July 24, 2024 |

BREAKING NEWS

- Advertisement -

‘गीता’ के साथ अब रामधुन गाएंगे ‘कोड़ा’ तो दाग सारे धुल जाएंगे

Sachchi Baten

हजारों करोड़ के घोटाले के आरोपी झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की सांसद पत्नी गीता कोड़ा भाजपा में शामिल

-झारखंड का मुख्यमंत्री रहते लगे थे मनी लांड्रिग, आय से अधिक संपत्ति सहित कई आरोप

-आरोप लगाने वालों में सबसे आगे थे भाजपाई ही, 2014 के विधानसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी ने चाईबासा की सभा में खुद की थी टिप्पणी

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। भाजपा की वॉशिंग मशीन में धुल कर 26 फरवरी को एक और महाभ्रष्ट (आरोप भाजपा के ही) संत बन गया। बात हो रही है हजारों करोड़ के घोटाले के आरोपी मधु कोड़ा की सांसद पत्नी गीता कोड़ा भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गईं। अब मधु कोड़ा के दामन पर लगे भ्रष्टाचार के दाग धुल गए। मधु कोड़ा के खिलाफ बोलने वाले को अब शायद देशद्रोही मान लिया जाएगा।

रांची में स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के साथ प्रेस को संबोधित करतीं सांसद गीता कोड़ा।

 

आइए जानते हैं मधु कोड़ा के बारे में विस्तार से

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर विधानसभा के अंतर्गत गांव पाताहातु में इनका जन्म हुआ। गुवा में स्थित सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की खदान में काम करते थे। भारतीय मजदूर संघ के नेता के रूप में मजदूरों के हित के लिए कई आंदोलन किए। इनकी लोकप्रियता अब भी गरीबों व मजदूरों के बीच बरकरार है। 2000 के विधानसभा चुनाव में कोड़ा जगन्नाथपुर विधानसभा से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर विधायक बने। इस विधानसभा के कार्यकाल में वह राज्य सरकार में मंत्री भी रहे। इसके बावजूद 2005 के चुनाव में पार्टी ने इनको टिकट नहीं दिया।

भाजपा से टिकट नहीं मिला तो निर्दल ही मैदान में कूद पड़े। भारी मतों के अंतर से जीत भी गए। 81 विधायकों वाली विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी बहुमत से पीछे रह गई तो निर्दलीयों ने सरकार बनाने में साथ दिया। सरकार को समर्थन देने वाले निर्दलीयों में मधु कोड़ा भी शामिल थे। मंत्री भी बना दिए गए।

एक सड़क ने बना दिया बागी, सरकार से वापस लिया समर्थन, बन गए सीएम

इनके ही विधानसभा क्षेत्र में हाटगम्हरिया से बरायबुरू मार्ग की स्थिति उन दिनों ऐसी थी कि बाइक से चलना भी मुश्किल होता था। करीब 40 किलोमीटर का सफर तय करने में तीन से चार घंटे लग जाते थे। एक-एक फीट धूल। बरसात हो जाने पर यही धूल कीचड़ बन जाती थी। जगन्नाथपुर विधानसभा की जीवन रेखा कही जाने वाली इस सड़क की दुर्दशा के चलते क्षेत्र में काफी किरकिरी हो रही थी। लोग कहने लगे थे कि यह सड़क नहीं बनी तो अगला चुनाव जीतना मुश्किल हो सकता है। लिहाजा चुपके से सभी निर्दलीय विधायकों ने मंत्रणा की और अचानक गायब हो गए। सप्ताह भर बाद लौटे तो सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा की और कांग्रेस, राजद तथा झामुमो के सहयोग से नई सरकार बनी, जिसका मुखिया मधु कोड़ा को बनाया गया।

भाजपा विधायक सरयू राय ने खोल दिया कोड़ा के खिलाफ मोर्चा

सबकुछ ठीक चल रहा था। इसी बीच प्रमुख इस्पात कंपनी उषा मार्टिन के लिए कोयला खदान की लीज को लेकर कुछ अनबन हुई। उषा मार्टिन ग्रुप का एक अखबार भी है। ह्विसिल ब्लोअर के रूप में सामने आए भाजपा विधायक सरयू राय नित नए दस्तावेजी आरोप लगाने लगे। अखबारों में इन आरोपों की खबरें छपने लगीं। कोड़ा और उनकी सरकार के प्रति पब्लिक का नजरिया बदलने लगा। अखबारों की कतरनों तथा कुछ और दस्तावेजों के साथ हाईकोर्ट में सीबीआइ जांच के लिए जनहित याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने सीबीआइ जांच का आदेश दे दिया। इसके पहले झामुमो द्वारा समर्थन वापस ले लिए जाने से कोड़ा सरकार गिर गई थी। झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन मुख्यमंत्री बने। 2009 के चुनाव में सिंहभूम संसदीय क्षेत्र से मधु कोड़ा ने निर्दलीय लड़कर भारी मतों के अंतर से कांग्रेस के दिग्गज नेता बागुन सुम्बरुई को हरा दिया।

2009 के विधानसभा चुनाव के पहले मधु कोड़ा ने जय भारत समानता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस पार्टी के टिकट पर कई प्रत्याशी चुनाव लड़े। चुनाव प्रचार अभियान के दौरान ही मधु कोड़ा की गिरफ्तारी कर ली गई। फिर ईडी, सीबीआइ, आयकर, निगरानी सभी की जांच एक साथ शुरू हो गई। चुनाव में जगन्नाथपुर विधानसभा से जयभारत समानता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में लड़ रहीं गीता कोड़ा को जीत मिली, अन्य प्रत्याशी हार गए। मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा हैं। कोड़ा लंबे समय तक जेल में रहे। इस बीच चुनाव आयोग ने उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी।

2014 के विधानसभा चुनाव में भी गीता कोड़ा जय भारत समानता पार्टी के टिकट पर ही दोबारा जीतीं। 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले वह कांग्रेस में शामिल हो गईं। सिंहभूम संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा तथा भाजपा सांसद लक्ष्मण गिलुआ को शिकस्त दी। मधु कोड़ा की लोकप्रियता इस कदर है कि खुद लोकसभा का चुनाव निर्दल जीते, पत्नी को दो-दो बार विधायक बनवाया और 2019 में भाजपा की प्रचंड लहर में जब बड़े-बड़े शूरमा उड़ गए, तब भी कोड़ा का पैर अंगद की तरह सिंहभूम में जमा रहा। और, अपनी पत्नी गीता कोड़ा को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जितवा दिया।

जिस पर इतने मुकदमे हों, जेल से बाहर भी उसे चैन नहीं मिलती। आज इसकी पेशी तो कल उसकी। चुनाव आयोग का मामला अलग से। कोड़ा भी इन सबसे मुक्ति चाहते थे। जैसा कि हर कोई चाहता है। इधर सीबीआइ और ईडी का कहर देखकर वह और परेशान हो गए थे। सूत्रों के अनुसार जो खबरें निकल कर आ रही हैं, उनके अनुसार कोड़ा पर काफी दबाव था। पहले से ही कई आरोप झेल रहे कोड़ा को डर था कि फिर कोई परेशानी न सामने आए। बेटी नागी कोड़ा भी बड़ी हो गई है।

लिहाजा सेफ जोन के रूप में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में अपनी सांसद पत्नी गीता कोड़ा को शामिल करा दिया। पत्नी के शामिल होने का मतलब ही है उनका भी शामिल होना। अब जब तक केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार रहेगी, उनको कोई डर नहीं होगा। हालांकि वह पहले से नहीं डरते हैं। हर संकट का डटकर मुकाबला किया। हो आदिवासी समुदाय से आने के कारण उनमें साहस गजब का है। लेकिन उम्र भी कोई चीज होती है। लड़ाई एक उम्र तक की जा सकती है। ढलान पर शांति चाहिए। शांति के लिए आज के समय में जरूरी है रामधुन।

 

 

 

 


Sachchi Baten

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.