July 24, 2024 |

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अब पल्लवी पटेल भी बनेंगी एनडीए का हिस्सा ?

Sachchi Baten

यूपी में कुर्मी राजनीति के मौजूदा मठ पर ही कब्जा करने की मोदी की कोशिश

-डॉ. पल्लवी पटेल ने चुनाव में सपा उम्मीदवारों को वोट देने से किया साफ मना

-विस चुनाव में डिप्टी सीएम केशव मौर्य को हराने वाली पल्लवी हैं तकनीकी रूप से सपा विधायक

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। डॉ. पल्लवी पटेल ने राज्यसभा के लिए हो रहे चुनाव में सपा उम्मीदवारों को वोट देने से मना कर दिया है। कहा कि उम्मीदवारों का चयन पीडीए के सिद्धांत के विपरीत है। डॉ. पटेल अपना दल कमेरावादी की नेता हैं। तकनीकी रूप से समाजवादी पार्टी की विधायक हैं। विधानसभा चुनाव में वह सपा के सिंबल पर सिराथू से उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को हराकर विधायक बनी थीं।

उनकी इस मनाही को क्या समझा जाए… परिवार के किसी सदस्य को राज्यसभा में भेजना चाहती थीं ? बरास्ते नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई संदेश ? इसके अलावा कोई तीसरा कारण समझ में नहीं आता।

डॉ. पल्लवी पटेल की छोटी बहन अनुप्रिया पटेल 2014 से ही एनडीए के साथ हैं। पल्लवी देख रही हैं कि छोटी पार्टी को चलाने और बढ़ाने के लिए सत्ता का सहयोग कितना आवश्यक है। अनुप्रिया पटेल का अपना दल एस कहां से कहां पहुंच गया। उत्तर प्रदेश में इसे क्षेत्रीय दल का दर्जा भी मिल गया।

पल्लवी पटेल और अनुप्रिया पटेल की मां श्रीमती कृष्णा पटेल के अपना दल कमेरावादी तमाम झंझावातों में ही उलझा हुआ है। कई बार आत्मसमर्पण किया। कांग्रेस के सिंबल पर भी चुनाव लड़ना पड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। पल्लवी पटेल के रूप में इस पार्टी काे एक विधायक मिला भी तो वह समाजवादी पार्टी के सिंबल के माध्यम से। कहा जा सकता है कि अपना दल कमेरावादी का कोई प्रतिनिधित्व किसी सदन में नहीं है। इसको लेकर काफी व्यंग्य भी कसे जाते हैं। शायद यही तड़प उन्हें सता रही है। वह भी चाहती होंगी कि छोटी बहन अनुप्रिया पटेल की पार्टी की तरह उनके दल का भी विस्तार हो। विधानसभा में उनके एमएलए हों। लोकसभा और राज्यसभा में सांसद हों। लेकिन यह सब संभव कैसे होगा।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयास में विपक्षी गठबंधन इंडिया बना तो अपना दल कमेरावादी की अध्यक्ष कृष्णा पटेल भी बंगलुरू की बैठक में शामिल थीं। इस गठबंधन से विपक्ष को काफी उम्मीद थी, लेकिन जैसे-जैसे यह गठबंधन छितराता गया, उम्मीदें टूटती गईं।

जब जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार और इनके बाद राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष जयंत चौधरी भी एनडीए के खेमा में आ गए तो रही-सही आस भी समाप्त हो गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डॉ. पल्लवी पटेल अपनी मां कृष्णा पटेल को राज्यसभा भेजना चाहती थीं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव नहीं माने। उन्होंने जया बच्चन और आलोक रंजन को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इधर से नीतीश कुमार का दबाव था, सो एक झटके में बोल दिया कि वह सपा के उम्मीदवारों को वोट नहीं देंगी।

यह भी पता चला है कि अपना दल कमेरावादी अध्यक्ष कृष्णा पटेल को लोकसभा का टिकट देने का एनडीए ने भरोसा दिया है। टिकट मिला और यदि कृष्णा पटेल जीत जाएंगी तो उनकी पार्टी में नए उत्साह का संचार होगा। तमाम प्रलोभनों, सत्ता प्रायोजित धमकियों के बावजूद जो भी कार्यकर्ता इस दल से जुड़े हैं, कहें तो उनकी एक तरह से अंतिम इच्छा ही यही है कि कुर्मी राजमाता कम से कम एक बार किसी सदन में सदस्य बन जाएं।

माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में सपा उम्मीदवारों को वोट देने की यह मनाही एनडीए की ओर पहला कदम है। आश्चर्य नहीं होगा, जब किसी दिन यह घोषणा सुनने को मिलेगी कि नरेंद्र मोदी के देश के विकास के कार्यों से प्रभावित होकर अपना दल कमेरावादी एनडीए गठबंधन का अंग होगा। इसमें पल्लवी की विधानसभा सदस्यता भी जाने का खतरा नहीं है। सपा के विरोध में बोलती रहेंगी। उसे पिछड़ा, दलित व अल्पसंख्यक या अगड़ा विरोधी बताती रहेंगी। ज्यादा से ज्यादा समाजवादी पार्टी उनको दल से निष्कासित कर सकती है। विधायक वह बनी रहेंगी। ज्यादा कुछ होगा तो विधानसभा अध्यक्ष संभाल लेंगे।

उत्तर प्रदेश में अनुप्रिया पटेल निर्विवाद रूप से कुर्मी नेता के रूप में पहचान बना चुकी हैं। पल्लवी पटेल भी हैं कुर्मी नेता ही, लेकिन इनका दायरा अपनी छोटी बहन अनुप्रिया पटेल की अपेक्षा काफी सीमित है। लेकिन भाजपा का नारा है इस बार चार सौ पार। मोदी को 370 सीट तो चाहिए ही चाहिए। इसका जिक्र वह बार-बार अपने भाषणों में करते हैं। इसके लिए जब बड़बोले ओपी राजभर को झेला जा सकता है तो पल्लवी पटेल को क्यों नहीं। इक्का-दुक्का ही सही, इनके फॉलोवर पूरे प्रदेश में हैं।

समझा जा रहा है कि नीतीश कुमार की मध्यस्थता में एनडीए से बात बन गई है। तभी पल्लवी पटेल ने यह झटका अखिलेश को दिया है। पल्लवी का यह झटका जयंत से भी तगड़ा साबित होगा। पल्लवी पटेल एनडीए में जिस दिन शामिल हो जाएंगी, उस दिन से कुर्मी राजनीति की अगुवाई करने वाला पूरा परिवार ही मोदी की जय बोलने लगेगा। अभी तक कृष्णा पटेल और बेटी पल्लवी पटेल सामाजिक न्याय, महंगाई सहित तमाम मुद्दों पर मोदी के खिलाफ मुखर रही हैं। उत्तर प्रदेश की कुर्मी राजनीति इसी परिवार के इर्द-गिर्द है। जब पूरा परिवार मोदी के साथ हो जाएगा तो मान लिया जाएगा कि सभी कुर्मी मोदी को ही वोट देंगे। मोदी जी भी यहां चाहते हैं। उनको भी तो बनारस से चुनाव लड़ना है। बनारस में कुर्मी मतदाताओं की ताकत से वह बखूबी वाकिफ हैं।


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