July 16, 2024 |

BREAKING NEWS

- Advertisement -

किसानों का पसीना बहा ले गई माघ की बारिश

Sachchi Baten

कहीं-कहीं ओले पड़ने से दलहनी-तिहलनी फसलों की भारी क्षति

-पलिहर की मसूर थी पूरे रुआब में, आसमान से आ गई आफत

राजेश पटेल, मिर्जापुर (सच्ची बातें)। माघ की बारिश बोले तो किसानों की बर्बादी का प्राकृतिक साधन। यकीन मानिए, किसानों का पसीना बहा ले गई यह बारिश। पलिहर में बोई गई मसूर के क्या कहने। पूरे रुआब में थी फसल। सुबह तूफान ने जमींदोज कर दिया। रही-सही कसर बारिश ने पूरी कर दी। हालांकि गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं है। ओले न गिरें बस। मगर खबर है कि कहीं-कहीं ओले भी गिरे हैं। वहां गेहूंं के पौधों को भी क्षति पहुंची होगी। यदि बालियां निकल चुकी हैं तो ज्यादा नुकसान है।

घाघ की एक कहावत है- अगहन बरसे हूण, पूस बरसे दून। माघ में सवाई, फागुन में बरसे तो घर से भी जाई। मतलब अगहन की बारिस रबी की फसल के सोना जैसी मानी जाती है। पूस में बारिश हो तो फसल का उत्पादन दोगुना होता है। माघ में बारिश हुई तो यह घटकर सवाई ही रह जाता है। और, यदि फागुन में बारिश होती है तो खाद-बीज के साथ सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है।

इस साल पूस में भी बारिश हुई। फसलें खुशहाल थीं। पूरे इलाके की फसलें स्वस्थ थीं। हर किसान इस साल सरसों के फूल, हवा के साथ लहराते गेहूं के पौधे, जिनमें बालियां निकलने वाली हैं, उनमें हंसी भी देखकर काफी खुश थे।

खासकर पलिहर की फसल लुंड-मुंड होकर चढ़ी ही आ रही थी। सरसों में दाने पड़ गए हैं। मसूर में फूल लगने शुरू हुए हैं। कहीं-कहीं मसूर के पौधों की लंबाई घुटने भर से ज्यादा हो जाने के कारण बारिश का असर ज्यादा रहा। पौधे गिर गए। एक के ऊपर एक। अब पौधे को जो हिस्सा ऊपर रहेगा, यानि सूरज की सीधी रौशनी मिलेगी, उसी हिस्से में फूल और फूलों में दाने लगेंगे।

पलिहार की मसूर पूरी तरह से बर्बाद हो गई। यह कहना गलत नहीं होगा। दरअसल खरीफ सीजन में इस साल सूखा पड़ा था। जिन खेतों में धान की रोपाई नहीं हो सकी थी, उनमें पहले ही मसूर, सरसो, मटर आदि की बोवाई कर दी गई थी। ताकत के साथ समय मिलने से फसलें उफान पर थीं। यह बारिश नहीं होती तो पलिहर की मसूर रखने की जगह नहीं मिलती।

इसी तरह का मौसम 14 व 15 फरवरी को भी रहने की संभावना है। बारिश ने जाती ठंड को भी वापस बुला लिया।

ओलावृष्टि/असामयिक वर्षा के कारण नष्ट हुई फसलों की सूचना कृषक टोल फ्री नंबर पर दे जानकारी

मिर्जापुर : उप कृषि निदेशक विकेश पटेल ने एक विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया है कि
जनपद मीरजापुर के किसान भाईयों को सूचित किया जाता है कि मौसम विज्ञान केन्द्र लखनऊ के द्वारा अवगत कराया गया है कि आगामी दो दिनों तक मौसम की स्थिति खराब रहेगी। राज्य के अलग-अलग स्थानों पर गरज और बिजली के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि की संभावना व बिजली गिरने की संभावना है।
जनपद में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संचालित है, जिसके अन्तर्गत रबी मौसम की सभी प्रमुख फसलें यथा- गेहूँ, जौ, चना, मटर, मसूर, लाही-सरसों एवं अलसी को ग्राम पंचायत स्तर पर अधिसूचित किया गया है। कवर किये गये जोखिमों में स्थानीय आपदाओं के अन्तर्गत खड़ी फसलों को असामयिक वर्षा, ओलावृष्टि, जलभराव आदि से उत्पन्न क्षति की स्थिति में योजना के प्राविधानों के अनुसार बीमा कम्पनी द्वारा सहायता के रूप में क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है। ऐसे किसान भाई जिन्होंने रबी 2023-24 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत अधिसूचित फसल यथा- गेहूँ, चना, मटर, मसूर एवं सरसों पर बीमा कराया है और ओलावृष्टि/असामयिक वर्षा के कारण उनकी फसल नष्ट हो गयी है, उनसे अनुरोध है कि तत्काल (72 घंटे के अन्दर) इसकी सूचना टोल फ्री नं0- 18002091111 या 18008896868 अथवा 14447 पर काल करके अवगत करा दें अथवा कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारी या अपने नजदीकी बैंक शाखा पर भी प्रार्थना पत्र के माध्यम से अवगत करा सकते है। किसानों द्वारा प्राप्त आवेदन पत्रों पर कृषि विभाग, राजस्व विभाग व बीमा कम्पनी की संयुक्त टीम में साथ क्षति वालें क्षेत्रों का सर्वे भी किया जायेगा।

 


Sachchi Baten

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Leave A Reply

Your email address will not be published.