July 16, 2024 |

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ग्राउंड जीरो से…लहुरियादह के लोगों के दिल से कोई माई का लाल नहीं हटा सकता दिव्या मित्तल को

Sachchi Baten

सच्ची बातें…

अपने गांव के लिए ‘भगीरथ’ को याद कर रुआंसे हो जा रहे हैं ग्रामीण

-गांव के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में है दिव्या मित्तल के ट्रांसफर के खिलाफ गुस्सा

-जल ही जीवन है तो ग्रामीणों की दिव्या मित्तल ने बदल डाली जीवन शैली

-आजादी के 76 साल बाद नल से पानी आने से कुंआरों में बढ़ गई शादी की उम्मीद

-टैंकर से पानी का इंतजाम करने में ग्राम प्रधान पर हो गया है 20 लाख का कर्ज

 

राजेश पटेल/राजेश कुमार दुबे, लहुरियादह (हलिया-मिर्जापुर)। मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहीं दिव्या मित्तल को जिले से भगा जरूर दिया गया।  लेकिन, वह अभी भी लहुरियादह गांव के ग्रामीणों के दिल में बैठी हैं। वहां से तो इनको कोई माई का लाल निकाल ही नहीं सकता। क्योंकि ग्रामीण मानते हैं कि दिव्या मित्तल के ही प्रयास से उनके घर के दरवाजे तक चलकर पानी आया है, जिसके लिए कभी-कभी पूरा दिन खर्च कर करना पड़ता था। यदि जल ही जीवन है तो दिव्या मित्तल जीवनदायिनी हैं।

सच्ची बातें की टीम 8 सितंबर शुक्रवार को लहुरियादह गांव में पहुंची थी। मिर्जापुर से रीवा जाने वाले फोरलेन मार्ग पर यह गांव हनुमना घाटी के ऊपर है। यह हलिया ब्लॉक तथा देवहट ग्राम पंचायत में आता है। यह मिर्जापुर जनपद तथा उत्तर प्रदेश की आखिरी ग्राम पंचायत है।

इस गांव में कोल, यादव, धइकार जाति के करीब डेढ़ सौ घर हैं। जितना देखा, एक भी पक्का मकान नहीं देखा। सब के सब कच्चे। शिक्षा के स्तर की हालत ऐसी कि छह साल या इससे ऊपर के अधिकतर बच्चों का विद्यालय में नामांकन ही नहीं। किशोरवय के भी आधे से ज्यादा सिर्फ कक्षा पांच पास। आठ या उससे ऊपर की शिक्षा प्राप्त बमुश्किल एक दर्जन होंगे। इसका मुख्य कारण यहां की गरीबी तथा मिडिल स्कूल का दूर होना है।

ग्रामीणों के अनुसार डीएम के रूप में दिव्या मित्तल बीते साल दो नवंबर को इस गांव में आई थीं। उनको यहां के पेयजल के संकट से अवगत कराया गया। मिडिल स्कूल न होने से बच्चों की पढ़ाई भी न होने की जानकारी दी गई। ग्रामीणों ने बताया कि उस दिन यहां की स्थिति देखकर दिव्या मित्तल काफी भावुक हो गई थीं। उन्होंने ग्रामीणों को वचन दिया कि उनके दरवाजे तक पानी एक निश्चित समय सीमा के अंदर पहुंचाएंगी।

हालांकि इसके पहले भी कई बार इस गांव में पानी पहुंचाने के लिए योजनाएं बनीं। लाखों रुपये खर्च हुए, लेकिन पानी नहीं पहुंचा। केंद्र सरकार द्वारा संचालित जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल जल योजना के माध्यम से इस गांव में पानी पहुंचाने की कवायद शुरू हुई। इसके लिए बाहर से भी विशेषज्ञ बुलाए गए। डीएम ने लगातार इस पर नजर रखी। अंततः डीएम का भगीरथ प्रयास सफल हुआ। इस गांव के हर घर के दरवाजे पर नल लग गया। इसकी टेस्टिंग के लिए बीते 30 अगस्त को छोटा सा पूजन कार्यक्रम करके डीएम ने नल की टोटी खोल दी। नल से पानी गिरा तो ग्रामीणों के लिए मानो जीवन मिल गया। सभी ने उनकी जय-जयकार की।

इसके अगले ही दिन उनका बस्ती के लिए ट्रांसफर कर दिया गया। फिर इस ट्रांसफर को निरस्त कर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया। इसके बाद राजनैतिक कवायद के तहत जो लेटर वायरल किए गए, उसकी जिले में काफी चर्चा अभी भी हो रही है।

 

क्या कहते हैं लहुरियादह के लोग

कक्षा नौ तक पढ़े धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि हर चुनाव के समय पानी की व्यवस्था के लिए मांग की जाती है, सभी प्रत्याशी वादा भी करते हैं। लेकिन चुनाव के बाद सभी भूल जाते हैं। पानी लाने के लिए पांच सौ मीटर दूर जंगल में झरना के पास जाते थे। रात में भी जाना पड़ता था। सांप-बिच्छू का भी डर बना रहता था। डीएम दिव्या मित्तल और ग्राम प्रधान कौशलेंद्र के प्रयास से इस गांव में पानी आया है। इन दोनों के प्रयास को यहां के लोग मरते दम तक नहीं भूल सकते।

करीब 16 साल की छोटी ने स्कूल का मुंह नहीं देखा है। बचपन से ही उसे पानी लाने से ही फुर्सत नहीं मिलती थी। बताती हैै कि पूरा दिन उसे पानी के इंतजाम में ही लगा रहना पड़ता था। अब दरवाजे पर नल लग गया है।

बुजुर्ग चमेलिया देवी कहती हैं कि पहले रात भर झरना पर रहना पड़ता था। लोटा-गिलास आदि से डिब्बा में पानी भरते थे। डीएम धर्म कमा कर गई हैं। उनके साथ गलत हो गया। डीएम को बहुत कुछ मानते हैं।

मौजी लाल ने बताया कि पिल्लू प्रधान व मैडम डीएम साहब के प्रयास से नल से पानी आया है। एक दिन ही पानी आया। अब नहीं आ रहा है। उनके ट्रांसफर से हम लोग दुखी हैं।

सुदामा का कहना है कि डीएम के ट्रांसफर से पूरे गांव के लोग नाराज हैं। क्योंकि डीएम ने हम लोगों को जीवन दिया। वह इस गांव के लोगों को जीवित करके गई हैं।

कई लड़के हैं शादी लायक, लेकिन रिश्ते नहीं आ रहे

इस गांव में कई लड़के शादी लायक हैं, लेकिन पानी न होने के कारण रिश्ते नहीं आ रहे हैं। अब नल से जल आ जाने से इनमें शादी की उम्मीद जग गई है। लड़की वाले इसलिए रिश्ता लेकर नहीं आते हैं कि उनकी बेटी को पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।

नल से पानी कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगा और मुख्य पाइप लाइन ही तोड़ दी

लहुरियादह में नल से पानी का पहुंचना कुछ लोगों को रास नहीं आया। ऐसे असामाजिक तत्वों ने मुख्य पाइप लाइन को ही क्षतिग्रस्त कर दिया। नतीजतन सिर्फ एक दिन नल से पानी इस गांव में आ सका। इसके बाद फिर से वहीं टैंकर प्रणाली शुरू हो गई। 36 घंटे के लिए एक व्यक्ति को 15 लीटर पानी मिलता है। यानि 12 घंटे के लिए पांच लीटर।

पानी का इंतजाम करने में 20 लाख के कर्जदार बन गए हैं प्रधान

ग्राम प्रधान कौशलेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि जिलाधिकारी दिव्या मित्तल उनके गांव के लिए भगीरथ बन कर आईं। 75-76 साल के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से इस गांव में पानी का इंतजाम करने के लिए हजारों बार कहा गया होगा। लेकिन सभी से सिर्फ आश्वासन मिला। जब दिव्या मित्तल डीएम बनकर आईं तो उनसे भी गुहार लगाई गई। वह पैर में चोट के बावजूद इस गांव में आईं। उन्होंने इस गांव में पानी के सपने को हकीकत में बदलने का काम किया है।

पानी की समस्या इस कदर है कि इसके चलते गांव के अन्य विकास कार्य बाधित हो रहे हैं। ग्राम पंचायत निधि की सारी राशि पानी का इंतजाम करने में ही खर्च हो रही है। विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से निवेदन किया गया, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। जब से वह पंचायत के प्रधान बने हैं, पानी का इंतजाम करने में 20 लाख रुपये से द्यादा कर्ज हो गया है। दिव्या मित्तल देवी के अवतार के रूप में आईं और पानी पहाड़ के ऊपर पहुंचा दिया।

प्रधान कौशलेंद्र कुमार गुप्ता ने पंपलेट प्रकाशित करवाकर गांव वालों की तरफ से आइएएस दिव्या मित्तल का आभार जताया है।

 

पानी की कहानी

ग्रामीणों के अनुसार करीब 200 फीट नीचे स्थित झरना से गर्मी के दिनों कम पानी गिरता है। करीब एक घंटे में 15 लीटर पानी जुट पाता है। गर्मी में पानी के लिए झरने के पास लाइन लगती है। अन्य काम छोड़कर परिवार के एक सदस्य की ड्यूटी झरने पर ही लगानी पड़ती है। कभी-कभी रात में वहीं सोना भी पड़ता है। हटने का मतलब नंबर कटना। आज स्थिति बदल गई है। भले ही असामाजिक तत्वों ने पाइप लाइन क्षतिग्रस्त करके पानी की आपूर्ति को रोकने का काम किया है, लेकिन इसकी मरम्मत तो होगी ही और नलों में पानी आएगा। नल से गिरने वाले हर बूंद के साथ ग्रामीण दिव्या का नाम जपेंगे। प्रधान ने तो कह ही दिया कि वह देवी के अवतार के रूप में इस गांव में आई थीं। असंभव को संभव कर दिखाया।

गांव से सच्ची बातें की टीम के वापस होते समय ग्रामीणों के एक समूह ने दिव्या मित्तल जिंदाबाद के नारे लगाए, जो पानी के रूप में जीवन पहुंचाने वाले के प्रति कृतज्ञता का भाव है और उनको इस जिले से भगाने में भूमिका निभाने वालों के गाल पर थप्पड़ भी।

 

 

 

 

 

 


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