July 20, 2024 |

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‘दौलत’ के बहाने पल्लवी को आईना दिखाएंगे मिर्जापुर के ‘पीडीएम’

Sachchi Baten

ग्राउंड रिपोर्टः फिलहाल अनुप्रिया ही प्रिय हैं मिर्जापुर के अधिकतकर मतदाताओं को

-पल्लवी पटेल की ही तरह रंग बदलने वाले हैं उनके उम्मीदवार दौलतराम पटेल

-हर जाति, हर धर्म और हर दल के लोगों के साथ मधुर संबंध हैं सांसद अनुप्रिया पटेल के

-यदुनाथ सिंह के पुराने साथियों को भी अच्छी नहीं लग रही दौलतराम पटेल की उम्मीदवारी

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। इस बार के लोकसभा चुनाव में मिर्जापुर पल्लवी पटेल के ‘दौलत’ की थाह लगा लेगा। यहां के मतदाता अपना मन बना चुके हैं। उनके मन में क्या है, यह तो चार जून को ही पता चलेगा।

दरअसल पल्लवी पटेल ने जिस दौलतराम सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है, उनको चुनार के पूर्व विधायक यदुनाथ सिंह का करीबी माना जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि वर्ष 1989 में जब चौधरी अजित सिंह को पछाड़ कर मुलायम सिंह यादव मुख्य मंत्री बन गए तो दौलत राम पटेल ने यदुनाथ सिंह का साथ छोड़ दिया था। यदुनाथ सिंह चौधरी अजित सिंह के साथ थे, और दौलतराम सिंह मुलायम सिंह यादव के साथ हो गए।

दौलतराम सिंह उसी समय से समाजवादी पार्टी की राजनीति करने लगे थे। हालांकि 1991 और 1993 के विधानसभा चुनाव में यदुनाथ सिंह के साथ दौलतराम पटेल थे जरूर, लेकिन पहले वाली सक्रियता नहीं थी। धीरे-धीरे उन पर समाजवादी रंग गाढ़ा होता चला गया। पिछले विधानसभा चुनाव में भी वह समाजवादी झंडा ढोते रहे। हाल ही में  दौलतराम पटेल ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। उनको कांग्रेस पिछड़ा वर्ग का प्रदेश उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया।

कांग्रेस में आते ही दौलतराम पटेल ने मिर्जापुर संसदीय सीट से उम्मीदवारी का दावा कर दिया। इसके लिए उन्होंने कई कार्यक्रम आयोजित किए। बैनर और होर्डिंग्स लगवाई गईं, लेकिन यह सीट इंडिया गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी के खाते में चली गई।

चुनाव लड़ने के लिए अत्यंत जल्दबाजी में दौलतराम पटेल ने टिकट के लिए दूसरे दल की तलाश शुरू कर दी। अंततः अपना दल कमेरावादी की नेता पल्लवी पटेल ने पीडीएम से उनको उम्मीदवार बना दिया।

उम्मीदवारी घोषित किए जाने के बाद इस संवाददाता ने चुनार के क्रांतिकारी विधायक रहे यदुनाथ सिंह के पुराने साथियों से बात की तो किसी ने दौलतराम पटेल के निर्णय को सही नहीं बताया। जिस कुर्मी जाति के वोटों को काटने का दावा किया जा रहा है, उससे जुड़े मतदाताओं की भी पहली और अंतिम पसंद अनुप्रिया पटेल ही हैं।

यह अनायास नहीं है। लोगों ने इसके कारण भी बताए। सामाजिक सम्मान बढ़ाने के साथ ही अनुप्रिया पटेल ने जिले में विकास की जो गंगा बहाई है, उससे  पूरा संसदीय क्षेत्र लाभान्वित हो रहा है। कोई एक जाति या एक धर्म नहीं। एक क्षेत्र भी नहीं। विकास कार्यों की फेहरिस्त लंबी है।

शायद यही कारण है कि मिर्जापुर एकमात्र ऐसा संसदीय क्षेत्र है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अनुप्रिया पटेल का भी नाम सम्मान के साथ लिया जा रहा है। मतदाताओं का कहना है कि अनुप्रिया पटेल ने किसी जाति, धर्म, दल या क्षेत्र के लोगों के साथ भेदभाव नहीं किया। सबको समान भाव से महत्व दिया।

प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि दौलत राम पटेल को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद राजनैतिक हलकों में चर्चा है कि अनुप्रिया पटेल की राह में पल्लवी ने कांटे नहीं, कील लगा दी है। यह गलत आकलन है। पल्लवी पटेल की कोई कील अनुप्रिया पटेल की राह रोकने में सक्षम नहीं है। दरअसल दस वर्षों के दौरान अनुप्रिया पटेल ने मिर्जापुर की इन राहों को इतना रौंद डाला है कि अब कील लगाने का कोई फायदा ही नहीं है।

यदुनाथ सिंह के पुराने साथियों का कहना है कि दौलतराम पटेल यदि स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ते तो पीडीएम की अपेक्षा ज्यादा मत पाते। लोग सवाल कर रहे हैं कि इस जिले में पल्लवी पटेल का क्या योगदान है कि उनके नाम पर किसी को वोट दिया जाए। बहरहार दौलतराम पटेल अपनी उम्मीदवारी से खासे उत्साहित है। मानो उनकी मुराद पूरी हो गई है। जो स्थिति है, उसके अनुसार लगता है कि उनको हार-जीत की चिंता नहीं है। सिर्फ चुनाव लड़ना था, अब लड़ रहे हैं। पार्टी से टिकट तो मिल गया। लेकिन दिल्ली जाने का टिकट तो जनता बनाती है।

 

 


Sachchi Baten

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