July 24, 2024 |

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मिर्जापुर के वैज्ञानिक डॉ. मयंक को अमेरिका में मिली बड़ी जिम्मेदारी

Sachchi Baten

डॉ. मयंक अमेरिका में मेडिकल छात्रों व रेजिडेंट चिकित्सकों को देंगे प्रशिक्षण

-मिर्जापुर जिला के चुनार तहसील के बगही गांव निवासी डॉ. मयंक सिंह विश्व स्वास्थ्य संगठन के हैं सलाहकार
-भारत के पहले युवा चार्टर्ड साइंटिस्ट हैं डॉ. मयंक,  अब संयुक्त रूप से चार संस्थानों के साथ करेंगे कार्य

डॉ. राजू पटेल, अदलहाट/मिर्जापुर (सच्ची बातें)। चिकित्सा और औषधि विज्ञान में उत्कृष्ट योगदान के लिए भारतीय मूल के प्रधान वैज्ञानिक मिर्जापुर जिले के डॉ. मयंक सिंह को संयुक्त राज्य अमरीका के सेंट्रल ‘मिशिगन यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन” में फ़ैकल्टी (एसोसिएट प्रोफेसर) के तौर पर शामिल किया गया। यहाँ वह चिकित्सा के नए निष्कर्ष में योगदान करने के साथ अनुसंधान की योजनाओं पर काम करेंगे। इसके साथ ही मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट चिकित्सकों को उचित अनुसंधान पद्धति में प्रशिक्षित करेंगे। जिनमें विभिन्न प्रकार की बीमारियों के लिए बेहतर उपचार समझना और खोजना शामिल है।

चुनार क्षेत्र के बगहीं गांव निवासी वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका के ‘नेशनल डेंड्रिमर एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर’ में अनुसंधान और विकास के प्रधान वैज्ञानिक एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन जिनेवा-स्विट्ज़रलैंड के सार्वजनिक सलाहकार डॉ. मयंक के लिए अमरीका में एफडीए के अंतर्गत चल रहे क्लीनिकल ट्रायल्स में भाग लेने वाले लोगों के अधिकार, सुरक्षा और कल्याण की रक्षा करना एक महत्वपूर्ण कार्य-क्षेत्र होगा। सुनिश्चित करना होगा कि क्लीनिकल ट्रायल्स को फेडरल नीति और अच्छे क्लीनिकल अभ्यास नियमों के अनुसार ही डिजाइन, संचालन, विश्लेषण और रिपोर्ट किया जाए।

डॉ. मयंक ने मोबाइल कॉल पर संक्षेप में बताया कि अनुसन्धान के माध्यम से विकसित नई चिकित्सा पद्धतियों के सामान्य प्रयोग से पूर्व इनके प्रभाव व कुप्रभावों का अध्ययन करने के लिये किया गया शोध क्लीनिकल ट्रायल्स (नैदानिक परीक्षण) कहलाता है। चिकित्सा पद्धतियों के अन्तर्गत टीका, दवा, आहार संबंधी विकल्प, आहार की खुराक, चिकित्सीय उपकरण, जैव चिकित्सा आदि आते हैं। क्लीनिकल ट्रायल्स, नई पद्धतियों की सुरक्षा व दक्षता के संबंध में बेहतर आंकड़े प्रदान करता है। प्रत्येक अध्ययन वैज्ञानिक प्रश्नों का जवाब देता है और बीमारी को रोकने के, इसके परीक्षण के लिए, निदान, या उपचार के लिए बेहतर तरीके खोजने का प्रयास करता है। क्लीनिकल ट्रायल्स नए उपचार की पहले से उपलब्ध उपचार के साथ तुलना भी कर सकता हैं।

इसके साथ ही यूनाइटेड किंगडम लंदन में रासायनिक जीव-विज्ञान बायोमिमेटिक रसायन विज्ञान के प्रतिष्ठित फ़ैकल्टी के रूप में भी कार्यरत हैं। डॉ. मयंक कई पेटेंट और पुस्तक अध्यायों के लेखक भी हैं। जिन्हे भारत, अमेरिका, लंदन, कनाडा, जापान, पुर्तगाल और स्विट्ज़रलैंड से विभिन्न पुरस्कार और मान्यताएं मिली हैं। जिनकी उत्कृष्ट क्षमताओं को कोविड-19 महामारी के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा पहचाना गया था।

डॉ. मयंक को सीएसआईआर-इंडिया द्वारा मेडिकल एंड फार्मास्युटिकल साइंस में वरिष्ठ अनुसंधान फेलोशिप से भी सम्मानित किया गया और सीएसआईआर-आईआईसीटी, हैदराबाद से फार्मास्युटिकल साइंस और प्रौद्योगिकी में पीएचडी प्राप्त की एवं साथ ही साथ नलसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद से पेटेंट कानून में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पूरा किया। डॉ. मयंक ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झाँसी,भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान-हैदराबाद और विस्कॉन्सिन मेडिकल कॉलेज के आचार्यों द्वारा सहयोग और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया हैं ।


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