली है। तीनों राज्यों में इसी साल के आखिर में चुनाव होने हैं। खड़गे ने अपने खिलाफ चुनाव लड़ने वाले शशि थरूर को भी वर्किंग कमेटी में शामिल किया है। सीडब्ल्यूसी में कुल 84 नाम हैं। इनमें सीडब्ल्यूसी मेंबर, स्थायी आमंत्रित,महासचिव, विशेष आमंत्रित और प्रभारियों के नाम शामिल हैं।

सीडब्ल्यूसी मेंबर्स 39,स्थायी आमंत्रित 18,प्रभारी 14,विशेष आमंत्रित 9 पदेन सदस्य 4 सहित कुल 84 सदस्य हैं।
कांग्रेस वर्किंग कमेटी में 5 राज्यों का गणित इस तरह है-मध्य प्रदेश से राजपूत समुदाय से दिग्विजय सिंह और कुर्मी-पटेल समुदाय से आने वाले विंध्य क्षेत्र के ओबीसी नेता रहे स्वर्गीय इंद्रजीत पटेल के बेटे और पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल को सीडब्ल्यूसी में जगह मिली है।

विंध्य क्षेत्र में पटेल समुदाय निर्णायक रहा है। मंदसौर की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाई गई हैं। दिग्विजय कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ में शामिल थे, बाद में मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम पर सहमति बनने के बाद उन्होंने खुद को रेस से अलग कर लिया था। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को सीडब्ल्यूसी में शामिल नहीं किया गया है।

कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि पीसीसी चीफ होने के चलते वे इसमें शामिल नहीं किए गए। खड़गे की कांग्रेस वर्किंग कमेटी में राजस्थान से पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट सहित 7 नेताओं को इसमें जगह दी गई है। सचिन पायलट को जुलाई 2020 के बाद अब पद दिया है। राजस्थान से एक मात्र मंत्री महेंद्रजीत मालवीय को मेंबर बनाया है। कोर सीडब्ल्यूसी के 39 मेंबर में राजस्थान से बनने वाले सदस्यों में सचिन पायलट,पूर्व सांसद जितेंद्र सिंह,जल संसाधन मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय और अभिषेक मनु सिंघवी शामिल हैं।
सीडब्ल्यूसी में छत्तीसगढ़ से केवल ताम्रध्वज साहू का ही नाम है। ताम्रध्वज साहू पार्टी के ओबीसी चेहरा हैं, जिन्होंने साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी लहर में भी दुर्ग लोकसभा से जीत हासिल की थी। आलाकमान के विश्वसनीय अपने शांत और सरल स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। उनका विवादों से दूर-दूर तक नाता नहीं रहा। साहू एआईसीसी में राष्ट्रीय ओबीसी अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

पंजाब से पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को कांग्रेस हाईकमान ने सीडब्ल्यूसी में बतौर मेंबर शामिल किया है। पूर्व सांसद अंबिका सोनी और सांसद मनीष तिवारी को भी जगह दी गई है।हरियाणा से राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्‌डा को सीडब्ल्यूसी में बतौर परमानेंट इन्वायटी शामिल किया है। वहीं, हुड्‌डा गुट के धुर विरोधी रणदीप सिंह सुरजेवाला और कुमारी सैलजा को सीडब्ल्यूसी में बतौर मेंबर जगह दी गई है। हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकीं कुमारी सैलजा इस समय छत्तीसगढ़ की प्रभारी हैं, वहीं रणदीप सुरजेवाला पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं और हाईकमान के बेहद करीबी माने जाते हैं। हाईकमान ने किरण चौधरी को जगह नहीं दी। वे पूर्व मुख्यमंत्री स्व. चौधरी बंसीलाल के परिवार से आती हैं।
उत्तर प्रदेश, बिहार,मध्यप्रदेश हिन्दी पट्टी के प्रमुख राज्य हैं, जहाँ से लोकसभा की 149 सीटें आती हैं। इसी के साथ इस पट्टी में राजस्थान की 25, झारखंड की 14 और छत्तीसगढ की 11 लोकसभा सीटें शामिल हैं। इस तरह मण्डल प्रभावित काऊ या हिन्दी पट्टी में 543 में 199 सीटें सम्मिलित हैं, जो सामाजिक न्याय के मजबूत आधार वाली पट्टी है।लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में मण्डलवाद की इस पट्टी में भाजपा की कमंडल की राजनीति ने पिछड़े दलित वर्ग आधारित अपना दल, निषाद पार्टी, ज़दयू, हम, लोक जनशक्ति पार्टी आदि से गठबंधन अपनी जड़ों को काफी मजबूत कर लिया।

कांग्रेस नेतृत्व ने 39 सदस्यीय जो कांग्रेस वर्किंग कमेटी की घोषणा की, इसमें मात्र 4 लोगों को स्थान मिला है, लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड में पिछड़ों को पूरी तरह नकार कर सामाजिक न्याय को धता बता दिया गया है। उत्तरप्रदेश में 30 फीसद हिन्दू अतिपिछड़ों सहित 54 फीसद से अधिक, बिहार में 32 फीसद अतिपिछङों सहित 52 फीसद ओबीसी हैं। मध्यप्रदेश में पिछड़ों की आबादी 50.09 प्रतिशत, झारखण्ड में 48 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 45-46 प्रतिशत और राजस्थान में 47-48 प्रतिशत है।उत्तरप्रदेश में दलित समुदाय के बृजलाल खाबड़ी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के साथ 2 ब्राह्मण, 1-1 भूमिहार, यादव, कुर्मी, मुसलमान को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया।

दूसरी तरफ 30 प्रतिशत हिन्दू अतिपिछड़ी और अत्यन्त पिछड़ी लोधी, निषाद, बिन्द, कश्यप, कुशवाहा /मौर्य/शाक्य/सैनी, राजभर, चौहान, पाल, प्रजापति, साहू, विश्वकर्मा, नाई/सबिता आदि जातियों को नजरअंदाज कर दिया गया। यही अतिपिछड़ी जातियाँ राजनीतिक दलों का खेल बनाती और बिगाड़ती हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश में भाजपा जो फर्श से अर्श पर पहुँची है, उसमें अतिपिछड़ी जातियों की अहम भूमिका है, लेकिन कांग्रेस 50 फीसदी से अधिक पिछड़ी जातियों को जोड़ने के लिए अभी गम्भीरता नहीं दिखा रही है।
पिछले साल अक्टूबर में पार्टी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 23 सदस्यीय सीडब्ल्यूसी को भंग कर दिया था और उसकी जगह एक 47 सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया था। कांग्रेस पार्टी में वर्किंग कमेटी यानी सीडब्ल्यूसी टॉप एग्जीक्यूटिव बॉडी है। इसका गठन दिसंबर 1920 में कांग्रेस के नागपुर सेशन के दौरान किया गया था। इसकी अध्यक्षता सी. विजयराघवाचार्य ने की थी। पार्टी के संविधान के नियमों की व्याख्या और लागू करने का अंतिम अधिकार सीडब्ल्यूसी के पास ही होता है।
39 सदस्यीय कांग्रेस वर्किंग कमेटी में शशि थरूर अधीर रंजन चौधरी,एके एंटनी,अंबिका सोनी, मीरा कुमार, पी. चिदम्बरम, तारिक अनवर, ललथनहावला, मुकुल वासनिक आनंद शर्मा, अशोकराव चव्हाण, अजय माकन, चरणजीत सिंह चन्नी, शैलजा, गायखंगम, अभिषेक मनु सिंघवी, सलमान खुर्शीद, जयराम रमेश, जीतेन्द्र सिंह, रणदीप सिंह सुरजेवाला, सचिन पायलट, दीपक बाबरिया, जगदीश ठाकोर, जी ए मीर, अविनाश पांडे, दीपा दास मुंशी,
महेंद्रजीत सिंह मालवीय, गौरव गोगोई, सैयद नसीर हुसैन, सुब्बी रामारेड्डी, कमलेश्वर पटेल, के सी वेणुगोपाल आदि को शामिल किया गया है।
ओबीसी का सीडब्यूसी में प्रतिनिधित्व संतोषजनक नहीं
कांग्रेस ने अपने उदयपुर के 3 दिवसीय चिंतन शिविर और रायपुर अधिवेशन में ओबीसी, एससी, एसटी, अल्पसंख्यक वर्ग को संगठन व टिकट वितरण में हर स्तर पर 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का संकल्प लिया था। देश में हिन्दू ओबीसी की आबादी लगभग 50 प्रतिशत, एससी 15 और एसटी 8 प्रतिशत से अधिक हैं। वहीँ अल्पसंख्यक वर्ग की आबादी 17 प्रतिशत से अधिक है। 39 सदस्यीय काँग्रेस वर्किंग कमेटी में शामिल नामों को देखा जाय तो कांग्रेस अभी भी ओबीसी की जातियों के प्रति गम्भीर नहीं है। ओबीसी वर्ग के तौर पर ताम्रध्वज साहू, सचिन पायलट, कमलेश्वर पटेल, जगदीश ठाकोर का नाम साफ है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अपनी मध्यप्रदेश की सभा में बताया था कि 6 ओबीसी को सीडब्ल्यूसी में स्थान दिया गया है, तो क्या 39 में 6 ओबीसी को स्थान देना सामाजिक न्याय के अनुकूल है? लाख कोशिशों के बाद भी काँग्रेस ओबीसी को जोड़ने का सार्थक प्रयास करती नहीं दिख रही है। सामाजिक न्याय चिन्तक और भारतीय ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता लौटन राम निषाद ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी पर प्रतिक्रिया स्वरूप कहा कि ज्यादा नहीं तो 12 से 15 ओबीसी सदस्यों को हिस्सेदारी देनी चाहिए थी। हिन्दी पट्टी के राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड जैसे मण्डल प्रभावित सामाजिक न्याय के क्षेत्र हैं और इन राज्यों में 126 लोकसभा के क्षेत्र शामिल हैं, पर एकमात्र पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को बिहार से इस सूची में स्थान दिया गया है।

ओबीसी को बिल्कुल नकार दिया गया है। काऊ बेल्ट के नाम से जाने जाने वाले यूपी, बिहार, झारखंड में ओबीसी की बहुत बड़ी संख्या पायी जाती है, जिसमें यादव, निषाद, कुर्मी पटेल, कोयरी मौर्य कुशवाहा प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में लोधी बड़ी संख्या वाली जाति है। लौटन राम निषाद का कहना है कि कांग्रेस की 4 राज्यों में अपनी सरकार है,  जिसमें अशोक गहलोत (राजस्थान), भूपेश बघेल (छत्तीसगढ़) और सिद्धा रमैया (कर्नाटक) ओबीसी हैं। उनका कहना था कि जो कुछ सांगठनिक त्रुटियां हैं, समय पर सही हो जाएंगी। संविधान का सम्मान तभी है जब सभी वर्ग को अनुच्छेद-15(4),16(4),16(4-1) के अनुसार उचित प्रतिनिधित्व देने का ईमानदारी से प्रयास किया जाए।
ओबीसी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि कांग्रेस ने 3 दिवसीय उदयपुर चिंतन शिविर में जो संकल्प लिया था, उसे राज्यसभा चुनाव में ही तोड़ दिया। कांग्रेस ने जिन 11 नेताओं को राज्यसभा में भेजा,
उसमें 5 ब्राह्मण सहित 9 सवर्ण थे। उनका साफ तौर पर कहना है कि राहुल गाँधी जी की लाख कोशिशों के बाद भी कांग्रेस ईमानदार तरीके से खुलकर पिछड़ी जातियों को उचित स्थान और सम्मान नहीं दिया, तो मंडलवादी हिन्दी पट्टी (मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश,बिहार, झारखंड) में अपना आधार मजबूत नहीं कर पायेगी।

कांग्रेस ने हिन्दी भाषी मण्डलवाद प्रभावित राज्यों में ओबीसी की जातियों को तवज्जो नहीं दिया तो कांग्रेस का पुरसाहाल नहीं होगा। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 34-35 फीसद आबादी वाली कोयरी, काछी, मौर्य, सैनी, कुशवाहा, राजभर, चौहान, लोधी, प्रजापति, नाई, विश्वकर्मा आदि को पूरी तरह नकार कर चल रही है। जो उसके लिए चिंतन करने की बात है।

(लेखक सामाजिक व राजनैतिक विश्लेषक हैं।)


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