July 20, 2024 |

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भारत के पहले युवा चार्टर्ड साइंटिस्ट बने मिर्जापुर के लाल डॉ. मयंक सिंह

Sachchi Baten

 लंदन रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री एंड साइंस काउंसिल ने किया सम्मानित, यूएस में हैं कार्यरत

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए डेंड्रिमर प्रौद्योगिकी के जनक कहे जाने वाले अमेरिका के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. डोनाल्ड टोमालिया ने मयंक को दी बधाई

डॉ. राजू सिंह, अदलहाट (मिर्जापुर)। वैज्ञानिक अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारतीय मूल के वैज्ञानिक डॉ. मयंक सिंह को लंदन की रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री एवं साइंस काउंसिल द्वारा 2023 “चार्टर्ड साइंटिस्ट” के रूप में शामिल किया गया है। इस टीम में सामिल होने वाले साइंटिस्ट डॉ. मयंक सबसे कम उम्र के पहले भारतीय हैं, जिन्होंने डेंड्रिमर नैनो टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
वर्तमान में डॉ. मयंक संयुक्त राज्य अमेरिका के नेशनल डेंड्रिमर एंड नैनोटेक्नोलॉजी सेंटर में अनुसंधान और विकास के वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। साथ ही यूनाइटेड किंगडम-लंदन बायोमिमेटिक रसायन विज्ञान के विशेषज्ञ हैं। वर्तमान में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों एवं एजेंसियों के मूल्यवान सदस्य भी हैं। वह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद के चुनार क्षेत्र के बगही गांव के मूल  निवासी हैं। बगही मॉडल गांव है।
रासायनिक विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्टता को आगे बढ़ाने के लिए लंदन में इस संसथान की स्थापना वर्ष 1841 में 77 वैज्ञानिकों द्वारा की गई, जिसमें डायलिसिस और गैसों के प्रसार के आविष्कारक थॉमस ग्राहम पहले अध्यक्ष के रूप में चुने गए। उन्हें कोलाइड रसायन विज्ञान के संस्थापकों में से एक माना जाता है।
सात साल बाद लंदन की रानी विक्टोरिया द्वारा शाही दर्जा दिया गया, जिसे आज रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के नाम से जाना जाता है। आरएससी दुनिया की सबसे पुराना रासायनिक संगठन है और वर्तमान में यह अपने 182वेंं वर्ष में है।
पिछले साल (11 अक्टूबर, 2022) यह उपलब्धि डॉ. प्रकाश दीवान (सेवानिवृत्त) को मिली थी, जो नईपर हैदराबाद (भारतीय सार्वजनिक दवा अनुसंधान विश्वविद्यालय) के पूर्व निदेशक और सीएसआईआर-आईआईसीटी के निदेशक ग्रेड मुख्य वैज्ञानिक थे।
आपको बताते चले कि वर्तमान में डॉ. दीवान 74 वर्ष के हैं और अभी भी विज्ञान में योगदान दे रहे हैं। भारत में अब तक 10 चार्टर्ड साइंटिस्ट हैं और डॉ. मयंक उनमें से एक हैं।
इस योग्यता के धारक अपने नाम के बाद पोस्ट-नॉमिनल अक्षरों (सीएससीआई) का उपयोग करते है। डॉ. मयंक को विश्व प्रसिद्ध कई अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा (16 नवंबर, 2022) चार्टर्ड साइंटिस्ट के लिए नामित किया गया था। मूल्यांकन प्रक्रिया में लगभग 8 महीने लगे, जिसमें अधिकतर विशेषज्ञ संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जापान और भारत सहित वैश्विक दुनिया की अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से थे। डॉ. मयंक की वैज्ञानिक क्षमता का मूल्यांकन उनके ज्ञान, व्यक्तिगत जिम्मेदारी, पारस्परिक कौशल, पेशेवर अभ्यास, पेशेवर मानकों जैसे विभिन्न चरणों में किया गया था।
चार्टर्ड साइंटिस्ट” की टीम में पिछले वर्ष सामिल होने वाले डॉ. मयंक के गुरु डॉ. दीवान ने इस कामयाबी के लिए डॉ. मयंक को शुभकामनाएं देते हुए चार्टर्ड साइंटिस्ट के प्रमुख दाइत्व को बतलाया और कहा कि चार्टर्ड साइंटिस्ट की मूल रूप से प्रमुख भूमिका वैज्ञानिक सीमाओं के विलय के लिए है, जो वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाती है।
इस तरह के सह-निर्माण के लिए विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है, जो कई विषयों के इंटरफ़ेस पर काम कर सकते हैं। चार्टर्ड साइंटिस्ट विषयों में विज्ञान कीी न केवल पहचान करते हैं, बल्कि अपने अभ्यास से प्रभावी नेतृत्व का प्रदर्शन करते हैं। वे बहुआयामी परियोजनाओं के स्कोपिंग, योजना और प्रबंधन द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के आवेदन को विकसित करने और सुधारने के लिए अपने विशेषज्ञ ज्ञान और व्यापक वैज्ञानिक समझ का उपयोग करते हैं।
डॉ. मयंक इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए डेंड्रिमर प्रौद्योगिकी के जनक कहे जाने वाले अमेरिका के मुख्य वैज्ञानिक, डॉ. डोनाल्ड टोमालिया के मार्गदर्शन, सहयोग और समर्थन के लिए धन्यवाद व्यक्त किया है। डॉ. डोनाल्ड टोमालिया ने बताया कि डॉ. मयंक के लिए यह बहुत बड़ी सफलता है। वह बहुत ही ऊर्जावान हैंं। लैब में कार्य के दौरान वह अपने कामों को जल्द पूरा कर अगले अभियान में जुट जाते हैं।
डॉ. मयंक ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय -झाँसी, भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान-हैदराबाद और विस्कॉन्सिन मेडिकल कॉलेज के आचार्यों द्वारा सहयोग और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया है। डॉ. मयंक की उत्कृष्ट क्षमताओं को कोविड-19 महामारी के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका के आप्रवासन सेवाओं द्वारा पहचाना गया था।
पूर्व की खास बातें
– कोविड-19 महामारी के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका कीी सेना अनुसंधान प्रयोगशाला-रक्षा विभाग एवं अमेरिकी आप्रवासन सेवाओं द्वारा पहचाना गया और कोविड-19 महामारी के लिए असाधारण योग्यता वाले व्यक्ति के रूप में जीवन-काल के लिए ओ-1 वीसा (वर्क परमिट) देकर नेशनल डेंड्रिमर एंड नैनोटेक्नोलॉजी सेंटर में एक पंजीकृत वैज्ञानिक के पद पर नियुक्त किया गया ।
– डॉ. मयंक ने इससे पहले डेंड्रिमर नैनोटेक्नोलॉजी आधारित एंटी-एजिंग (बुढ़ापा विरोधी) क्रीम, जेल, सीरम, ओरल सस्पेंशन इत्यादि फार्मूला भी विकसित किया है, जो उम्र को जवां बनाए रखने में मदद कर रहा है।
-वैज्ञानिक डॉ. मयंक फाइजर के नैनोटेक्नोलॉजी परियोजना में भी विशेषज्ञ के रूप में शामिल थे। जो
संयुक्त राज्य अमेरिका के फाइजर दवा और जैव उद्योग के नैनोटेक्नोलॉजी परियोजना में विशेषज्ञ के रूप में भी शामिल हुए। जहां वह कैंसर, वायरस और विषाक्तता पदार्थों जैसे घातक बीमारियों के इलाज और रोकथाम के लिए डेनड्रिटिक अतिशाखित (डेंड्रिमर नैनोटेक्नोलॉजी) आधारित तकनीक की स्थापना के लिए शामिल थे।

Sachchi Baten

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1 Comment
  1. Mittelype says

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