July 20, 2024 |

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MIRZAPUR : आजादी के अमृतकाल में भी नहरों में टेल तक पानी नहीं पहुंचा

Sachchi Baten

मिर्जापुर के जमालपुर ब्लॉक के विकास की हकीकत

जमालपुर ब्लॉक के साथ सौतेला व्यवहार क्यों, रोता नहीं इसलिए क्या

-मौसम ने दिखाया रंग तो खुल गई दूरदर्शी विकास की पोल

-सांसद व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की किसानों से अपील ‘धैर्य बनाए रखें’

वैकल्पिक व्यवस्था में जुटने के लिए अधिकारियों को दिए निर्देश

राजेश पटेल, जमालपुर (सच्ची बातें)। धैर्य से पेट नहीं भरता। न ही बिटिया रानी की शादी होती है। बच्चों की पढ़ाई भी नहीं होती। न इज्जत ढंकी जा सकती है और न ही किसी की आवभगत। मिर्जापुर जिले के जमालपुर ब्लॉक के किसान बहुत ही जीवट के हैं, जो आजादी के बाद से आज तक धैर्य के ही सहारे जी रहे हैं। देश आजादी का अमृतकाल मना रहा है। इधर सूखा के कारण किसानों को मरने के लिए जहर खरीदने भर भी पैसे नहीं हैं।

देखा जाए तो जमालपुर विकास खंड का विकास जिले के अन्य विकासखंडों की अपेक्षा काफी कम हुआ। इसमें किसी एक का दोष नहीं है। यहां के जनप्रतिनिधियों ने धान का कटोरा कहे जाने वाले इस क्षेत्र की हमेशा उपेक्षा की। यह इलाका हर मामले में पिछड़ा हुआ है। सिंचाई के लिए पानी नहीं, पढ़ाई के लिए कॉलेज नहीं और दवाई के लिए अच्छा अस्पताल नहीं। इसे जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा नहीं तो और क्या कहा जाएगा।

ताजा स्थिति यह है कि इस साल भयंकर सूखे जैसी स्थिति है। सिंचाई की दूरगामी परियोजनाओं पर गंभीरता न दिखाने से गरई प्रणाली की सभी नहरों के टेल के किसान एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। अहरौरा बांध से हाल ही में पानी छोड़ा गया। 18 अगस्त तक ही पानी चलाया जाएगा। अभी स्थिति यह है कि चौकिया ब्रांच में बनौली गांव के सामने तक पानी पहुंचा है। इसके आगे ढेबरा, मुड़हुआ, भभौरा, देवरिल्ला, गुलौरी, गौरी, चरगोड़ा तक पानी कब पहुंचेगा, या नहीं पहुंचेगा, कोई ठीक नहीं है। सिंचाई खंड चुनार के सहायक अभियंता केके सिंह ने बताया कि चार दिन ही नहरों को चलाने लायक पानी बांध में बचा है। प्रयास हो रहा है कि टेल तक पानी पहुंच जाए। सहायक अभियंता अश्विनी यादव ने बताया कि अंतिम दिन तक टेल तक पानी पहुंचाने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है।

मतलब यह कि टेल तक पानी पहुंचाना ही विभाग का लक्ष्य है। सिंचाई का नहीं। उधर बिकसी माइनर की भी यही स्थिति है। 14 अगस्त तक छह किलोमीटर तक पानी पहुंच पाया था। इसके आगे कैसे पानी बढ़ेगा, जवाब देने के लिए कोई तैयार नहीं है। जरगो बांध के साथ क्या हुआ, सभी वाकिफ हैं। किसान कल्याण समिति जरगो कमांड के किसान विरोध करते रहे, लेकिन नल-जल योजना के लिए गर्मी भर पानी की बर्बादी की जाती रही। किसानों की आवाज को सुनने वाला कोई नहीं था। हालांकि इस बांध में अभी 20 दिन नहर चलाने भर पानी है।

सोन से पानी लिफ्ट करके अहरौरा जलाशय तक पहुंचाने की योजना काे सुनते-सुनते एक पीढ़ी चली गई, दूसरी बुढ़ापे के दौर में है, तीसरी अधेड़ हो चुकी है। अब इस योजना का नाम ही नहीं लिया जाता। अहरौरा व जरगो कमांड के लिए नरायनपुर पंप कैनाल से पानी देने की जिस कवायद पर आज बात हो रही है, वह पहले ही हो जाती तो आज इस तरह के दिन देखने नहीं पड़ते।

जबकि इसकी चर्चा किसान करीब दस वर्ष से कर रहे हैं। लेकिन जनप्रतिनिधियों को शायद किसानों की चिंता नहीं है। खासकर जमालपुर को तो एकदम हासिए पर छोड़ दिया है। ऐसा शायद इसलिए कि जमालपुर ब्लॉक के किसान रोते नहीं। गिड़गिड़ाते नहीं।

केवल सिंचाई नहीं, सड़क, कॉलेज, अस्पताल के मामले में भी यह क्षेत्र अन्य की अपेक्षा काफी पिछड़ा हुआ है। इस ब्लॉक में एक भी ऐसी सड़क नहीं है,  जिस पर 30 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से ही गाड़ी चल सके। ओड़ी-देवरिल्ला मार्ग पर मुरदहवा नाला का पुल अभी तक आवागमन लायक तैयार नहीं हो सका है। इस पुल का निर्माण दो साल से चल रहा है।

पिछले विधानसभा चुनाव के समय जमालपुर में बालिका महाविद्यालय की स्थापना का शोर खूब मचा था। यहां तक कहा गया था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इसके शिलान्यास का कार्यक्रम भी लगभग तय हो चुका है। स्थिति सभी के सामने है। अब कोई इस पर बात करने को भी तैयार नहीं है। इस इलाके में बालिकाओं के लिए अलग से इंटर कॉलेज भी नहीं है।

हालांकि स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पहले 14 अगस्त को इलाके की सांसद और केंद्र सरकार में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने जिले के प्रमुख बांधों का निरीक्षण किया तथा किसानों सेे धैर्य धारण करने की अपील करते हुए सिंचाई के लिए दूरगामी योजनाओं को तैयार करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को सिंचाई की कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि वर्तमान में अदवा डैम में 20 दिन, मेजा डैम में 12 दिन, सिरसी डैम में 10 दिन, जरगो डैम में 20 दिन और अहरौरा डैम में 4 दिन का सिंचाई हेतु पानी शेष है। सांसद ने चिंता जताते हुए किसानों की खेती का भविष्य और आगामी पेयजल की चुनौती को देखते हुए अधिकारियों से अभी से इसकी वैकल्पिक व्यवस्था पर काम करने और इस समस्या के स्थायी निदान निकालने हेतु जुटने का निर्देश दिया।

मेजा डैम पर उपस्थित क्षेत्रीय किसानों ने भी बाण सागर डैम के पानी को ले आने और इससे सिरसी डैम के निचले हिस्से तथा अपर खजुरी, लोवर खजूरी कमाण्ड में देने की बात उठायी तो विभागीय अभियंता द्वारा अवगत कराया गया कि आज अदवा बैराज से 900 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जो अभी डैम मैं नहीं आ पाया है। डैम में पानी आ जाने के बाद लगभग 4 मीटर जब डैम में पानी और उपर आ जायेगा, तब अपर खजूरी या लोवर खजूरी को मेजा-जरगो लिंक में पानी दिया जा सकेगा। परंतु अभी उक्त मेजा जरगो लिंक से 4 मीटर नीचे लेबल रहने के कारण आगे पानी देना संम्भव नहीं है।

साथ ही यह भी अवगत कराया गया था कि जितना पानी बाण सागर से 900 क्यूसेक आने की संभावना है, इससे अधिक पानी अभी हमें सिंचाई हेतु इस डैम से मेजा कमाण्ड को देना पड़ रहा है।

निरीक्षण में मैदानी क्षेत्र के जरगो और अहरौरा डैमों की स्थिति भी अत्यंत भयावह पाई। वैकल्पिक व्यवस्था हेतु नरायनपुर पम्प कैनाल की क्षमता वृद्धि के सम्बन्ध मे मूसाखांड़ डिवीजन वाराणसी द्वारा दूरभाष पर अवगत कराया गया कि 120 क्यूसेक की जगह 150 क्यूसेक के नए पम्प लग रहे हैं, जिसमें से 13 पम्प स्थल पर आ चुके हैं। 3 पम्प स्थापित होकर चल रहे हैं। 2 पंप स्थापना की प्रक्रिया में हैं और शेष सभी पंप मार्च तक स्थापित हो जाएंगे। वर्तमान में 3 नए 150 और 7 पुराने 120 क्यूसेक से कुल 10 पम्प चल रहे हैं।

 


Sachchi Baten

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