July 24, 2024 |

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निकाय चुनाव 2023 : एक किन्नर ने धूल चटाई भाजपा के सूरमाओं को, जानिए कहां…

Sachchi Baten

काशी के करीब मुगलसराय से एक किन्नर ने पीएम मोदी को दी चुनौती

#मुगलसराय : पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष सोनू किन्नर निर्वाचित

भाजपा की कोई योजना काम नहीं आई, काफी जिच के बाद प्रशासन को प्रमाणपत्र करना पड़ा जारी

मुगलसराय, 13 मई (सच्ची बातें) । महाभारत का एक प्रसंग है। अपने को अपराजेय समझने वाले भीष्म पितामह की मौत का कारण शिखंडी नामक एक किन्नर बना था। ठीक उसी अंदाज में मोदी के बनारस केे करीब पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर पालिका परिषद के चुनाव में एक किन्नर ने भाजपा के बड़े-बड़े सूरमाओं की एक नहीं चलने दी। वह जाति व धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों की खटिया खड़ी करने का कारण बना। काफी जिच के बाद आखिरकार प्रशासन किन्नर को जीत का प्रमाण पत्र देने को विवश हुआ।

कहते हैं न कि इतिहास खुद को दोहराता है। पहले एक त्रासदी की तरह, दूसरी बार मजाक के रूप में। भारतीय जनता पार्टी के आदर्श पुरुष के नाम पर बनी पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सोनू नामक एक किन्नर जीत गया। बनारस के करीब स्थित मुगलसराय का नाम बदल कर भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर किया है।

सोनू किन्नर की जीत भले ही मात्र 422 मतों से हुई, लेकिन एक मायने में यह जीत बहुत बड़ी है। यह नगर पालिका परिषद चंदौली जिले में आता है। यहां के सांसद महेंद्र नाथ पांडेय केंद्र में भारी उद्योग मंत्री हैं। यह जिला एक खास जाति की दबंगई के लिए भी जाना जाता है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष के लिए भारतीय जनता पार्टी ने मालती देवी, कांग्रेस ने सविता खरवार, बहुजन समाज पार्टी ने दीपा तथा समाजवादी पार्टी ने अनीता सोनकर को उम्मीदवार बनाया था। सोनू किन्नर ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा दाखिल किया था।

सभी दलों के उम्मीदवारों ने यह चुनाव जीतने के लिए एड़ी-चोटी का पसीना एक किया, लेकिन भाजपा ने इससे भी ज्यादा। यह तो सर्व विदित ही है कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी चुनाव को जीतने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। यहां भी ऐसा ही हुआ। हर तरह के उपाय किए गए।

13 मई को मतगणना के दौरान का नाटक तो बहुत ही खेद जनक रहा। जब सोनू किन्नर की जीत करीब फाइनल हो गई थी तो भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने फिर से मतगणना की मांग शुरू कर दी। इसका विरोध किन्नर प्रत्याशी ने किया। स्थिति यहां तक पहुंची कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस से जूझने के क्रम में कई किन्नर अधनंगे भी हो गए। आखिरकार सोनू किन्नर की जीत हुई। उनको जीत का प्रमाण पत्र देर शाम दे दिया गया।

किन्नर की जीत के मायने

आज के दौर में भारतीय जनता पार्टी से लोहा लेना आसान नहीं है। लेकिन जो अड़ा, वह जीता भी। सोनू भी डिगी नहीं। उनको न जाति का बल था, न धर्म का। किन्नर समाज के मतदाता भी 50 के ही आसपास हैं, लेकिन यहां की जनता ने जाति व धर्म की राजनीति करने वालों को आईना दिखाने का मन बना लिया था। कम वोट से ही सही, उनको सफलता भी मिली। यहां की जनता ने संदेश दे दिया कि अपराजेय समझने वालों का अंत इसी तरह से किन्नर का सहारा लेकर ही होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस से सटे मुगलसराय में किन्नर की जीत की चर्चा काशी में भी खूब हो रही है।

सोनू ने बताया कि उन्होंने चुनाव की कोई तैयारी नहीं की थी। नेताजी शमीम अहमद मिल्की ने सलाह दी कि अध्यक्ष का चुनाव लड़िए। सभी पुराने समाजवादी आपके चुनाव में लगेंगे। उनकी ही सलाह पर चुनाव लड़ा। जनता ने आशीर्वाद दे दिया। अब जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना है। सोनू ने कहा कि उनको हराने में भारतीय जनता पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन उनको सफलता नहीं मिली। उनकी साजिश का जवाब जनता आने वाले लोकसभा चुनाव में फिर देगी।

 

 

 


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