July 23, 2024 |

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ऐ चीन ! आंख दिखाओ बाद में, पहले देख लो यह सीन

Sachchi Baten

द्वितीय विश्वयुद्ध में मारे गए चीन के सैनिकों की कब्रों का सम्मान करते हैं भारतीय

झारखंड के रामगढ़ जिला के बुजुर्ग जमीरा की जमीन में दफन हैं 670 चीनी सैनिकों के शव

यह चाइना कब्रिस्तान झारखंड में है प्रमुख पर्यटन स्थल, देखने आते हैं दूर-दूर से लोग

झारखंड से लौटकर राजेश पटेल

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बात-बात में भारत की सीमा की ओर आंख दिखाने वाले चीन को अपना अतीत व भारतीयों का उसके पुरखों के प्रति प्रेम को पहले देखना चाहिए। लेकिन लात के देवता बात से मानते कहां है। झारखंड के रामगढ़ जिला मुख्यालय के करीब चार किलोमीटर की दूरी पर बुजुर्ग जमीरा गांव की बस्ती में 670 चीनी सैनिकों के शव दफन हैं। भारतीय उस स्थल को पूरा सम्मान देते हैं। और तो और, वह स्थल झारखंड के एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाने लगा है।

इन सैनिकों की मौत 1939-1945 तक चले द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुई थी। इस युद्ध के लिए चीन के लगभग एक लाख सैनिक भारत आये थे। इस दौरान सितंबर 1942 से अक्टूबर 1943 के बीच लगभग 13 माह तक सैनिकों को युद्ध की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी। ट्रेनिंग के क्रम में ही कई सैनिकों की मौत हो गई थी।

 

बताया जाता है कि सैनिकों के मौत के बाद बरकाकाना-पोचरा के निकट बुजुर्ग जमीरा गांव में मेजर जनरल यांग समेत 670 सैनिकों को दफनाया गया था। उस स्थल का नाम चाइना कब्रिस्तान रखा गया। कब्रिस्तान में जो बड़े कब्र हैं, वे सैन्य अधिकारियों के हैं। छोटे कब्र साधारण सैनिकों के हैं। प्रत्येक वर्ष मार्च और सितंबर माह के ताइवान सैनिक डे के अवसर पर चाइना कब्रिस्तान में अपने सैनिकों को श्रद्धांजलि देने परिजन और राजनयिक यहां आते हैं।


भारत में चीनी सैनिकों के कब्र तीन स्थानों पर दफनाए गए हैं। इनमें से एक कब्रिस्तान  बुर्जुग जमीरा के समीप चाइना कब्रिस्तान के रूप में आज भी विद्यमान है। भारत में रामगढ़ के अलावा अरुणांचल प्रदेश और असम में भी इस तरह के कब्रिस्तान हैं।

द्वितीय विश्व युद्ध में पूर्वी चीन में चियांग काई शेक राजा थे। माओ अस्ते तुंग ने लाल सेना बना कर उनका विरोध किया था। द्वितीय विश्व युद्ध के समय माओ व चियांग में समझौता हुआ था, जिसके तहत माओ की लाल सेना व चियांग की सेना ने मिल कर युद्ध करने का निर्णय लिया था।

यहां चालाकी दिखाते हुए जहां सबसे अधिक खतरा था, वैसे स्थानों पर चियांग की सेना को  भेज गया। चियांग की सेना पूरे विश्व में अधिक संख्या में मारी गई थी। इससे चियांग काफी कमजोर हो गए। इसके बाद माओ ने चीन की सत्ता पर कब्जा कर लिया और बाद चियांग ताइवान चले गये, जहां उनकी मौत हो गई।

बुज़ुर्ग जमीरा में चियांग काई शेक के सैनिकों की कब्रें हैं। ताइवान सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा यहां आकर शहीद सैनिकों की कब्रों के पास उनकी याद में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।


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