July 16, 2024 |

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नौतपा की बारिश किसानों को खरीफ की खेती के समय रुला सकती है, जानिए कैसे…

Sachchi Baten

 नौतपा में बारिश का मतलब मानसून के सीजन में आसमान की ओर टकटकी

महाकवि कृषि पंडित घाघ ने भी कहा है ‘जेठ मास जो तपै निरासा, तब ही जानो बरखा की आसा’

25 मई से दो जून तक के समय को कहा जाता है नौतपा, सूर्य रहते हैं रोहिणी नक्षत्र में

चैत में भी जमकर बारिश हुई, वैशाख में भी अब जेठ की बरसात से किसानों के लिए चिंता की बात

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। 26 मई शुक्रवार को बारिश जमकर हुई। साथ में वृक्षों के जड़ से उखाड़ने के आतुर आंधी भी। मौसम सुहाना बेशक हो गया, लेकिन खेती के लिहाज से यह ठीक नहीं है। कृषि पंडित घाघ ने भी कहा है ‘जेठ मास जो तपै निरासा, तब ही जानो बरखा की आसा’। उनकी ही एक और कहावत है ‘एक बूंद जो चैत परै, सहस्त्र बूंद सावन हरे।’ इस साल चैत में बारिश हुई, वैशाख में और जेठ में भी हो रही है। वह भी नौतपा में। घाघ की कहावतों के सही माना जाए तो इस साल मानसून में बारिश की स्थिति ठीक नहीं ही है। सही न मानने का कोई कारण नहीं है।

कब होता है नौतपा

नौतपा हर साल 25 मई से दो जून तक होता है। 25 मई को सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं। उसी समय से नौतपा शुरू हो जाता है। यह नौतपा नौ दिन का होता है। 25 मई से दो जून तक के समय को नौतपा कहते हैं।

मई के अन्य दिनों में यदि गर्मी कम भी पड़े तो कोई बात नहीं, लेकिन आने वाले मानसूनी सीजन में अच्छी बरसात के लिए नौतपा में प्रचंड गर्मी का पड़ना जरूरी माना जाता है।

नौतपा में पड़नी चाहिए प्रचंड गर्मी

खगोल विज्ञान के अनुसार नौतपा के दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधी लंबवत् पड़ती हैं। सूर्य भी आम दिनों की अपेक्षा अधिक समय तक रहता है। इस वजह से तापमान काफी बढ़ जाता है। मौसम विज्ञान के अनुसार नौतपा में वर्षा होने की स्थिति में मानसून कमजोर होने का कारण नहीं मानता, लेकिन इससे मानसून के आगमन की तीव्रता जरूर प्रभावित होती है। दरअसल जब तापमान चरम पर होता है, तब दक्षिण-पश्चिम मानसून के तहत चलने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं समुद्र की तरफ से पूरे वेग से आगे बढ़ती हैं। इससे मानसून तेज गति से आगे बढ़ता है।

घाघ की कहावतों को सही न मानने का कोई कारण नहीं

यह तो हुई मौसम विज्ञान विभाग की बात। अब घाघ पर आते हैं। महाकवि घाघ ने भी अपनी कहावतों के माध्यम से मौसम की सटीक भविष्यवाणी की है। उनकी कहावतों को आधार माना जाए तो आने वाला मानसून का सीजन किसानों व किसानी के लिए उपयुक्त नहीं समझा जा रहा है। उन्होंने कहा है कि एक बूंद जो चैत परै, सहस्त्र बूंद सावन हरै।

मतलब एक बूंद भी बारिश यदि चैत में होती है तो उसके बाद आने वाले सावन में हजार बूंद कम बारिश होगी। इसी तरह से उन्होंने कहा है कि जेठ मास जो तपै निरासा, तब ही जानो बरखा की आसा। मतलब अच्छी बारिश के लिए जेठ में गर्मी पड़ना जरूरी है। इस साल न चैत में गर्मी पड़ी, न वैशाख में, जेठ में पड़नी शुरू हुई ही थी कि नौतपा में बारिश हो रही है।

देश के कई हिस्सों में भारी बर्फबारी भी हुई है। लिहाजा किसानों के लिए चिंता की बात तो है ही।

 

 

 

 


Sachchi Baten

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