July 23, 2024 |

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Manipur : देश को शर्मसार करने वाली घटनाएं तो कई राज्यों में हुईं, पर मणिपुर की सबसे अलग

Sachchi Baten

मणिपुर की घटना के 49 दिन बाद एफआइआर व 77 दिन बाद कार्रवाई

 

-2018 में बिहार के आरा में भी चला था नारी के सम्मान पर ‘आरा’

-मध्य प्रदेश में 2013-2015 के बीच महिलाओं के निर्वस्त्र कर घुमाने की हुई थीं 31 घटनाएं

-झारखंड का रांची, दुमका, गुमला भी इससे अछूता नहीं

-उत्तर प्रदेश में 42 साल पहले बागपत मेंं  पुलिस दारोगा ने ही एक महिला को निर्वस्त्र कर बाजार में घुमाया था

 

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातेंं)। वैसे तो देश के कई अन्य राज्यों मेंं भी महिलाओं को नग्न  कर उनको घुमाने की घटनाएंं होती रही हैंं, लेकिन मणिपुर की घटना में तो डबल इंंजन की सरकार पूरी तरह से कटघरे में हैै। यह घटना होती है चार मई को । 49 दिन बाद एफआइआर होती है। और, 77 दिन बाद कार्रवाई। वह भी सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने पर भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा सख्त रुख अपनाए जाने के बाद। अन्य प्रदेशों में चाहे जिसकी भी सरकार रही हो, इस तरह की घटना प्रकाश में आने के बाद तुरंत कार्रवाई की गई।

                            देश को शर्मसार करने वाली 2018 की बिहार के भोजपुर के बिहिया गांव की तस्वीर

 

अगस्त 2018 में बिहार के भोजपुर जिला के बिहिया गांव में एक छात्र की हत्या से उपजे आक्रोश का शिकार एक महिला को बनना पड़ा था। भीड़ ने उसके घर में आग लगाने के बाद उसे निर्वस्त्र कर पूरे गांव में घुमाया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद राज्य प्रशासन हरकत में आ गया था। इस संबंध में 300 लोगों को आरोपित करते हुए 15 आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया था। दो थानाध्यक्ष समेत 8 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था।

इसी साल बीते मार्च में झारखंड के रांची के अनगड़ा थाना क्षेत्र के एक गांव में एक महिला को उसके परिजन ने ही निर्वस्त्र कर भीड़ के बीच घंटों खड़ा रखा। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने एक तौलिया दिया, तब उसने अपनी आबरू को ढंका। इस मामले में सात नामजद समेत 70 से ज्यादा आरोपी बनाए गए थे। नामजद की तत्काल गिरफ्तारी की गई।

झारखंड के ही दुमका जिले के रानीश्वर थाना क्षेत्र के एक गांव में अगस्त 2021 में एक महिला को निर्वस्त्र कर उसे जूतों की माला पहना कर पूरे गांव में घुमाया गया। इस मामले को संज्ञान में आते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित महिला के बयान पर दो महिलाओं समेत 12 लोगों को नामजद किया था। इस मामले में भी आरोपितों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की गई।

जनवरी 2015 में झारखंड के ही गुमला जिले में एक महिला को भरी पंचायत में निर्वस्त्र कर उसके साथ इतनी दरिंदगी की गई कि उसकी मौत ही हो गई। उस पर डायन होने का आरोप लगाकर उसके साथ अमानवीयता की सारी हदें पार की गईं।

अक्टूबर 2020 में झारखंड के गढ़वा जिले के नारायणपुर में इसी तरह की घटना हुई थी। इस घटना में करीब 50 लोगों की भीड़ ने तीन महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया गया था। रात की घटना होने के बावजूद सूचना मिलने पर पुलिस ने शीघ्र पहुंच कर महिलाओं को बचाया। इनके साथ एक पुरुष भी था।

मध्य प्रदेश में तो 2013 से 2015 के बीच दो वर्ष में महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने की 31 घटनाएं हुई थीं। इसको लेकर मानवाधिकार आयोग ने राज्य पुलिस को नोटिस भी जारी किया था। सतना, झाबुआ, शहडोल आदि में ऐसी घटनाएं हुईं।

प. बंगाल, ओडिशा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर सहित अन्य राज्यों में भी कभी-कभार इस तरह की घटनाएं होती हैं। लेकिन घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन कार्रवाई करता है। छिपाने का प्रयास नहीं। मणिपुर की घटना इन घटनाओं से अलग इसी मामले में है। मणिपुर में भीड़ द्वारा दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर उनकी परेड निकालने व उनमें से एक के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना के 49 दिन बाद एफआइआर ही दर्ज होती है। डबल इंजन की सरकार के लिए डूब कर मरने के लिए इतना ही काफी है। इससे भी खराब बात यह है कि कार्रवाई 77 दिनों बाद होती है। जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का हंटर चलने के बाद।

उत्तर प्रदेश में तो करीब 42 साल पहले 18 जून 1980 को बागपत थाना में महिला के साथ पुलिसवालों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। फिर वहां के एक दारोगा नरेंद्र सिंह महिला को निर्वस्त्र कर पूरे बागपत बाजार में घुमाया था। उस समय केंद्र में इंदिरा गांधी तथा प्रदेश में विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार थी।

बागपत कांड में कार्रवाई न होने पर मेरठ में चरण सिंह धरने पर बैठ गए थे।

बागपत कांड को लेकर धरना पर बैठेे चौधरी चरण सिंह (फाइल फोटो सौजन्य से दैनिक भास्कर)

मामला बागपत से जुड़ा था, सो चौधरी चरण सिंह ने आरोपित पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए धरना पर भी बैठे थे। इस मामले में 1988 में जिला न्यायालय ने 6 पुलिसवालों को दोषी मानते हुए दो को फांसी और चार को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। मामले का फैसला देने वाले जज वीडी दुबे ने अपने फैसले में लिखा था कि इस तरह के मामले मुझे ‘पुलिस राज’ के आदिम दिनों की याद दिलाते हैं, जब लोग ‘निरंकुश’ की दया पर रहते थे। समाज के अस्तित्व के लिए ऐसी बुराइयों को खत्म करना जरूरी है।

 

 

 

 


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